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मिसाल: यहां दरगाह पर हिंदू मनाते हैं ईद

Tue, 29 Jul 2014 02:53 PM IST
Updated Tue, 29 Jul 2014 02:53 PM IST
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धर्म के नाम पर सियासत करने वालों ने हमेशा समाज को बांटने की चाल चली है, लेकिन इबादत और आस्था के आगे ऐसी चालें नाकाम साबित होती रही हैं।

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सीजी खबर के मुताबिक ऐसी एक मिसाल मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित मुक्कनशाह अली चिश्ती पीर की दरगाह पर मनाई जाने वाली जश्न-ए-ईद की है। यहां रमजान के पाक महीने में हिंदू लोग नमाज अता करते हैं और धूमधाम से ईद मनाते हैं।
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खास बात तो यह है कि आठ हजार की आबादी वाले इस गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है।

11 साल से रख रहे हैं रोजा

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बाबा मुक्कनशाह की दरगाह सागर जिले के बसाहरी गांव में है। इस दरगाह पर बीते कुछ वर्षो से नमाज एवं ईद मनाने की रस्म होती आ रही है। इस रस्म को मुस्लिम परिवार ही नहीं, बल्कि हिंदू परिवार भी निभाते आ रहे हैं।

गांव के लोगों की मानें तो रमजान और खासकर ईद के मौके पर यहां दरगाह पर चादर चढ़ाई जाती है और सेवइयां बांटी जाती हैं। इस दरगाह के खिदमतगार प्रेमशंकर सोनी हैं।

वह पिछले 11 वर्षो से एक रोजेदार की तरह ही रोजा रखते हैं और नियमित रूप से नमाज अता करते हैं।

गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं

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यह दरगाह 200 वर्ष पुरानी है। पिछले कई वर्षो से बसाहरी गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है, इसके बावजूद दरगाह पर चिराग रखने, अगरबत्ती जलाने और नमाज अता करने का सिलसिला चला आ रहा है।

गांववासी उदय प्रताप बताते हैं कि आठ हजार की आबादी वाले इस गांव में करीब तीन दशक से कोई मुस्लिम परिवार नहीं है, लेकिन दरगाह पर लोग नियमित रूप से सजदा करते हैं।

ईद के मौके पर इस गांव में जलसे का आयोजन किया जाता है।

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धूम से मनाई जाती है ईद

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जलसा से पहले रोजेदार जुलूस की शक्ल में पूरे गांव में घूमने के बाद दरगाह पर पहुंचते हैं और इसके बाद वहां चादर चढ़ाई जाती है।

फिर ईद की बधाई देने का सिलसिला शुरू होता है। दरगाह पर ही सेवइयां बांटी जाती हैं।

बसाहरी गांव की इस दरगाह पर मनाई जाने वाली ईद उन लोगों के लिए एक सबक है, जो धर्म के के आधार पर लोगों को बांटकर अपनी राजनीतिक मंशा साधने में यकीन रखते हैं।

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