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'दो साल तक हस्तक्षेप नहीं, फोन पर सिर्फ पांच मिनट की बात' सिंधी समाज ने सुझाया शादी न टूटने का रास्ता
Fri, 12 Feb 2021 12:00 PM IST
Tanuja Yadav
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: Tanuja Yadav
Updated Fri, 12 Feb 2021 12:00 PM IST
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सिंधी समाज ने सुझाया शादी ना टूटने की रास्ता
- फोटो : iStock
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मध्यप्रदेश के सिंधी पंचायत में पारिवारिक विवाद के मामले बढ़ने के बाद लड़की के मायके वालों को ससुराल वालों के मामले में कम हस्तक्षेप करने की हिदायत दी है। सिंधी पंचायत की ओर से कहा गया कि लड़की के मायके वाले शादी के कम से कम दो साल तक ससुराल के मामलों में ज्यादा हस्तक्षेप ना करें।
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पंचायत ने कहा कि अगर लड़की से बात भी करना है तो पांच मिनट फोन पर हालचाल पूछकर फोन रख दें और लड़कियों को समझाया गया कि ससुराल की छोटी-मोटी बातें मायके तक ना पहुंचने दें। बता दें कि सिंधी पंचायत की ओर से यह हिदायत इसलिए दी गई क्योंकि सिंधी समाज में हर महीने पति और पत्नी के बीच विवाद के 80 मामले दर्ज किए जा रहे हैं।
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इन मामलों में से कई दंपत्तियों के शादी को दो साल भी नहीं हुए हैं। जब पंचायत की ओर से जांच पड़ताल की गई, तो बात सामने आई कि मायके वालों को दखल इस विवाद की जड़ है। पंचायत ने यह अनूठी पहल लोक स्तर पर गठित 28 सिंधी पंचायत और सेंट्रल सिंधी पंचायत में पहुंचने वाले प्रकरणों की समीक्षा करने के बाद शुरू की।
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नए मेहमान के आने से दूर हुआ विवाद
बैरागढ़ में दो दोस्तों ने आपस में अपने बच्चों की शादी कर दी, लड़की की मां रोज अपनी बेटी की फोन करती थी। लेकिन लड़की की मां का ज्यादा फोन करना पति और सास को पसंद नहीं था। इसके उल्ट बहू को भी ससुर का बार-बार उसके मामले में हस्तक्षेप करना पसंद नहीं था।
इस बात को लेकर दोनों परिवारों के बीच विवाद शुरू हो गया। ये झगड़ा पंचायत कर पहुंचा, दोनों पक्षों को समझाया गया। इसका फायदा यह हुआ कि पहले तलाक की नौबत आ गई थी, लेकिन बाद में नए मेहमान आने के बाद से विवाद थोड़ा कम हो गया।
पंचायत में पांच सदस्यीय समिति गठित हैं
पारिवारिक विवाद समेत दूसरे मामलों के निकारण के लिए सेंट्रल सिंधी पंचायत में पांच सदस्यीय समिति गठित हैं। इसमें वरिष्ठ वकील और मनोवैज्ञानिक काउंसलर प्रकरणों में सुनवाई करती है। ऐसी कोशिश की जाती है मामला का निपटारा समाज के दायरे में रहकर हो जाए।
पांच बार समझाया, बच गया रिश्ता
शादी के दो महीने बाद से पति-पत्नी के बीच झगड़ा शुरू हो गया था। ये मामला कोर्ट में तलाक के लिए चला गया था लेकिन ससुर ने पंचायत में इस मामले को सामने रखा। जांच में पता चला कि लड़की की छोटी बहन ससुराल में अपनी बहन को हावी होने की तरकीब देती रहती थी। जो मां और छोटी बहन बोलती थी, वही लड़की करती थी। इस मामले में पांच बार काउंसलिंग की गई है।
कई बार दहेज मामले में फंसाने की धमकी
सेंट्रल सिंधी पंचायत के अध्यक्ष भगवानदेव इसरानी ने कहा कि आज कल हर समाज में पारिवारिक विवाद के मामले बढ़ रहे हैं। हमारे यहां ऐसे मामलों को निपटाने के लिए 28 पंचायतें काम कर रही हैं। पंचायत में पहुंचे 95 फीसदी मामलों में देखा गया कि मायके के ज्यादा हस्तक्षेप की वजह से ज्यादा मामला बिगड़ा है। आवेदन करने वाले पक्ष की शिकायत थी कि उनकी बहु पूरे समय मायके वालों के साथ फोन पर व्यस्त रहती थी और मना करने पर दहेज प्रताड़ना की धमकी देती थी।
