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मध्य प्रदेश: सागर यूनिवर्सिटी में कक्षा में नमाज पढ़ने वाली छात्रा ने कहा- गलत नहीं किया, मुझे क्यों डरना चाहिए
Tue, 05 Apr 2022 12:59 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Tue, 05 Apr 2022 12:59 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के सागर यूनिवर्सिटी में कक्षा में नमाज पढ़ने का वीडियो पिछले महीने वायरल हुआ था। नमाज पढ़ने वाली छात्रा का कहना है कि उसने कक्षा में नमाज पढ़कर कुछ गलत नहीं किया। वह किसी से नहीं डरती।
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सागर में केंद्रीय विश्वविद्यालय की कक्षा में छात्रा ने पढ़ी नमाज।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश के सागर में डॉ. हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय के क्लासरूम में छात्रा के नमाज पढ़ते हुए वीडियो वायरल हुआ था। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है। जिस छात्रा ने क्लासरूम में नमाज पढ़ी, उसका कहना है कि उसने कुछ गलत नहीं किया। वह किसी से नहीं डरती। हां, गुपचुप तरीके से उसका वीडियो बनाया गया और प्राइवेसी का उल्लंघन होने से वह नाराज जरूर है।
मामला 25 मार्च का है। दमोह की रहने वाली छात्रा एजुकेशन डिपार्टमेंट से बीएससी बीएड कर रही है। वह फिलहाल अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही है। 25 मार्च को उसने क्लासरूम में नमाज पढ़ी। इसका किसी ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। हिंदू संगठन सक्रिय हुए और विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के छह सदस्यीय कमेटी बनाई। कमेटी के सामने छात्रा ने बयान दिया कि उसे नहीं पता था कि किसी को विभाग की बिल्डिंग में नमाज नहीं पढ़नी चाहिए। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बयान जारी कर कहा था कि मामला खत्म हो गया है। छात्रा ने माफी भी मांग ली है।
छात्रा ने पूछा- मुझे क्यों डरना चाहिए?
छात्रा ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा कि उसे एक दोस्त ने वायरल वीडियो के बारे में बताया था। वीडियो चोरी-छिपे शूट किया गया था। यह प्राइवेसी का हनन है। वह इससे नाराज है, लेकिन डरी नहीं है। उसने पूछा- 'मुझे क्यों डरना चाहिए? मुझे यकीन था कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है।' कमेटी ने भी छात्रा से पूछा था कि क्या वह वीडियो रिकॉर्ड करने वाले के खिलाफ निजता के हनन का केस दर्ज करना चाहेंगी। उसने किसी भी तरह की कार्रवाई से मना कर दिया था। उसके पिता का भी यही कहना है कि मामला खत्म हो गया है। हम इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
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टॉपर है नमाज पढ़ने वाली छात्रा
जो छात्रा जाने-अनजाने इस विवाद के केंद्र में आ गई है, वह हमेशा टॉपर रही है। टीजीटी भर्ती के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में उसने 150 में से 127 अंक हासिल कर कक्षा में टॉप किया था। वह उन छह छात्रों में शामिल हैं, जिन्हें सागर छावनी में सरकारी केंद्रीय विद्यालय में टीचिंग इंटर्नशिप के लिए चुना गया है। कक्षा 10 में उसने 86% और कक्षा 12 में 85% अंक हासिल किए थे। सीएम छात्रवृत्ति योजना के तहत 25 हजार रुपये भी मिले थे।
कैसे बनाया गया नमाज पढ़ने वाला वीडियो
