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मध्य प्रदेश: हमीदिया हॉस्पिटल हादसे के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग, हाईकोर्ट ने भेजे नोटिस
Wed, 15 Dec 2021 02:25 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Wed, 15 Dec 2021 02:25 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के भोपाल में स्थित हमीदिया हॉस्पिटल में लगी आग को लेकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करने वाली याचिका दाखिल हुई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस विषय में सरकार को नोटिस जारी किया है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हमीदिया हॉस्पिटल में आगजनी में बच्चों की मौत के मामले में सख्ती दिखाई है। हादसे के लिए दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है।
चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस विजय शुक्ला की बेंच इस याचिका की सुनवाई कर रही है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉक्टर पीजी नाजपांडे की याचिका में कहा गया है कि 24 जून 2014 को सतना के सरकारी अस्पताल में आग लगने से एक बच्चे की मौत हुई थी, जबकि दस घायल हुए थे। इसके बाद 23 अगस्त 2016 को जबलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आग से 7 बच्चे जख्मी हुए थे और एक की मौत हुई थी। भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल में 8 नवंबर 2021 को हादसे में 7 बच्चे जख्मी हुए थे और 10 की मौत हुई थी। हमीदिया अस्पताल के पास 20 साल से फायर सेफ्टी का सर्टिफिकेट तक नहीं था। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रभात यादव ने बेंच से कहा कि कल्याणकारी राज्य होने के कारण राज्य सरकार का दायित्व है कि वह दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाए।
क्या है मामला
नाजपांडे की याचिका सतना हादसे के बाद दाखिल हुई थी। इसमें सरकार ने रिपोर्ट पेश कर कहा था कि आग रोकने की व्यवस्था अस्पताल में नहीं थी। सरकार ने आश्वासन दिया था कि इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। सात साल बाद भी अस्पतालों में अग्निकांड रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इसी आधार पर याचिका में कहा गया है कि हमीदिया हादसे में बरती गई लापरवाही को लेकर उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। दोषी अफसरों, कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद बेंच ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव और संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ और जस्टिस विजय शुक्ला की बेंच इस याचिका की सुनवाई कर रही है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉक्टर पीजी नाजपांडे की याचिका में कहा गया है कि 24 जून 2014 को सतना के सरकारी अस्पताल में आग लगने से एक बच्चे की मौत हुई थी, जबकि दस घायल हुए थे। इसके बाद 23 अगस्त 2016 को जबलपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आग से 7 बच्चे जख्मी हुए थे और एक की मौत हुई थी। भोपाल के हमीदिया हॉस्पिटल में 8 नवंबर 2021 को हादसे में 7 बच्चे जख्मी हुए थे और 10 की मौत हुई थी। हमीदिया अस्पताल के पास 20 साल से फायर सेफ्टी का सर्टिफिकेट तक नहीं था। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रभात यादव ने बेंच से कहा कि कल्याणकारी राज्य होने के कारण राज्य सरकार का दायित्व है कि वह दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाए।
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क्या है मामला
नाजपांडे की याचिका सतना हादसे के बाद दाखिल हुई थी। इसमें सरकार ने रिपोर्ट पेश कर कहा था कि आग रोकने की व्यवस्था अस्पताल में नहीं थी। सरकार ने आश्वासन दिया था कि इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। सात साल बाद भी अस्पतालों में अग्निकांड रोकने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। इसी आधार पर याचिका में कहा गया है कि हमीदिया हादसे में बरती गई लापरवाही को लेकर उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। दोषी अफसरों, कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद बेंच ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव और संचालक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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