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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Mandsaur: Three-day bird survey work completed in Gandhisagar Sanctuary, more than 200 birds identified.

Mandsaur: गांधीसागर अभयारण्य में तीन दिनी पक्षी सर्वेक्षण का कार्य पूरा, 200 से अधिक पक्षियों की हुई पहचान

Sun, 03 Mar 2024 10:58 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, मंदसौर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, मंदसौर Published by: दिनेश शर्मा Updated Sun, 03 Mar 2024 10:58 PM IST
सार

तीन दिवसीय पक्षी सर्वेक्षण में कुल नौ राज्यों के 50 से अधिक पक्षी प्रेमी एवं गांधीसागर अभ्यारण्य के 60 से अधिक स्टाफ एवं सुरक्षा श्रमिकों ने 25 निर्धारित रूट पर सुबह एवं शाम को पक्षी सर्वेक्षण का कार्य किया।

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Mandsaur: Three-day bird survey work completed in Gandhisagar Sanctuary, more than 200 birds identified.
गांधीसागर में पक्षियों की जैव विविधता पूरे भारत वर्ष से पक्षी प्रेमियों को यहां आकर्षित करती है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पश्चिमी मध्यप्रदेश अंतर्गत मंदसौर जिले के एक मात्र वन्यजीव अभयारण्य गांधीसागर में एक मार्च को शुरू हुए तीन दिवसीय पक्षी गणना का समापन विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर हुआ। 
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तीन दिवसीय पक्षी सर्वेक्षण में कुल नौ राज्यों के 50 से अधिक पक्षी प्रेमी एवं गांधीसागर अभ्यारण्य के 60 से अधिक स्टाफ एवं सुरक्षा श्रमिकों ने 25 निर्धारित रूट पर सुबह एवं शाम को पक्षी सर्वेक्षण का कार्य किया। वन संरक्षक एवं वन मंडल अधिकारी भी सर्वेक्षण के दौरान उपस्थित रहे। तीन दिवसीय पक्षी सर्वेक्षण के दौरान वन संरक्षक उज्जैन एम. आर. बघेल तथा वन मंडल अधिकारी मंदसौर संजय रायखेरे ने भी पक्षी सर्वेक्षण कार्य में सम्मिलित होकर पक्षी प्रेमियों का हौसला बढ़ाया।
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इस बार के पक्षी सर्वेक्षण की ये रही खास बातें
गांधीसागर में पक्षीयों की जैव विविधता पूरे भारत वर्ष से पक्षी प्रेमियों को यहां आकर्षित करती है। इस वर्ष भी कुल नौ राज्यों से 250 से अधिक पक्षी प्रेमियों के आवेदन में से 50 पक्षी प्रेमियों को सर्वेक्षण का मौका मिला। चार राज्यों की 10 से अधिक महिला प्रतिभागी भी इस सर्वेक्षण कार्य में सम्मिलित हुईं। सर्वेक्षण के दौरान ह्यूमस लार्क प्रजाति का पक्षी पहली बार गांधीसागर मे रिकॉर्ड हुआ। एक से तीन मार्च तक हुई बूंदाबादी एवं बादलों के बीच भी प्रतिभागियों ने 200 से अधिक प्रजाति के पक्षियों को अपने कैमरों में कैद किया, जो उनके पक्षियों के प्रति प्रेम को दिखाता है। सर्वेक्षण के दौरान पहली बार एशियाई राज गिद्ध तथा ब्राउन फिश आउल के नेस्टिंग (घोंसले) देखे गए जो यह दर्शाते हैं कि यहां का क्षेत्र प्रजनन के लिए भी उपयुक्त है।
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इस बार के सर्वेक्षण में पूर्व के वर्षों की तुलना में इस वर्ष रही शीत ऋतु एवं सर्वेक्षण के दौरान हुई बारिश से प्रवासी पक्षियों एवं स्थानिय पक्षियों की कुछ प्रजातियां नही देखी जा सकीं तथा बेमौसम होने वाली बारिश का प्रभाव भी इनकी संख्या पर पड़ा। 


पक्षियों की जैव विविधता स्वच्छ पारिस्थितकीय तंत्र का है सूचक
वन संरक्षक उज्जैन एमआर बघेल ने बताया कि वैसे तो हर एक जीव प्रकृति का अभिन्न अंग है किंतु किसी क्षेत्र में पक्षियों की जैव विविधता वहां के स्वच्छ पारिस्थितकीय तंत्र का सूचक है तथा गांधीसागर में 200 से अधिक प्रजाति के पक्षियों की जैव विविधता यह दर्शाती है कि गाँधीसागर अभयारण्य के खुले घांस के मैदान तथा गांधीसागर जलाशय वन्य जीवों के लिए भी अच्छे आवास स्थल हो सकते हैं। इस प्रकार के सर्वेक्षण कार्य सामान्य लोगों को वन एवं वन्यजीवों के साथ जोड़ते हुए इनके संरक्षण के प्रति जागरूक करने का कार्य करते हैं।
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