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सियासत: भाजपा के नए प्रयोग से कांग्रेस चित, मध्यप्रदेश में आखिर क्यों नहीं मिला सत्ता विरोधी लहर का फायदा?
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कमलनाथ-शिवराज सिंह चौहान (फाइल फोटो)
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विस्तार
मध्यप्रदेश भाजपा के लिए दीपावली का त्योहार उपचुनाव की जीत की खुशियां लेकर आया है। एक तरफ भाजपा ने अपनी परंपरागत खंडवा लोकसभा सीट पर कब्जा बरकरार रखा। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस के कब्जे वाली जोबट और पृथ्वीपुर सीट छीनकर प्रदेश में अपनी ताकत का एहसास कराया। इन चुनावों में भाजपा को सबसे बड़ा फायदा आदिवासी वोट बैंक के रूप में मिला। वहीं, चुनावों में हार का मुंह देखने वाली कांग्रेस पार्टी ने रैगांव सीट जीतकर एक रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज कर लिया।
खंडवा सीट पर टिकी थीं निगाहें
मध्यप्रदेश के इस उपचुनावों में सभी की निगाहें खंडवा लोकसभा सीट पर टिक हुई थीं। यह सीट भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा का विषय थी। इस सीट से कांग्रेस उम्मीदवार राजनारायण सिंह 22 साल बाद सक्रिय राजनीति में अपनी किस्मत आजमा रहे थे, लेकिन उन्हें भाजपा के ज्ञानेश्वर पाटिल से शिकस्त मिली। इस सीट पर भाजपा दिवगंत सांसद नंदकुमार सिंह चौहान यानी नंदू भैया चौहान के निधन के बाद सहानुभूति लहर पर सवार नहीं हुई। महंगाई, बढ़ते पेट्रोल डीजल के दाम जैसे मुद्दे के बावजूद जोखिम लेते हुए पार्टी ने नया उम्मीदवार मैदान में उतारा। वहीं, बूथ मैनेजमेंट और धमाकेदार प्रचार अभियान के दम पर जीत भी हासिल की।
भाजपा-कांग्रेस के बीच था सीधा मुकाबला
अमर उजाला से चर्चा करते हुए मध्यप्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार आनंद पांडेय कहते है कि प्रदेश के इन उपचुनावों में सीधा मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही था, लेकिन कांग्रेस पार्टी इन चुनावों में महंगाई और बेरोजगारी को भी मुद्दा नहीं बना सकी। जमीनी स्तर पर भाजपा कार्यकर्ताओं की नाराजगी को भुना नहीं पाई। प्रदेश की कई सीटों पर भाजपा के प्रति नाराजगी है, लेकिन कांग्रेस इसे वोट में बदलने में हमेशा चूक जाती है।
पूरी ताकत से उतरी थी भाजपा
उन्होंने आगे कहा कि इन उपचुनावों में भाजपा की तरफ से सीएम शिवराज सिंह चौहान समेत पूरी सरकार और संगठन पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरे थे। बीजेपी ने उम्मीदवारों की घोषणा से पहले ही जोबट में सुलोचना रावत को लाकर कांग्रेस को बढ़ा झटका दिया, लेकिन कांग्रेस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। चुनाव के दौरान कांग्रेस विधायक सचिन बिरला का भाजपा में जाना कांग्रेस के लिए नुकसानदेह साबित हुआ। आने वाले विधानसभा चुनावों को देखते हुए अब कांग्रेस पार्टी को मंथन करना चाहिए कि सत्ता विरोधी लहर होने के बाद भी कांग्रेस को प्रदेश में फायदा क्यों नहीं मिल पा रहा है।
कांग्रेस के गढ़ जोबट में खिला कमल
