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MP News: दुष्कर्म के आरोपी टीआई संदीप को मिली जमानत, जांच में झूठा निकला महिला कांस्टेबल का आरोप, जानें मामला
Tue, 24 Jan 2023 09:55 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: हिमांशु प्रियदर्शी
Updated Tue, 24 Jan 2023 09:55 PM IST
सार
कटनी में पदस्थ टीआई संदीप अयाची के खिलाफ महिला कांस्टेबल ने महिला थाने जबलपुर में शादी का प्रलोभन देकर दुष्कर्म करने की शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला कांस्टेबल का आरोप था कि साल 2018 में गोरखपुर थाने में पदस्थापना के दौरान वह थाना प्रभारी के करीब आई थी। उसके बाद वह शादी का प्रलोभन देकर उसके साथ दुराचार करते रहे।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : Social Media
विस्तार
दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार टीआई संदीप अयाची को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने राहत दे दी है। हाईकोर्ट के जज डीके पालीवाल ने पाया कि आरोपी टीआई को जमानत का लाभ प्रदान किया गया है।
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शादी का प्रलोभन देकर दुष्कर्म करने की दर्ज करवाई गई थी शिकायत
गौरतलब है कि कटनी में पदस्थ टीआई संदीप अयाची के खिलाफ महिला कांस्टेबल ने महिला थाने जबलपुर में शादी का प्रलोभन देकर दुष्कर्म करने की शिकायत दर्ज करवाई थी। महिला कांस्टेबल का आरोप था कि साल 2018 में गोरखपुर थाने में पदस्थापना के दौरान वह थाना प्रभारी के करीब आई थी। उसके बाद वह शादी का प्रलोभन देकर उसके साथ दुराचार करते रहे। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर टीआई के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था।
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अग्रिम जमानत आवेदन खारिज होने के बाद आरोपी टीआई ने सरेंडर कर दिया था। आरोपी टीआई सितंबर महीने से न्यायिक हिरासत में है। पहले हुई सुनवाई के दौरान पीड़िता द्वारा न्यायालय को अशोभनीय भाषा में पत्र लिखने का मामला सामने आया था। एकलपीठ के समक्ष उपस्थित होकर पीड़ता ने किसी प्रकार का पत्र लिखने से इनकार कर दिया था। एकलपीठ ने न्यायालय को प्राप्त हुए दो पत्रों की जांच के निर्देश दिए थे। जांच में पत्र फर्जी पाए गए और पुलिस ने उक्त मामले में मामला दर्ज किया था।
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बयान दर्ज करवाने के लिए ट्रायल कोर्ट में उपस्थित नहीं हुई शिकायतकर्ता
जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष दत्त ने एकलपीठ को बताया कि आरोपी बीते चार महीने से न्यायिक हिरासत में है। पुलिस ने उसके खिलाफ चालान पेश कर दिया था। शिकायतकर्ता महिला बालिग और पुलिस कांस्टेबल है। दोनों के बीच आपसी सहमति से संबंध स्थापित हुए थे और उसके द्वारा झूठी रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है।
हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता को ट्रायल कोर्ट के समक्ष उपस्थित होकर बयान दर्ज करवाने का आदेश दिया था। आदेश के बावजूद भी शिकायतकर्ता बयान दर्ज करवाने के लिए ट्रायल कोर्ट में उपस्थित नहीं हुई। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को जमानत का लाभ प्रदान किया है।
