{"_id":"61fcbe18fa05a77bd97f178f","slug":"madhya-pradesh-cm-shivraj-singh-chouhan-will-honor-padma-shri-recipients-today","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"मध्य प्रदेश: सीएम शिवराज सिंह चौहान पद्मश्री पाने वाली हस्तियों को आज करेंगे सम्मानित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मध्य प्रदेश: सीएम शिवराज सिंह चौहान पद्मश्री पाने वाली हस्तियों को आज करेंगे सम्मानित
Fri, 04 Feb 2022 11:18 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Fri, 04 Feb 2022 11:18 AM IST
सार
मुख्यमंत्री चौहान आज शाम निज निवास पर पद्मश्री से सम्मानित होने वाली प्रदेश की 5 विभूतियों का सम्मान करेंगे।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विज्ञापन
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज को पद्मश्री से सम्मानित होने वाली प्रदेश की हस्तियों को सम्मानित करेंगे। सम्मान समारोह का आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर आज शाम को आयोजित किया जाएगा।
इस साल प्रदेश की 5 विभूतियों को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। चिकित्सा के क्षेत्र में स्व. डॉ. एन.पी. मिश्रा, कला के क्षेत्र में दुर्गाबाई व्याम, अर्जुन सिंह धुर्वे और रामसहाय पाण्डेय, शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में अवध किशोर जड़िया को भारत सरकार पद्मश्री सम्मान से सम्मानित करेगी। प्रदेश की इन पांचों हस्तियों को मुख्यमंत्री चौहान आज शाम सम्मानित करेंगे। स्व. डॉ. एन.पी. मिश्रा की ओर से सम्मान उनके पुत्र सुनील मिश्रा प्राप्त करेंगे।
इस साल प्रदेश की 5 विभूतियों को पद्मश्री सम्मान से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। चिकित्सा के क्षेत्र में स्व. डॉ. एन.पी. मिश्रा, कला के क्षेत्र में दुर्गाबाई व्याम, अर्जुन सिंह धुर्वे और रामसहाय पाण्डेय, शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में अवध किशोर जड़िया को भारत सरकार पद्मश्री सम्मान से सम्मानित करेगी। प्रदेश की इन पांचों हस्तियों को मुख्यमंत्री चौहान आज शाम सम्मानित करेंगे। स्व. डॉ. एन.पी. मिश्रा की ओर से सम्मान उनके पुत्र सुनील मिश्रा प्राप्त करेंगे।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पद्मश्री पाने वाली विभूतियों का करेंगे सम्मान
- फोटो : सोशल मीडिया
इन हस्तियों को सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री
स्व. डॉ. एन.पी. मिश्रा
चिकित्सा शास्त्र के ज्ञानकोष कहे जाने वाले विश्वविख्यात चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. नरेन्द्र प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश के गौरव थे। उन्होंने लेक्चरर, रीडर, डीन तथा हैड ऑफ द डिपार्टमेंट जैसे पदों पर रहकर हजारों छात्र-छात्राओं को चिकित्सा शास्त्र का गहन ज्ञान एवं प्रशिक्षण प्रदान किया। भोपाल गैस त्रासदी के उपरांत उन्होंने हजारों पीड़ितों के लिये असाधारण चिकित्सा व्यवस्था की। उन्होंने अत्यंत अल्प समय में मात्र 800 शायिकाओं वाले हमीदिया अस्पताल में 10 हजार 700 रोगियों को भर्ती कर समुचित उपचार व्यवस्था की तथा एक लाख 73 हजार बाह्य रोगियों की चिकित्सा की थी।
दुर्गाबाई व्याम
डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखण्ड के पाटनगढ़ की रहने वाली दुर्गाबाई व्याम ने गोंडी पेंटिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है। वर्तमान में दुर्गाबाई भोपाल में जनजातीय कला की गोंड शैली में कार्य करती हैं। उनकी चित्रकला के विषय आदिवासी लोक-कथाओं और पौराणिक कथाओं में निहित हैं। दुर्गाबाई ने भारत एवं विदेशों में गोंडी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने गोंड शैली में हवाई जहाज के चित्रों की श्रृंखला बनाई है।
अर्जुन सिंह धुर्वे
अर्जुन सिंह धुर्वे ने मध्य प्रदेश जनजातीय संस्कृति को विशेष पहचान दिलाने में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने बैगा नृत्य एवं संस्कृति को प्रवाहमान रखते हुए लोक कला को शिखर पर पहुंचाया है। डिंडौरी जिले के बैगाचक क्षेत्र धुरकुटा के रहने वाले अर्जुन सिंह धुर्वे बैगा जनजाति के प्रथम पोस्टग्रेजुएट शिक्षक बने। 1993-94 में उन्हें जनजातीय सम्पदा के कलात्मक संवर्धन विकास के लिए राज्य सरकार ने तुलसी सम्मान से विभूषित किया था। बैगा प्रधानी नृत्य, जो बैगा जनजाति का मुख्य नृत्य है, की उन्होंने राज्य एवं राज्य के बाहर प्रस्तुतियां देकर स्वयं की और प्रदेश की जनजातीय कला-संस्कृति की पहचान बनाई है।
पं. रामसहाय पाण्डेय
पं. रामसहाय पाण्डे ने बुंदेलखण्ड के गीत, संगीत एवं संस्कृति की पहचान राई नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलवाई। उन्होंने बेड़िया समाज के लोगों को समाज की मुख्य-धारा से जोड़ने के लिये राई नृत्य के माध्यम से उल्लेखनीय कार्य किया है। कनेरादेव, सागर के रामसहाय पाण्डेय 12 साल की उम्र से राई नृत्य कर रहे हैं। उन्होंने जापान, हंगरी, फ्रांस, मॉरीशस, दुबई, जर्मनी सहित अनेक देशों में राई नृत्य का प्रदर्शन किया है। उन्हें शिखर सम्मान, राष्ट्रीय टैगोर सम्मान, राष्ट्रीय तुलसी सम्मान मिल चुके हैं।
डॉ. अवध किशोर जड़िया
छतरपुर जिले के हरपालपुर के अवध किशोर जड़िया बुंदेली के ख्याति-प्राप्त कवि हैं। उन्होंने बुंदेली भाषा के साथ ब्रज एवं हिन्दी भाषा में भी कई काव्य रचनाएं लिखी हैं। श्री जड़िया को साहित्य के क्षेत्र में कई पुरस्कार एवं सम्मान मिले हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया उनकी कविताओं के प्रशंसक थे। उनकी कुछ कविताएं मध्यप्रदेश के शिक्षा पाठ्यक्रम में भी शामिल हैं।
स्व. डॉ. एन.पी. मिश्रा
चिकित्सा शास्त्र के ज्ञानकोष कहे जाने वाले विश्वविख्यात चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. नरेन्द्र प्रसाद मिश्रा मध्य प्रदेश के गौरव थे। उन्होंने लेक्चरर, रीडर, डीन तथा हैड ऑफ द डिपार्टमेंट जैसे पदों पर रहकर हजारों छात्र-छात्राओं को चिकित्सा शास्त्र का गहन ज्ञान एवं प्रशिक्षण प्रदान किया। भोपाल गैस त्रासदी के उपरांत उन्होंने हजारों पीड़ितों के लिये असाधारण चिकित्सा व्यवस्था की। उन्होंने अत्यंत अल्प समय में मात्र 800 शायिकाओं वाले हमीदिया अस्पताल में 10 हजार 700 रोगियों को भर्ती कर समुचित उपचार व्यवस्था की तथा एक लाख 73 हजार बाह्य रोगियों की चिकित्सा की थी।
दुर्गाबाई व्याम
डिंडौरी जिले के करंजिया विकासखण्ड के पाटनगढ़ की रहने वाली दुर्गाबाई व्याम ने गोंडी पेंटिंग के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है। वर्तमान में दुर्गाबाई भोपाल में जनजातीय कला की गोंड शैली में कार्य करती हैं। उनकी चित्रकला के विषय आदिवासी लोक-कथाओं और पौराणिक कथाओं में निहित हैं। दुर्गाबाई ने भारत एवं विदेशों में गोंडी कला का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने गोंड शैली में हवाई जहाज के चित्रों की श्रृंखला बनाई है।
अर्जुन सिंह धुर्वे
अर्जुन सिंह धुर्वे ने मध्य प्रदेश जनजातीय संस्कृति को विशेष पहचान दिलाने में अमूल्य योगदान दिया है। उन्होंने बैगा नृत्य एवं संस्कृति को प्रवाहमान रखते हुए लोक कला को शिखर पर पहुंचाया है। डिंडौरी जिले के बैगाचक क्षेत्र धुरकुटा के रहने वाले अर्जुन सिंह धुर्वे बैगा जनजाति के प्रथम पोस्टग्रेजुएट शिक्षक बने। 1993-94 में उन्हें जनजातीय सम्पदा के कलात्मक संवर्धन विकास के लिए राज्य सरकार ने तुलसी सम्मान से विभूषित किया था। बैगा प्रधानी नृत्य, जो बैगा जनजाति का मुख्य नृत्य है, की उन्होंने राज्य एवं राज्य के बाहर प्रस्तुतियां देकर स्वयं की और प्रदेश की जनजातीय कला-संस्कृति की पहचान बनाई है।
पं. रामसहाय पाण्डेय
पं. रामसहाय पाण्डे ने बुंदेलखण्ड के गीत, संगीत एवं संस्कृति की पहचान राई नृत्य को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा दिलवाई। उन्होंने बेड़िया समाज के लोगों को समाज की मुख्य-धारा से जोड़ने के लिये राई नृत्य के माध्यम से उल्लेखनीय कार्य किया है। कनेरादेव, सागर के रामसहाय पाण्डेय 12 साल की उम्र से राई नृत्य कर रहे हैं। उन्होंने जापान, हंगरी, फ्रांस, मॉरीशस, दुबई, जर्मनी सहित अनेक देशों में राई नृत्य का प्रदर्शन किया है। उन्हें शिखर सम्मान, राष्ट्रीय टैगोर सम्मान, राष्ट्रीय तुलसी सम्मान मिल चुके हैं।
डॉ. अवध किशोर जड़िया
छतरपुर जिले के हरपालपुर के अवध किशोर जड़िया बुंदेली के ख्याति-प्राप्त कवि हैं। उन्होंने बुंदेली भाषा के साथ ब्रज एवं हिन्दी भाषा में भी कई काव्य रचनाएं लिखी हैं। श्री जड़िया को साहित्य के क्षेत्र में कई पुरस्कार एवं सम्मान मिले हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं राजमाता विजयाराजे सिंधिया उनकी कविताओं के प्रशंसक थे। उनकी कुछ कविताएं मध्यप्रदेश के शिक्षा पाठ्यक्रम में भी शामिल हैं।
