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सबसे बड़ा सवाल: मध्यप्रदेश में करिश्माई शिवराज के बाद अब कौन?

Thu, 13 Dec 2018 05:45 PM IST
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 13 Dec 2018 05:45 PM IST
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Madhya pradesh assembly election results 2018: Who after Shivraj singh?
shivraj shingh - फोटो : PTI
मध्यप्रदेश में 15 साल के बाद भाजपा सरकार की विदाई हो गई। शिवराज सिंह चौहान ने अपने दम पर कांग्रेस को जबरदस्त टक्कर दी लेकिन बहुमत से 7 सीट दूर रह गए। पिछले 15 सालों में बने एंटी इंकम्बैंसी के माहौल के बावजूद शिवराज भाजपा को करीब करीब सत्ता में ले ही आए थे पर किस्मत कांग्रेस के साथ थी। अब सबसे बड़ा सवाल है कि सत्ता छिन जाने के बाद प्रदेश की राजनीति में अब उनका क्या भविष्य है और भाजपा की लड़ाई को यहां कौन आगे बढ़ाएगा। 
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2005 से शुरू हुआ था सफर

59 साल के शिवराज का मध्यप्रदेश के सीएम का सफर दिलचस्प और नेतृत्व करिश्माई रहा है। 2005 में शिवराज को राज्यपाल बलराम जाखड़ ने सीएम पद की शपथ दिलाई थी। उस दौर में भाजपा में सीएम पद को लेकर चले लंबे ड्रामेबाजी के बाद शिवराज को कमान सौंपी गई थी। बाबूलाल गौर की जगह उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई और वह इस पर खरे उतरे। उन्होंने भाजपा को 2008 और 2013 में सत्ता दिलाई।   
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मध्यप्रदेश में यूं विदाई शिवराज के लिए बड़ा झटका रही। उनके बयान बताते हैं कि वह वापसी को लेकर किस कदर आश्वस्त थे। मतगणना से पहले उन्हें सभी एग्जिट पोल को खारिज करते हुए कहा था कि सबसे बड़ा सर्वेयर मैं हूं। लेकिन इस बार उनके आकलन में चूक हुई और वल्लभ भवन से विदाई 
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लेनी पड़ी। 

शिवराज के बाद कौन?

शिवराज की हार के बाद अब सवाल उठने लगे हैं कि प्रदेश में शिवराज की विरासत को कौन आगे बढ़ाएगा। यहां भाजपा में शिवराज के अलावा कोई दूसरा चेहरा नहीं दिखता। सभी उम्रदराज हो चुके हैं। खुद शिवराज 59 साल के हो चुके हैं और पांच साल बाद 64 साल के हो जाएंगे। पार्टी में कई लोगों का मानना है कि प्रदेश में भाजपा के पास दूसरी पंक्ति के नेता नहीं हैं। उमा भारती, सुमित्रा महाजन  जैसे बड़े नाम भी केंद्र की राजनीति में जा चुके हैं और उम्रदराज भी हैं। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर को छोड़ दें तो कोई दूसरा जनाधार वाला नेता नजर नहीं आता। 


भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती युवा नेताओं की नई पौध सामने लाने की है। अगले पांच साल तक शिवराज भले ही कांग्रेस से मोर्चा लेने को तैयार दिख रहे हों, लेकिन उनका विकल्प भाजपा को हर हाल में खोजना होगा। हालांकि वह अभी केंद्र की राजनीति में जाने से साफ इनकार कर रहे हैं। उन्होंने कह दिया है कि वह केंद्र में नहीं जाएंगे, मध्यप्रदेश में ही रहेंगे और यही मरेंगे। लेकिन सियासत का ऊंट कब, किस करवट बैठेगा ये शिवराज भी नहीं जानते। हार के बाद शिवराज अब उतने मजबूत नहीं रह गए हैं जितना सीएम रहते थे।  
 
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