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Lata Mangeshkar: अपने आखिरी इंटरव्यू में दीदी ने कहा था- मैं खुद को एमपी का ही मानती हूं, विलक्षण हूं क्योंकि इंदौर में जन्म हुआ
Sun, 06 Feb 2022 02:22 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 06 Feb 2022 02:22 PM IST
सार
भारत रत्न और देश की दिग्गज गायिका लता मंगेशकर ने अपने अंतिम इंटरव्यू में कहा था कि वह विलक्षण इसलिए है क्योंकि उनका जन्म इंदौर में हुआ है। वह अपने आपको मध्य प्रदेश का ही मानती है। मैं जब भी इंदौर गई मुझे बहुत प्यार और सम्मान मिला।
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स्वर कोकिला भारत रत्न लता मंगेशकर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
लता मंगेशकर ने रविवार को मुंबई के अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह लंबे समय से बीमार थी। 16 दिसंबर 2021 में मध्य प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के लिए पंडित रविशंकर की स्मृतियों पर पुस्तक लिखने को लेकर लता मंगेशकर का ग्वालियर के वरिष्ठ लेखक और स्तंभकार दिनेश पाठक ने इंटरव्यू लिया था। इस इंटरव्यू को उनके जीवन का अंतिम इंटरव्यू कहा जा रहा है। दिनेश पाठक ने बताया कि 92 साल की उम्र में भी उनके जवाब सादगी भरे थे। कोरोना संक्रमण के कारण वे लोगों से कम मिलती जुलती थी, उनकी देखभाल के लिए 3 नर्स उनके साथ रहती थीं।
सवाल- पंडित रविशंकर के तुरंत बाद आपको भारत रत्न मिला इसके बारे में आप क्या कहना चाहेगी?
जवाब- मैं क्या कहू। देखिए पंडित रविशंकर भारत रत्न नहीं थे। वह विश्व रत्न थे। मैं उनके सामने कुछ भी नहीं थी। मुझे उन्होंने भारत रत्न बनाया। मुझे जो भी सम्मान दिया गया, उसमें सरकार की बहुत मेहरबानी है।
सवाल- आप दोनों ही अपनी-अपनी जगह विलक्षण हैं?
जवाब- अपनी जगह विलक्षण इसलिए हूं क्योंकि मेरा जन्म इंदाैर में हुआ। मैं अपने आपको मध्य प्रदेश की मानती हूं। मैं और मेरी बहन हम दोनों का ही जन्म इंदौर में हुआ। मेरी मौसी वहां रहती थीं। मौसी के घर सुना है कि मेरी नानी भी आई थी। सबलोग मेरी मां को संभाल रहे थे।
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सवाल- आपका का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ। यह हमारे लिए गौरव है।
जवाब- मैंने यह भी सुना है कि जहां मेरा जन्म हुआ। वहां उन्होंने एक बोर्ड लगाया है। बड़ी कृपा है मध्य प्रदेश वालों की। मैं जब भी आई हूं तो वहां के लोग मुझसे बहुत प्यार और इज्जत से मिले हैं।
सवाल - आपके नाम पर एमपी सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाता है।
जवाब– मुझे मालूम है। उस समय अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कहा था कि हम आपके नाम से पुरस्कार देना चाहते है। मैंने कहां कि आपकी इच्छा है। मैं इंदौर को अपना समझती हूं। मैं पूरे मध्य प्रदेश को ही अपना समझती हूं। वो कुछ भी करें। यदि 10 रुपये का भी प्राइज दे तों मेरे लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है।
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सवाल- पंडित रविशंकर के तुरंत बाद आपको भारत रत्न मिला इसके बारे में आप क्या कहना चाहेगी?
जवाब- मैं क्या कहू। देखिए पंडित रविशंकर भारत रत्न नहीं थे। वह विश्व रत्न थे। मैं उनके सामने कुछ भी नहीं थी। मुझे उन्होंने भारत रत्न बनाया। मुझे जो भी सम्मान दिया गया, उसमें सरकार की बहुत मेहरबानी है।
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सवाल- आप दोनों ही अपनी-अपनी जगह विलक्षण हैं?
जवाब- अपनी जगह विलक्षण इसलिए हूं क्योंकि मेरा जन्म इंदाैर में हुआ। मैं अपने आपको मध्य प्रदेश की मानती हूं। मैं और मेरी बहन हम दोनों का ही जन्म इंदौर में हुआ। मेरी मौसी वहां रहती थीं। मौसी के घर सुना है कि मेरी नानी भी आई थी। सबलोग मेरी मां को संभाल रहे थे।
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सवाल- आपका का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ। यह हमारे लिए गौरव है।
जवाब- मैंने यह भी सुना है कि जहां मेरा जन्म हुआ। वहां उन्होंने एक बोर्ड लगाया है। बड़ी कृपा है मध्य प्रदेश वालों की। मैं जब भी आई हूं तो वहां के लोग मुझसे बहुत प्यार और इज्जत से मिले हैं।
सवाल - आपके नाम पर एमपी सरकार द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार दिया जाता है।
जवाब– मुझे मालूम है। उस समय अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कहा था कि हम आपके नाम से पुरस्कार देना चाहते है। मैंने कहां कि आपकी इच्छा है। मैं इंदौर को अपना समझती हूं। मैं पूरे मध्य प्रदेश को ही अपना समझती हूं। वो कुछ भी करें। यदि 10 रुपये का भी प्राइज दे तों मेरे लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है।
