फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Madhya Pradesh by-election: Kamal Nath and Scindia are at a disadvantage, BJP will benefit

मध्यप्रदेश उपचुनावः नफा-नुकसान कमलनाथ और सिंधिया का है, भाजपा तो फायदे में रहेगी

Thu, 22 Oct 2020 06:48 PM IST
Harendra Chaudhary शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 22 Oct 2020 06:48 PM IST
सार

  • जीते तो कमलनाथ बनेंगे मुख्यमंत्री, कायम होगा दबदबा
  • हारे तो सिमट जाएंगे महाराज सिंधिया, बना रहेगा शिवराज का दबदबा
  • भाजपा को विश्वास, बची रहेगी शिवराज सिंह की सरकार

विज्ञापन
Madhya Pradesh by-election: Kamal Nath and Scindia are at a disadvantage, BJP will benefit
Shivraj KamalNath and Jyotiraditya - फोटो : PTI (फाइल फोटो)

विस्तार

मध्यप्रदेश विधानसभा उपचुनाव बड़े रोचक दौर में पहुंच गया है। भाजपा के नेता पूर्व मुख्यमंत्री इमरती देवी के प्रकरण से बाहर नहीं निकलने देना चाहते, वहीं कमलनाथ ने भाजपा और कांग्रेस के पूर्व नेता तथा भाजपा के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। दरअसल, विधानसभा चुनाव में भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का सब कुछ दांव पर लगा है, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का मध्यप्रदेश में राजनीतिक भविष्य दांव पर लगा है। जिन 28 सीटों पर उप चुनाव हो रहा है, उनमें से 27 पर कांग्रेस के विधायक विजयी हुए थे। इसलिए ज्योतिरादित्य और कमलनाथ के बाद कांग्रेस में भी बैचेनी है।

विज्ञापन

फायदे में हैं दिग्विजय सिंह, शिवराज और  भाजपा

उपचुनाव में केवल एक सीट पर भाजपा विधायक मनोहर ऊंटवाल के निधन के कारण उपचुनाव हो रहा है। वरिष्ठ पत्रकार राकेश पाठक का मानना है कि एक सीट भाजपा हार भी जाए तो क्या फर्क पड़ता है। लेकिन यदि 28 सीट में 10 सीट भी भाजपा जीत जाती है, तो उसकी सरकार सत्ता में बनी रहेगी। अनिल जैन भी मध्यप्रदेश की राजनीति पर गहरी पकड़ रखते हैं। सुरेन्द्र सिंह भी मध्यप्रदेश उपचुनाव को लेकर राज्य में लगातार क्षेत्र में बने हुए हैं। सुरेन्द्र सिंह और अनिल जैन दोनों का मानना है कि उपचुनाव के बाद भी भाजपा को कोई नुकसान नहीं होगा। 28 में से भाजपा के 14-16 सीट जीतने के आसार हैं। हां, ग्वालियर चंबल संभाग में उसे झटका लग सकता है। यहां कुल 16 सीटों पर उपचुनाव हो रहा है।  इससे दो बात साफ है। पहली तो यह 10 सीटें जीत लेने में सफल रहने पर भाजपा की सरकार बननी तय है। इस स्थिति में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी कुर्सी पर बने रहेंगे। इतना ही नहीं शिवराज को अपने मंत्रिमंडल में खाली हुई जगह को नए नेताओं से भरने का अवसर मिलेगा। ऐसा हुआ तो यह कमलनाथ के लिए दूसरा झटका होगा। वहीं, पर्दे के पीछे से सक्रिय कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह को भी परोक्ष रूप से राजनीतिक फायदा होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

दांव पर हैं केवल सिंधिया और कमलनाथ

राजनीति के पंडितों का मानना है कि दांव पर केवल कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं। उपचुनाव में भाजपा की तरफ से ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस से आए सभी प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। ग्वालियर के महाराज खुद कहते हैं कि यह उपचुनाव उनका (महाराज) का है। वह अपने कार्यकर्ताओं को भी यही संदेश दे रहे हैं। इतना ही नहीं इस उपचुनाव में डाबरा की जनसभा में ज्योतिरादित्य सिंधिया के मंच से दिखाई दिए आक्रोश ने भी इसी का संकेत दिया है। समझा जा रहा है कि चुनाव का नतीजा अनुकूल न होने पर जहां ज्योतिरादित्य समर्थक नेता किसी सदन के सदस्य नहीं रह पाएंगे, वहीं इसका असर भाजपा में सिंधिया की भावी राजनीति, उनके दबदबे पर भी पड़ेगा।

इसके सामानांतर कांग्रेस पार्टी ने भी न केवल चुनाव प्रचार का डिजाइन, बल्कि उम्मीदवार भी कमलनाथ की पसंद के ही उतारे हैं। उपचुनाव में कमलनाथ को पार्टी ने पूरी छूट दी है। इसलिए उपचुनाव का नतीजा अनुकूल न आने पर मध्यप्रदेश की राजनीति में कमलनाथ का पैर जमने में आगे दिक्कतें आ सकती हैं। कांग्रेस आईटी सेल के प्रमुख सूत्र का कहना है कि दांव पर कांग्रेस के ही नेता हैं। बस अंतर इतना है कि एक पूर्व हैं और अब भाजपाई बन चुके हैं और एक वर्तमान हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed