राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत उज्जैन पहुंचे हैं। शनिवार रात को ट्रेन से वे उज्जैन आए। यहां से इस्कॉन मंदिर पहुंचे। रविवार तड़के उन्होंने महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे और भस्मारती में शामिल हुए। इसके बाद इस्कॉन मंदिर की पूजा व आरती में शामिल हुए। 22 फरवरी तक संघ प्रमुख उज्जैन में रूकेंगे।
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शनिवार रात को उज्जैन के रेलवे स्टेशन पहुंचे थे भागवत
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संघ के महानगर प्रचार प्रमुख धर्मेंद्रसिंह परिहार ने बताया कि संघ प्रमुख इस्कॉन मंदिर परिसर स्थित नवनिर्मित अत्याधुनिक सभा कक्ष में मालवा प्रांत में काम कर रहे कार्यकर्ता तथा सहयोगी संगठन के पदाधिकारियों की बैठक ली। रविवार सुबह यह बैठक शुरू हुई जिसमें मंथन के बाद अगले तीन साल के कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई। समाज परिवर्तन, पर्यावरण, कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता तथा एकात्मता के प्रयासों को लेकर चर्चा की। बैठक में कोरोना काल में बंद हुई शाखाओं पर बात हुई। दरअसल,कुछ शाखाएं लगना बंद हो गई थीं। शाखाओं के फिर से शुरू किए जाने के बाद इन्हें और मजबूत करने पर जोर दिया गया। 1925 में संघ की स्थापना की गई थी। तीन साल बाद संघ अपना 100वां स्थापना दिवस मनाएगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि संघ की शाखाएं और बढ़ाई जाएंगी। सामाजिक समरसता, पर्यावरण सहित कई मुद्दों पर भी मंथन हुआ।
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कार्यक्रम स्थल इस्कॉन मंदिर में की गई है सजावट
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22 फरवरी को संघ प्रमुख चिंतामण गणेश मार्ग स्थित विद्या भारती के नवनिर्मित कार्यालय व प्रशिक्षण भवन विक्रमादित्य का लोकार्पण करेंगे। शनिवार रात को ट्रेन से उज्जैन पहुंचे थे, जिसके बाद इस्कॉन मंदिर पहुंचे। रात को ही भागवत ने मालवा प्रांत के 90 से अधिक स्वयंसेवकों से चर्चा की।
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रविवार सुबह इस्कॉन मंदिर में किया भ्रमण
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रविवार सुबह संघ प्रमुख भागवत ने इस्कॉन मंदिर में भ्रमण किया। कीर्तन में भी शामिल हुए। पूरे परिसर को देखा। बैठक से पहले सुबह संघ प्रमुख भागवत ने भगवान राधा मदनमोहन के दर्शन किए। इस्कान परिवार द्वारा संघ प्रमुख के स्वागत में उनके आवास से मंदिर तक मार्ग में पुष्प बिछाए गए थे। इस्कानवृंद कीर्तन करते हुए उन्हें मंदिर तक लेकर आए, सभा मंडप में भी मृदंग व करतल की मंगल ध्वनि के साथ कीर्तन चल रहा था। इस्कॉन प्रबंधन की ओर से पीआरओ राघव पंडित दास ने उनकी अगवानी की तथा मस्तक पर चंदन लगाया। मंदिर की स्थापना व विराजित मूर्तियों के महत्व के संबंध में जानकारी दी। संघ प्रमुख ने मंदिर में सबसे पहले भगवान नृसिंह के दर्शन किए। इसके बाद निताई गौर प्रभु तथा राधा मदन मोहन की आरती की तथा चरणामृत प्रसाद ग्रहण किया। दर्शन के उपरांत उन्होंने सभामंडप में विराजित इस्कॉन के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद जी की मूर्ति को माला पहनाई। इसके बाद परिसर में ब्रह्मलीन स्वामी भक्तिचारूजी महाराज की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। मंदिर की ओर से .भागवत को केसरिया शाल ओढ़कार बाल भोग महाप्रसादी भेंट की गई।
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समाधि स्थल पहुंचकर अर्पित किए पुष्प
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इस्कॉन मंदिर के भ्रमण के दौरान डॉ. भागवत भक्तिचारू स्वामी के समाधि स्थल पहुंचे। वहां उनका स्मरण कर पुष्प अर्पित किए। इस दौरान मंदिर समिति के सदस्यगण भी मौजूद थे।