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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Indore News ›   Indore: Temple removed for the Musakhedi bridge; Bajrang Dal arrived at the site and registered a protest.

इंदौर: इंदौर में मुसाखेड़ी ब्रिज के लिए हटाया मंदिर,बजरंग दल ने मौके पर पहुंच कर दर्ज कराया विरोध

Tue, 15 Sep 2026 06:00 AM IST
Abhishek Chendke न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: Abhishek Chendke Updated Tue, 15 Sep 2026 06:00 AM IST
सार

 ब्रिज के निर्माण में बाधक मंदिर को हटाने के बाद हिंदू संगठनों का आक्रोश सामने आया। प्रशासन ने क्रेन की मदद से मंदिर का चबूतरा और मूर्तियां हटाकर दूसरे स्थान पर शिफ्ट कर दीं। जानकारी मिलते ही  बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे और विरोध जताया।

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Indore: Temple removed for the Musakhedi bridge; Bajrang Dal arrived at the site and registered a protest.
इंदौर से मंदिर और मूर्तियां हटाईं। - फोटो : amarujala

विस्तार

इंदौर में मूसाखेड़ी ब्रिज की एक भुजा के निर्माण में बाधक बने मंदिर को प्रशासन ने हटा दिया और मूर्तियों को दूसरे मंदिर में शिफ्ट किया। इससे नाराज विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के साथ जनता की आस्था का सम्मान भी अफसरों को करना चाहिए।

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अफसरों ने क्रेन की मदद से मंदिर का चबूतरा और मूर्तियां हटाईं। मूर्तियों को प्लास्टिक से पैक किया गया था। मंदिर और मूर्तियां हटाए जाने की जानकारी जब हिंदूवादी संगठनों के पदाधिकारियों को मिली तो वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने अफसरों के सामने विरोध दर्ज कराया और कहा कि हिंदू संगठनों को विश्वास में लिए बिना मंदिर को हटाया गया। इसके लिए धार्मिक विधि-विधान का भी पालन नहीं किया गया। उनका कहना था कि मंदिर की मूर्तियों को नाले के समीप बने चबूतरे पर स्थापित किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय रहवासियों और हिंदू समाज में नाराजगी फैल गई।

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विहिप-बजरंग दल के प्रचार प्रमुख अन्नु गेहलोत सहित कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर प्रशासन के समक्ष विरोध दर्ज कराया। संगठन ने मांग रखी कि मंदिरों के विस्थापन से पहले स्थानीय मंदिर समिति और श्रद्धालुओं से संवाद किया जाए। आवश्यक होने पर धार्मिक विधि-विधान के साथ किसी पवित्र और उपयुक्त स्थान का चयन किया जाए।

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विरोध के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने विहिप-बजरंग दल के पदाधिकारियों और स्थानीय रहवासियों से चर्चा की। चर्चा के पश्चात जनभावनाओं का सम्मान करते हुए मंदिर को पास ही उपयुक्त और पवित्र स्थान पर विधिवत विस्थापित करने पर सहमति बनी। इसके बाद हिंदू संगठन के पदाधिकारी लौट गए।

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