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मध्य प्रदेश: सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर कॉरिडोर से नेशनल हाईवे निकाले जाने पर एनएचएआई दो दिन में पेश करे जवाब
Wed, 23 Mar 2022 08:50 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 23 Mar 2022 08:50 PM IST
सार
हाईकोर्ट ने एनएचएआई को निर्देशित किया है कि हाईवे निर्माण के संबंध में एनटीसीए से एप्रूवल लिया है या नहीं, इस संबंध में जबाब पेश करें। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 25 मार्च को निर्धारित की है।
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सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर कॉरिडोर के बीच से बैतूल-औबेदुलागंज नेशनल हाईवे-69 के निर्माण को चुनौती दी गई है।
- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर कॉरिडोर के बीच से बैतूल-औबेदुलागंज नेशनल हाईवे-69 के निर्माण को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि एनटीसीए की बिना अनुमति लिए उक्त नेशनल हाई-वे का निर्माण किया जा रहा है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमथ व जस्टिस पुरुषेन्द्र कौरव की युगलपीठ ने एनएचएआई को निर्देशित किया है कि निर्माण के संबंध में एनटीसीए से एप्रूवल लिया है या नहीं, इस संबंध में जबाब पेश करें। युगलपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई 25 मार्च को निर्धारित की है।
महाराष्ट्र अमरावती निवासी एडविट किओले की तरफ से हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि बैतूल-औबेदुलागंज के बीच नेशनल हाईवे-69 का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य के लिए वन विभाग की अनुमति ली गई है। एनएच के निर्माण में महाराष्ट्र के मेलघाट व मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बीच का हिस्सा भी आता है। एनटीसीए द्वारा देश में घोषित मुख्य 32 टाइगर कॉरिडोर में सतपुड़ा व मेलघाट भी शामिल है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में टाइगर सहित अन्य वनजीव रहते हैं। जो आने-जाने के लिए इस कॉरिडोर का उपयोग करते हैं।
याचिका में कहा गया है कि नियम अनुसार टाइगर कॉरिडोर में निर्माण के लिए नेशनल टाइगर कंजरवेटर अथॉरिटी (एनटीसीए) तथा नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्स लाइफ की अनुमति आवश्यक है। इससे बिना अनुमति लिए एनएचएआई द्वारा सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हो रही है। याचिका में कहा गया था कि वह विकास कार्य के खिलाफ नहीं है, परंतु वन तथा वन प्राणियों का संरक्षण आवश्यक है। एनटीसीए ने भी वन प्राणियों के संरक्षण के लिए हाईवे के निर्माण के दौरान वन प्राणियों के आवागमन के लिए अंडर तथा ओवर मार्ग बनाने तथा पुलिया सहित अन्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिससे वन प्राणियों के जन-जीवन पर अधिक असर नहीं पड़े। याचिका में केन्द्र सरकार के एनवायरमेंट एवं फॉरेस्ट्स क्लाइमेट चेंज डिपार्टमेंट के सचिव, नेशनल टाइगर कंजरवेटर अथॉरिटी, नेशनल बोर्ड आफ वाईल्ड लाइफ के चेयरमैन, एनएचएआईए मप्र शासन के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी फॉरेस्ट व पीसीसीएफ को पक्षकार बनाया गया है। याचिका की सुनवाई के पश्चात युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह व तान्या तिवारी ने पक्ष रखा।
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महाराष्ट्र अमरावती निवासी एडविट किओले की तरफ से हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि बैतूल-औबेदुलागंज के बीच नेशनल हाईवे-69 का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य के लिए वन विभाग की अनुमति ली गई है। एनएच के निर्माण में महाराष्ट्र के मेलघाट व मध्य प्रदेश के सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बीच का हिस्सा भी आता है। एनटीसीए द्वारा देश में घोषित मुख्य 32 टाइगर कॉरिडोर में सतपुड़ा व मेलघाट भी शामिल है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में टाइगर सहित अन्य वनजीव रहते हैं। जो आने-जाने के लिए इस कॉरिडोर का उपयोग करते हैं।
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याचिका में कहा गया है कि नियम अनुसार टाइगर कॉरिडोर में निर्माण के लिए नेशनल टाइगर कंजरवेटर अथॉरिटी (एनटीसीए) तथा नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्स लाइफ की अनुमति आवश्यक है। इससे बिना अनुमति लिए एनएचएआई द्वारा सड़क निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। इसके लिए बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई हो रही है। याचिका में कहा गया था कि वह विकास कार्य के खिलाफ नहीं है, परंतु वन तथा वन प्राणियों का संरक्षण आवश्यक है। एनटीसीए ने भी वन प्राणियों के संरक्षण के लिए हाईवे के निर्माण के दौरान वन प्राणियों के आवागमन के लिए अंडर तथा ओवर मार्ग बनाने तथा पुलिया सहित अन्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं। जिससे वन प्राणियों के जन-जीवन पर अधिक असर नहीं पड़े। याचिका में केन्द्र सरकार के एनवायरमेंट एवं फॉरेस्ट्स क्लाइमेट चेंज डिपार्टमेंट के सचिव, नेशनल टाइगर कंजरवेटर अथॉरिटी, नेशनल बोर्ड आफ वाईल्ड लाइफ के चेयरमैन, एनएचएआईए मप्र शासन के एडीशनल चीफ सेक्रेटरी फॉरेस्ट व पीसीसीएफ को पक्षकार बनाया गया है। याचिका की सुनवाई के पश्चात युगलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह व तान्या तिवारी ने पक्ष रखा।
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