परिवार की लापरवाही, चली गई मासूम की जान
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जब उसे कार से निकाला तो वह अचेत था। अस्पताल ले गए तो उसे मृत घोषित कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि आक्सीजन नहीं मिलने से बच्चे की मौत 30-45 मिनट में ही हो गई थी।
अचेत मिला बच्चा
शुक्रवार को हुई इस घटना में नवरंग साड़ी हाउस के संचालक दीपक नायक (जैन) माता-पिता, पत्नी और बच्चों सहित मंदिर गए थे। दीपक और उनके पिता कमल जैन दुकान पर ही रुक गए।
उनकी पत्नी और मां दूसरी मंजिल पर बने घर में चले गए। जहां दीपक नायक ने सोचा कि अतिशत अपनी मां के साथ ऊपर चला गया है, वहीं उसकी मां को लगा कि वह दुकान पर ही है।
जब दीपक की पत्नी छोटे बेटे अतिशय जैन को ढूंढते हुए नीचे आई तो वह उन्हें दिखाई नहीं दिया। ढूंढने पर वह दीपक नायक की कार स्विफ्ट डिजायर में अगली सीट के नीचे बेहोशी की हालत में मिला। गाड़ी की चाबी भी कार के अंदर मिली।
डुप्लीकेट चाबी से निकाला बाहर
डुप्लीकेट चाबी से अतिशय को बाहर निकाला गया। अस्पताल में डाक्टरों ने बताया कि अतिशय की मौत हो चुकी है। दीपक के दादा कमल जैन का कहना है कि शायद बच्चा चाबी लेकर कार में अंदर चला गया लेकिन वह बाहर नहीं निकल पाया।
शीशे बंद होने के कारण उसका दम घुट गया। बच्चे का अंतिम संस्कार करने के बाद पुलिस ने धारा 174 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस परिजनों से पूछताछ कर रही है। पुलिस का कहना है कि जरूरत पड़ी तो दफनाए गए शव को निकालकर उसका पोस्टमार्टम भी करवाया जा सकता है।