कांग्रेस का गढ़ रही आदिवासी सीट जोबट पर भाजपा ने कब्जा जमा लिया है। इस सीट पर सीएम शिवराज सिंह चौहान का जादू देखने को मिला, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का क्राइसिस मैनेजमेंट फेल हो गया। चुनाव से पूर्व ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामने वाली सुलोचना रावत ने इन चुनावों में जीत हासिल की। कांग्रेस से इस सीट को छीनने के लिए भाजपा संगठन को अपना पूरा जोर लगाना पड़ा। सीएम शिवराज ने जहां एक के बाद एक पांच सभाएं की थीं। इसके अलावा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी इन चुनावों में सक्रिय भूमिका में रहे थे। कांग्रेस की तरफ से केवल प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने दो सभा, पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने दो और जीतू पटवारी ने केवल एक सभा की थी। जोबट उपचुनावों में भाजपा प्रत्याशी सुलोचना रावत ने कांग्रेस प्रत्याशी महेश पटेल को 6 हजार 80 वोटों से हराया है। सुलोचना को 68 हजार 752 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के महेश शर्मा को 62 हजार 672 वोट मिले। विधानसभा उपचुनाव के ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर आई सुलोचना चौथी बार विधायक बनी हैं। वह अब तक पांच बार विधानसभा चुनाव लड़ चुकी हैं।
पृथ्वीपुर में कांग्रेस के नहीं काम आई सहानुभूति लहर
इन उपचुनावों में कांग्रेस को पृथ्वीपुर विधानसभा सीट पर भी करारी हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस के कद्दावर नेता बृजेंद्र सिंह राठौर के कब्जे वाली पृथ्वीपुर सीट पर उनके बेटे नितिन सिंह राठौड़ को हार का मुंह देखना पड़ा। बीजेपी के शिशुपाल यादव ने नितिन सिंह को 15886 मतों से हरा दिया। प्रदेश कांग्रेस को उम्मीद सर्वे के मुताबिक थी कि बृजेंद्र सिंह राठौर के निधन के बाद सिंपैथी वोट उनके बेटे नितेंद्र सिंह राठौर के खाते में जाएंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। पार्टी के कई बड़े नेताओं ने भी पृथ्वीपुर से दूरी बनाकर रखी। दिग्विजय सिंह सिर्फ एक बार पृथ्वीपुर सीट पर प्रचार में पहुंचे। कांग्रेस के मुकाबले भाजपा ने शुरू से प्रचार पर काफी ध्यान दिया। सीएम चौहान ने अपने उम्मीदवार शिशुपाल के पक्ष में आठ सभाएं कीं। पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती समेत यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी एक सभा कर भाजपा के लिए जीत का मैदान तैयार किया।
रैगांव में कांग्रेस ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड
भाजपा के गढ़ सतना जिले की रैगांव विधानसभा सीट पर 31 साल बाद कांग्रेस की कल्पना वर्मा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस उम्मीदवार ने 12 हजार 545 वोटों से भाजपा की प्रतिमा बागरी को हराया। चुनावों में क्षेत्र का विकास न होना, जुगल किशोर बागरी के बेटे स्वराज बागरी को टिकट न देना और परिवार की अनदेखी करना भाजपा को भारी पड़ गया। भाजपा उम्मीदवार को जिताने के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान एक दर्जन से ज्यादा सभाएं कीं, जबकि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह और नरोत्तम मिश्रा के अलावा यूपी के सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी बागरी को जिताने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी थी। इस सीट में भाजपा को बहुजन समाज पार्टी ने भी नुकसान पहुंचाया। बसपा की तरफ से कोई उम्मीदवार नहीं उतारा गया था, जिसके चलते बहुजन वोट बैंक कांग्रेस की ओर शिफ्ट हो गया और कांग्रेस का पलड़ा भारी हो गया। इस सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार को जिताने के लिए पूर्व सीएम कमलनाथ ने दो दौरे किए। कांग्रेस की तरफ से मुख्य मोर्चा अजय सिंह राहुल भैया संभाले हुए थे, जबकि भाजपा की तरफ से सांसद गणेश सिंह मैदान में डटे हुए थे। यहां दोनों बड़े नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई थी, जिसमें अजय सिंह को जीत मिली।
