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Khandwa: अस्पताल प्रबंधन ने बदले बच्चे, एक को दे दी छुट्टी दूसरे को बताया मृत, फिर गाड़ी भेज वापस बुलाया
Sun, 18 Feb 2024 09:49 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, खंडवा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, खंडवा
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 18 Feb 2024 09:49 PM IST
सार
खंडवा नगर के नंदकुमार सिंह मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित अस्पताल के एसएनसीयू विभाग की लापरवाही के चलते दो परिवारों के बच्चे आपस में बदले जाने का मामला सामने आया है। हंगामा हुआ तो गलती सुधारी गई।
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खंडवा के एक अस्पताल में बच्चे बदलने का मामला सामने आया है।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित अस्पताल से दो परिवारों के नवजात आपस में बदले जाने की लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक बच्चे का वजन कम होने और उसके प्रीमैच्योर होने के चलते उसकी मौत हो गई। तब परिजन के हंगामा करने पर मालूम चला कि उनका बच्चा फुल टर्म बच्चा था, जो कि एक दिन पहले ही किसी दूसरे परिवार को सौंप दिया गया था। वहीं अस्पताल प्रबंधन की मानें तो दोनों बच्चों के माता-पिता के नाम एक जैसे होने के चलते नर्स से इस तरह की गलती हुई है, जिसकी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने इस गलती को ठीक करते हुए दोनों बच्चों को उनके सही माता-पिता को सौंपकर मामला सुलझा दिया है।
खंडवा नगर के नंदकुमार सिंह मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित अस्पताल के एसएनसीयू विभाग की लापरवाही के चलते दो परिवारों के बच्चे आपस में बदले जाने का मामला सामने आया है। जिसमें एक परिवार के लो बर्थ वेट बच्चे की जगह उन्हें फुल टर्म बच्चा देकर डिस्चार्ज करते हुए घर भेज दिया गया, जबकि अगले दिन जब बच्चे के वास्तविक माता-पिता को दूसरे परिवार का लो बर्थ वेट बच्चा दिया जा रहा था तब, उन्होंने हंगामा कर दिया। तब मालूम चला कि इनका बच्चा तो बीते दिन ही डिस्चार्ज कर गलत परिवार को सौंप दिया गया है। हालांकि प्रबंधन ने इस मामले में तुरंत एंबुलेंस भेज कर एक दिन पूर्व सौंप गए बच्चे को उसके परिजन के साथ अस्पताल बुलाया, और इस गलती को ठीक करते हुए दोनों परिवारों को उनके वास्तविक बच्चे सौंप दिए गए, जिसके चलते मामला सुलझ गया।
एक दिन तक दूसरे परिजन कराते रहे फीडिंग
वहीं इस मामले के बारे में जानकारी देते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि दो बच्चे थे जिनकी नाम एक से थे- मनीषा वाइफ ऑफ विजय। इनमें से एक का बच्चा प्रीमैच्योर और लो बर्थ वेट था तो वही दूसरा फुल टर्म था। फुल टाइम वाले बच्चों को हम फीडिंग के लिए बाहर मां को देते हैं। ऐसे में ड्यूटी नर्स ने बाहर आकर मनीषा विजय कौन है कि आवाज लगाई, तब जो दूसरी मनीषा थी वो उठ कर आ गई। जिसको नर्स ने बच्चा दे दिया और उन्होंने फीडिंग कराई। ऐसा एक दिन तक चलता रहा। ऐसे में जो दूसरा सीरियस बच्चा था, वह अंदर ही था। उसके पेरेंट्स को लग रहा था यह हमारा बच्चा नहीं है, बल्कि जिसे फीडिंग करा रहे हैं वह हमारा बच्चा है, जो कि गलत चला गया था। बाद में जो लोग बर्थ रेट वाला बच्चा था वह सीरियस हुआ और ऐसे में नर्स ने उसके गांव का नाम देखा जो कि पहले नर्स नहीं देख पाई थी।