22 वर्षीय छात्रा का कहना है कि उस दिन विभाग छात्र परिषद के लिए कक्षा प्रतिनिधियों का चुनाव कर रहा था। वह भी चुनाव में उतर रहे पांच उम्मीदवारों में से एक थी। 2018 में विश्वविद्यालय में शामिल होने के बाद से वह नियमित रूप से नमाज पढ़ रही है। उसके बैचमेट्स और फेकल्टी को भी इसकी जानकारी है। कभी भी किसी ने आपत्ति नहीं की। जब हमने यहां दाखिला लिया, तो हमें संस्थान को संचालित करने वाले नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। किसी ने हमें नहीं बताया था कि विभाग या विश्वविद्यालय में नमाज अदा करने की अनुमति नहीं है। उस दिन, चुनाव के कारण, सभी बैच के छात्र इधर-उधर चक्कर काट रहे थे।
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मामला 25 मार्च का है। दमोह की रहने वाली छात्रा एजुकेशन डिपार्टमेंट से बीएससी बीएड कर रही है। वह फिलहाल अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रही है। 25 मार्च को उसने क्लासरूम में नमाज पढ़ी। इसका किसी ने वीडियो बनाकर वायरल कर दिया। हिंदू संगठन सक्रिय हुए और विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच के छह सदस्यीय कमेटी बनाई। कमेटी के सामने छात्रा ने बयान दिया कि उसे नहीं पता था कि किसी को विभाग की बिल्डिंग में नमाज नहीं पढ़नी चाहिए। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन ने बयान जारी कर कहा था कि मामला खत्म हो गया है। छात्रा ने माफी भी मांग ली है।
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छात्रा ने पूछा- मुझे क्यों डरना चाहिए?
छात्रा ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा कि उसे एक दोस्त ने वायरल वीडियो के बारे में बताया था। वीडियो चोरी-छिपे शूट किया गया था। यह प्राइवेसी का हनन है। वह इससे नाराज है, लेकिन डरी नहीं है। उसने पूछा- 'मुझे क्यों डरना चाहिए? मुझे यकीन था कि मैंने कुछ गलत नहीं किया है।' कमेटी ने भी छात्रा से पूछा था कि क्या वह वीडियो रिकॉर्ड करने वाले के खिलाफ निजता के हनन का केस दर्ज करना चाहेंगी। उसने किसी भी तरह की कार्रवाई से मना कर दिया था। उसके पिता का भी यही कहना है कि मामला खत्म हो गया है। हम इसे आगे नहीं बढ़ाना चाहते।
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टॉपर है नमाज पढ़ने वाली छात्रा
जो छात्रा जाने-अनजाने इस विवाद के केंद्र में आ गई है, वह हमेशा टॉपर रही है। टीजीटी भर्ती के लिए कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में उसने 150 में से 127 अंक हासिल कर कक्षा में टॉप किया था। वह उन छह छात्रों में शामिल हैं, जिन्हें सागर छावनी में सरकारी केंद्रीय विद्यालय में टीचिंग इंटर्नशिप के लिए चुना गया है। कक्षा 10 में उसने 86% और कक्षा 12 में 85% अंक हासिल किए थे। सीएम छात्रवृत्ति योजना के तहत 25 हजार रुपये भी मिले थे।
कैसे बनाया गया नमाज पढ़ने वाला वीडियो
22 वर्षीय छात्रा का कहना है कि उस दिन विभाग छात्र परिषद के लिए कक्षा प्रतिनिधियों का चुनाव कर रहा था। वह भी चुनाव में उतर रहे पांच उम्मीदवारों में से एक थी। 2018 में विश्वविद्यालय में शामिल होने के बाद से वह नियमित रूप से नमाज पढ़ रही है। उसके बैचमेट्स और फेकल्टी को भी इसकी जानकारी है। कभी भी किसी ने आपत्ति नहीं की। जब हमने यहां दाखिला लिया, तो हमें संस्थान को संचालित करने वाले नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। किसी ने हमें नहीं बताया था कि विभाग या विश्वविद्यालय में नमाज अदा करने की अनुमति नहीं है। उस दिन, चुनाव के कारण, सभी बैच के छात्र इधर-उधर चक्कर काट रहे थे।
