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Madhya Pradesh: बीमार किशोर खा गया ढाई हजार की बिरयानी, पिता की डांट के डर से घर से भागा
Sun, 10 Jul 2022 08:05 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 10 Jul 2022 08:05 PM IST
सार
सागर का रहने वाला एक किशोर ढाई हजार की बिरयानी खा गया। माता-पिता की डांट के डर से वह घर छोड़कर भाग गया। भोपाल में पकड़ा गया। उसे घर वालों को सौंप दिया गया है।
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15 वर्षीय बालक घर से भाग गया, कारण ये था कि उसने घर में रखे ढाई हजार रुपये से बिरयानी खा ली।
विस्तार
मध्य प्रदेश के सागर से एक अजीब मामला सामने आया है। 15 वर्षीय बालक घर से भाग गया, कारण ये था कि उसने घर में रखे ढाई हजार रुपये से बिरयानी खा ली। पिता की डांट के डर से वह घर छोड़कर भाग गया। भोपाल में रेलवे चाइल्ड लाइन ने उसे रेस्क्यू किया और घरवालों को सौंप दिया है।
जानकारी के अनुसार किशोर सागर का रहने वाला है। वह भोपाल आने वाली एक ट्रेन में चढ़ गया। इस बीच वह भोपाल में रेलवे चाइल्ड लाइन ने उसे रेस्क्यू किया। पूछताछ में उसने कहा कि वह इंदौर में रहकर पढ़ता है और घर जा रहा था। उसने कहा कि वह बीमार रहता है और इसलिए दवाई के लिए यह पैसे साथ में हैं। कई चरण की काउंसलिंग के बाद भी किशोर ने अपने माता-पिता का असल नाम या पता नहीं बताया। हालांकि, बातचीत में उसने स्थानीय थाना क्षेत्र का जिक्र किया। टीम ने जब थाने में बात की तो वहां किशोर की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज थी। इसके बाद उसके माता-पिता से संपर्क हो सका।
रेलवे चाइल्ड लाइन समन्वयक संजीव जोशी ने बताया कि किशोर ने कहा कि वह 11वीं कक्षा में पढ़ाई करता है। उसके माता-पिता काम के लिए गांव से बाहर जाते थे और कई बार 15 दिन से ज्यादा बाहर रहते थे, इसलिए वह घर में रखे पैसे बिरयानी खाने में खर्च करता रहा। जब उसे पता चला कि वो लोग वापस आने वाले हैं तो चिंता होने लगी। उसे लगा कि अब पापा बहुत मारेंगे। इसी डर से उसने घर छोड़ने का फैसला किया। किशोर ने कहा कि उसने तय कर लिया था कि वह दोबारा कभी घर नहीं जाएगा।वहीं पिता ने कहा कि बेटे के दिल में छेद है, जिसका आपरेशन हो चुका है। इस कारण उसके खान-पान में परहेज बरतते हैं।
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जानकारी के अनुसार किशोर सागर का रहने वाला है। वह भोपाल आने वाली एक ट्रेन में चढ़ गया। इस बीच वह भोपाल में रेलवे चाइल्ड लाइन ने उसे रेस्क्यू किया। पूछताछ में उसने कहा कि वह इंदौर में रहकर पढ़ता है और घर जा रहा था। उसने कहा कि वह बीमार रहता है और इसलिए दवाई के लिए यह पैसे साथ में हैं। कई चरण की काउंसलिंग के बाद भी किशोर ने अपने माता-पिता का असल नाम या पता नहीं बताया। हालांकि, बातचीत में उसने स्थानीय थाना क्षेत्र का जिक्र किया। टीम ने जब थाने में बात की तो वहां किशोर की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज थी। इसके बाद उसके माता-पिता से संपर्क हो सका।
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रेलवे चाइल्ड लाइन समन्वयक संजीव जोशी ने बताया कि किशोर ने कहा कि वह 11वीं कक्षा में पढ़ाई करता है। उसके माता-पिता काम के लिए गांव से बाहर जाते थे और कई बार 15 दिन से ज्यादा बाहर रहते थे, इसलिए वह घर में रखे पैसे बिरयानी खाने में खर्च करता रहा। जब उसे पता चला कि वो लोग वापस आने वाले हैं तो चिंता होने लगी। उसे लगा कि अब पापा बहुत मारेंगे। इसी डर से उसने घर छोड़ने का फैसला किया। किशोर ने कहा कि उसने तय कर लिया था कि वह दोबारा कभी घर नहीं जाएगा।वहीं पिता ने कहा कि बेटे के दिल में छेद है, जिसका आपरेशन हो चुका है। इस कारण उसके खान-पान में परहेज बरतते हैं।
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