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अस्पताल प्रबंधन बोला कराएंगे जांच
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार एक बच्चा खंडवा का ही था तो दूसरा छैगांव माखन का था । जब यह गलती पकड़ में आई तब तुरंत गाड़ी भेज कर उस बच्चे को वापस बुलवाया और वह अभी स्वस्थ है और उन्हें दे दिया गया है, और दूसरा प्रीमैच्योर बच्चा अभी सीरियस है और एडमिट है। उन्होंने बताया कि इस मामले में किस तरह से लापरवाही हुई है इसको लेकर हम जांच कराएंगे। इसके लिए हमने सिस्टर को बोल भी दिया है।
आज से लिखा जाएगा नाम के साथ सरनेम
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार खंडवा अस्पताल में बर्थ रेट बहुत ज्यादा है, क्योंकि अभी भी मनीषा नाम के चार बच्चे हैं तो ऐसे में अब हमने बोल दिया है कि अब पहले मदर का नाम देखो, फिर उसके हस्बैंड का नाम देखो, फिर गांव का नाम देखो, फिर डेट ऑफ एडमिशन और बेड का नंबर देखो। उसके बाद बच्चे को देना चाहिए। वहीं अस्पताल में नाम के साथ सरनेम ना लिखे जाने के सवाल पर उन्होंने बताया कि एसएनसीयू में ऐसे ही बगैर सरनेम के लिखा जाता है, लेकिन अब हमने बोल दिया है, तो सरनेम भी आज से स्टार्ट हो जाएगा लिखना।
हमारे बच्चे को कल ही दे दी थी छुट्टी
वहीं एक बच्चे के पिता विजय वर्मा ने बताया कि उनके बच्चे की डिलीवरी 14 फरवरी को हुई थी, जिसमें उसका वजन 2 किलो 900 ग्राम था जिसे कमजोर बताते हुए आईसीयू में रखने का कहा था जहां हम बार-बार जा रहे थे तो हमें बताया जा रहा था कि बच्चा कमजोर है इसलिए उसको आईसीयू में ही रखना पड़ेगा और आज शाम को अचानक से खबर मिली कि आपका बच्चा मर चुका है क्योंकि इसका वजन कम था और शरीर पूरा बना नहीं था। लेकिन जब फाइल देखी तो प्रोफाइल हमारे बच्चे की नहीं थी और उसमें दर्ज बच्चा 1 किलो 400 ग्राम का था। इस पर जब हमने छानबीन कराई तो हमको मालूम चला कि हमारे बच्चे को कल ही छुट्टी दे दी है, फिर उन्होंने गाड़ी भेज कर हमारा बच्चा बुलाकर वापस दिया।
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खंडवा नगर के नंदकुमार सिंह मेडिकल कॉलेज द्वारा संचालित अस्पताल के एसएनसीयू विभाग की लापरवाही के चलते दो परिवारों के बच्चे आपस में बदले जाने का मामला सामने आया है। जिसमें एक परिवार के लो बर्थ वेट बच्चे की जगह उन्हें फुल टर्म बच्चा देकर डिस्चार्ज करते हुए घर भेज दिया गया, जबकि अगले दिन जब बच्चे के वास्तविक माता-पिता को दूसरे परिवार का लो बर्थ वेट बच्चा दिया जा रहा था तब, उन्होंने हंगामा कर दिया। तब मालूम चला कि इनका बच्चा तो बीते दिन ही डिस्चार्ज कर गलत परिवार को सौंप दिया गया है। हालांकि प्रबंधन ने इस मामले में तुरंत एंबुलेंस भेज कर एक दिन पूर्व सौंप गए बच्चे को उसके परिजन के साथ अस्पताल बुलाया, और इस गलती को ठीक करते हुए दोनों परिवारों को उनके वास्तविक बच्चे सौंप दिए गए, जिसके चलते मामला सुलझ गया।
