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Omkareshwar: बड़वाह में अष्ठ कमल पुष्प पर विराजित जयंती माता के खुले पट, भक्तों का उमड़ा सैलाब
Tue, 08 Oct 2024 05:39 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, ओंकारेश्वर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Tue, 08 Oct 2024 05:39 PM IST
सार
ओंकारेश्वर के समीप स्थित बड़वाह में जयंती माता के पट बीती रात खोले गए। पट खुलते ही मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
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जयंती माता के खुले पट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश के बड़वाह वन क्षेत्र में स्थित पांडवों की कुलदेवी रही और राणा परिवार की कुलदेवी माता जयंती के नए बाल स्वरूप चार भुजा पद्मासन में अष्ठ कमल पुष्प पर विराजित माता का राणा राजेंद्र सिंह सहित परिवार की उपस्थिति में नए बाल स्वरूप का विधि-विधान से पूजन कर चोलावरण किया गया। सोमवार रात 10 बजे महाआरती के साथ मंदिर के पट खोले गए। वहीं, मगलवार को माता के नए स्वरूप के दर्शन करने के लिए सुबह चार बजे से भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी और सुबह छह बजे महाआरती में हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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बता दें कि सोमवार सुबह चार बजे माता जयंती ने अपना नवीन चोला छोड़कर सैकड़ों साल पुराने स्वरूप में आ गई थी। उसके बाद मंदिर के गर्भगृह को दिनभर के लिए पर्दे से बंद कर दिया था। माता के नवीन चोला छोड़ने की खबर फैलते ही दिनभर मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ती रही। उसके बाद माता के मूल स्वरूप का विधि-विधान से पंडित चंद्रप्रकाश शास्त्री के आचार्यत्व में विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन कर माता का चोलावरण किया गया।
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सोमवार रात 10 बजे राणा परिवार की उपस्थिति में माता की महाआरती के साथ मंदिर के पट खोले गए। शास्त्री ने बताया कि सोमवार सुबह मां भगवती माता जयंती ने अपना चोला छोड़ा था। माता के सैकड़ों साल पुराने स्वरूप में भगवती चार भुजा के रूप में मौजूद हैं। माता के एक हाथ में खड़ग, एक हाथ में खप्पर और एक हाथ में ढाल है। भगवती पद्मासन में अष्ठ कमल पुष्प पर विराजमान हैं।
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पंडित रामस्वरूप शर्मा, महेंद्र शर्मा, दीपक शर्मा और अन्य विद्वानों ने मिलकर बहुत सुंदर मां का आकार दिया है। गाय के देशी घी से मां भगवती का लेप किया है। इसके बाद सिंदूर से भगवती का चोला चढ़ाया गया। नवीन वस्त्र धारण कर पुष्प माला इत्यादि धारण कराया है। महाआरती के बाद माता के दर्शनों के लिए मंदिर के पट खोले गए।
इसी के साथ पंडित शास्त्री ने बताया कि एक तरह से यह शहरवासियों के लिए शुभ संकेत है। लेकिन दूसरे भाव में जाएं तो नगर में कोई दूसरा संकट का संकेत था, जो मां ने अपने ऊपर लिया है। इस दौरान पूरे दिन श्रद्धालुओं ने बाहर से माता के चित्र के दर्शन किए। इस अवसर पर राणा राजेंद्र सिंह, चंद्रपाल सिंह तोमर, विजेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह, नरेश राणा गुड्डू, लोकेंद्र सिंह और महिपाल सिंह सहित भक्तगण भारी संख्या में मौजूद रहे।
