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MP Election 2023: चुनाव में फंसा पेच तो बागियों व निर्दलीयों के हाथ में होगी सत्ता की चाबी
Sat, 02 Dec 2023 06:55 PM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Sat, 02 Dec 2023 06:55 PM IST
सार
एग्जिट पोल के बाद मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों यह दावा कर रहे हैं कि हमारी सरकार आने वाली है। इसके बावजूद ये लोग बागियों से संपर्क साध रहे हैं। विंध्य क्षेत्र से मैहर विधानसभा सीट आती हैं।
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MP Election 2023
- फोटो : अमर उजाला,
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विस्तार
मध्य प्रदेश में रविवार को चुनाव के नतीजे आ जाएंगे। इससे पहले सियासी दलों ने सीटों को लेकर जोड़ घटाव शुरू कर दिया है। ऐसे में सबकी निगाहें उन बागियों पर टिक गई जो दमदार स्थिति में दिख रहे हैं। यह चेहरे भाजपा और कांग्रेस से ही जुड़े रहे हैं। ऐसे में चर्चा है कि पार्टियों ने इनसे संपर्क करना शुरू कर दिया है। प्रदेश के आधा दर्जन के करीब सीटों पर इनकी जीत दिख रही हैं। हाल ही में आए एग्जिट पोल में ऐसी संभावना दिखी है।
एग्जिट पोल के बाद मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों यह दावा कर रहे हैं कि हमारी सरकार आने वाली है। इसके बावजूद ये लोग बागियों से संपर्क साध रहे हैं। विंध्य क्षेत्र से मैहर विधानसभा सीट आती हैं। भाजपा से बागी नारायण त्रिपाठी यहां अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ रहे हैं। वोटिंग के बाद इनकी स्थिति मजबूत नजर आ रही है। साथ ही इनके रिश्ते भाजपा और कांग्रेस दोनों में अच्छे हैं। ऐसे में दोनों ही दल के लोग कथित रूप से इनके संपर्क में हैं।
ऐसी ही स्थिति विंध्य में सीधी सीट पर भी है। पेशाब कांड से चर्चा में आए भाजपा विधायक को पार्टी ने इस बार टिकट नहीं दिया। वहां से सीधी सांसद रीति पाठक को मैदान में उतारा है। इसके बाद विधायक केदार शुक्ला बागी बनकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं। कहा जा रहा है कि यहां भी उन मुकाबले को कांटे की टक्कर में बदल दिया है।
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बुरहानपुर विधानसभा सीट पर भी मुकाबला दिलचस्प है। भाजपा ने यहां से पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस को टिकट दिया है तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान के बेटे हर्ष सिंह चौहान नाराज हो गए हैं। उसके बाद वह निर्दलीय मैदान में हैं। अर्चना की तुलना में हर्ष का पलड़ा भारी दिख रहा हैं। ऐसे में भाजपा उन्हें अपने पाले में करने की जुगत में जुट गई हैं।
इसी तरह से महू में भी कांग्रेस के पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार निर्दलीय उतरने से मामला त्रिकोणीय हो गया है। भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई हैं। दरबार यदि बाजी जीत जाते हैं तो कांग्रेस उन्हें मनाने की कोशिश करेगी।
यहीं हाल आलोट में भी हैं टिकट नहीं मिलने से नाराज पूर्व सांसद प्रेमचंद्र गुड्डू निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं। गुड्डू की गिनती कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में होती है। उनके उतरने से कांग्रेस का कही समीकरण बिगड़ेगा। ऐसे में रिजल्ट से पहले गुड्डू पर भी पार्टी की नजर हैं।
इसी तरह से बुंदलेखंड और ग्वालियर चंबल की कुछ सीटों पर सपा और बीएसपी का पलड़ा भारी दिख रहा हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी बीएसपी ने दो और सपा 1 सीट जीती थी। इस बार भी ऐसे ही आसार दिख रहे हैं। लेकिन जीत के बाद ये दल किसके साथ जाएंगे यह साफ नहीं हैं। 2018 में दोनों ने कांग्रेस का साथ दिया था।
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एग्जिट पोल के बाद मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस दोनों यह दावा कर रहे हैं कि हमारी सरकार आने वाली है। इसके बावजूद ये लोग बागियों से संपर्क साध रहे हैं। विंध्य क्षेत्र से मैहर विधानसभा सीट आती हैं। भाजपा से बागी नारायण त्रिपाठी यहां अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव लड़ रहे हैं। वोटिंग के बाद इनकी स्थिति मजबूत नजर आ रही है। साथ ही इनके रिश्ते भाजपा और कांग्रेस दोनों में अच्छे हैं। ऐसे में दोनों ही दल के लोग कथित रूप से इनके संपर्क में हैं।
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ऐसी ही स्थिति विंध्य में सीधी सीट पर भी है। पेशाब कांड से चर्चा में आए भाजपा विधायक को पार्टी ने इस बार टिकट नहीं दिया। वहां से सीधी सांसद रीति पाठक को मैदान में उतारा है। इसके बाद विधायक केदार शुक्ला बागी बनकर निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए हैं। कहा जा रहा है कि यहां भी उन मुकाबले को कांटे की टक्कर में बदल दिया है।
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बुरहानपुर विधानसभा सीट पर भी मुकाबला दिलचस्प है। भाजपा ने यहां से पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस को टिकट दिया है तो पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान के बेटे हर्ष सिंह चौहान नाराज हो गए हैं। उसके बाद वह निर्दलीय मैदान में हैं। अर्चना की तुलना में हर्ष का पलड़ा भारी दिख रहा हैं। ऐसे में भाजपा उन्हें अपने पाले में करने की जुगत में जुट गई हैं।
इसी तरह से महू में भी कांग्रेस के पूर्व विधायक अंतर सिंह दरबार निर्दलीय उतरने से मामला त्रिकोणीय हो गया है। भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई हैं। दरबार यदि बाजी जीत जाते हैं तो कांग्रेस उन्हें मनाने की कोशिश करेगी।
यहीं हाल आलोट में भी हैं टिकट नहीं मिलने से नाराज पूर्व सांसद प्रेमचंद्र गुड्डू निर्दलीय मैदान में उतर गए हैं। गुड्डू की गिनती कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में होती है। उनके उतरने से कांग्रेस का कही समीकरण बिगड़ेगा। ऐसे में रिजल्ट से पहले गुड्डू पर भी पार्टी की नजर हैं।
इसी तरह से बुंदलेखंड और ग्वालियर चंबल की कुछ सीटों पर सपा और बीएसपी का पलड़ा भारी दिख रहा हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी बीएसपी ने दो और सपा 1 सीट जीती थी। इस बार भी ऐसे ही आसार दिख रहे हैं। लेकिन जीत के बाद ये दल किसके साथ जाएंगे यह साफ नहीं हैं। 2018 में दोनों ने कांग्रेस का साथ दिया था।