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एक दिन तक दूसरे परिजन कराते रहे फीडिंग
वहीं इस मामले के बारे में जानकारी देते हुए अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि दो बच्चे थे जिनकी नाम एक से थे- मनीषा वाइफ ऑफ विजय। इनमें से एक का बच्चा प्रीमैच्योर और लो बर्थ वेट था तो वही दूसरा फुल टर्म था। फुल टाइम वाले बच्चों को हम फीडिंग के लिए बाहर मां को देते हैं। ऐसे में ड्यूटी नर्स ने बाहर आकर मनीषा विजय कौन है कि आवाज लगाई, तब जो दूसरी मनीषा थी वो उठ कर आ गई। जिसको नर्स ने बच्चा दे दिया और उन्होंने फीडिंग कराई। ऐसा एक दिन तक चलता रहा। ऐसे में जो दूसरा सीरियस बच्चा था, वह अंदर ही था। उसके पेरेंट्स को लग रहा था यह हमारा बच्चा नहीं है, बल्कि जिसे फीडिंग करा रहे हैं वह हमारा बच्चा है, जो कि गलत चला गया था। बाद में जो लोग बर्थ रेट वाला बच्चा था वह सीरियस हुआ और ऐसे में नर्स ने उसके गांव का नाम देखा जो कि पहले नर्स नहीं देख पाई थी।
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अस्पताल प्रबंधन बोला कराएंगे जांच
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार एक बच्चा खंडवा का ही था तो दूसरा छैगांव माखन का था । जब यह गलती पकड़ में आई तब तुरंत गाड़ी भेज कर उस बच्चे को वापस बुलवाया और वह अभी स्वस्थ है और उन्हें दे दिया गया है, और दूसरा प्रीमैच्योर बच्चा अभी सीरियस है और एडमिट है। उन्होंने बताया कि इस मामले में किस तरह से लापरवाही हुई है इसको लेकर हम जांच कराएंगे। इसके लिए हमने सिस्टर को बोल भी दिया है।
आज से लिखा जाएगा नाम के साथ सरनेम
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार खंडवा अस्पताल में बर्थ रेट बहुत ज्यादा है, क्योंकि अभी भी मनीषा नाम के चार बच्चे हैं तो ऐसे में अब हमने बोल दिया है कि अब पहले मदर का नाम देखो, फिर उसके हस्बैंड का नाम देखो, फिर गांव का नाम देखो, फिर डेट ऑफ एडमिशन और बेड का नंबर देखो। उसके बाद बच्चे को देना चाहिए। वहीं अस्पताल में नाम के साथ सरनेम ना लिखे जाने के सवाल पर उन्होंने बताया कि एसएनसीयू में ऐसे ही बगैर सरनेम के लिखा जाता है, लेकिन अब हमने बोल दिया है, तो सरनेम भी आज से स्टार्ट हो जाएगा लिखना।
हमारे बच्चे को कल ही दे दी थी छुट्टी
वहीं एक बच्चे के पिता विजय वर्मा ने बताया कि उनके बच्चे की डिलीवरी 14 फरवरी को हुई थी, जिसमें उसका वजन 2 किलो 900 ग्राम था जिसे कमजोर बताते हुए आईसीयू में रखने का कहा था जहां हम बार-बार जा रहे थे तो हमें बताया जा रहा था कि बच्चा कमजोर है इसलिए उसको आईसीयू में ही रखना पड़ेगा और आज शाम को अचानक से खबर मिली कि आपका बच्चा मर चुका है क्योंकि इसका वजन कम था और शरीर पूरा बना नहीं था। लेकिन जब फाइल देखी तो प्रोफाइल हमारे बच्चे की नहीं थी और उसमें दर्ज बच्चा 1 किलो 400 ग्राम का था। इस पर जब हमने छानबीन कराई तो हमको मालूम चला कि हमारे बच्चे को कल ही छुट्टी दे दी है, फिर उन्होंने गाड़ी भेज कर हमारा बच्चा बुलाकर वापस दिया।
