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Khandwa: आदिवासी अंचल में फैला डायरिया का प्रकोप, 27 बीमारों के साथ हुई एक की मौत, कुएं का पानी निकला प्रदूषित

Tue, 06 Aug 2024 04:25 PM IST
खंडवा ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा Published by: खंडवा ब्यूरो Updated Tue, 06 Aug 2024 04:25 PM IST
सार

ग्राम बाराकुंड में उल्टी दस्त की शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन की टीम बाराकुंड गई थी। जहां जांच में गांव के एक लो लाइन में बने निजी कुंए के पानी का एक पर्व के दौरान गांव के पांच से छह परिवारों द्वारा उपयोग किया जाना सामने आया।

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Khandwa Diarrhea outbreak spreads in tribal area one dead with 27 sick well water found polluted
खंडवा के ग्रामीण अंचल में फैला डायरिया का प्रकोप - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश में खंडवा जिले के आदिवासी अंचल खालवा ब्लॉक के एक गांव बाराकुंड में डायरिया महामारी का प्रकोप सामने आया है। गांव के करीब 27 ग्रामीणों में डायरिया के लक्षण सामने आए हैं, तो वहीं इसके चलते एक ग्रामीण की मौत भी हुई है। बीमारों में महिला एवं पुरुषों के साथ ही छोटे बच्चे भी शामिल हैं।

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बताया जा रहा है कि गांव के एक कुंए का दूषित पानी पीने से ग्रामीणों में उल्टी दस्त की शिकायतें देखने को मिली थीं, जिसके चलते कुछ ग्रामीणों को अस्पताल में भर्ती भी कराया गया था। वहीं, मिली जानकारी के अनुसार, फिलहाल पांच पुरुष एवं पांच महिलाओं समेत कुल 10 लोग अभी भी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। हालांकि, सभी की हालत अभी स्थिर है।
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खंडवा के आदिवासी अंचल खालवा ब्लॉक के गांव बाराकुंड के एक मोहल्ले में दूषित पानी पीने के बाद कई लोगों के बीमार होने का मामला सामने आया है। इन प्रभावितों में उल्टी दस्त होने की शिकायतें सामने आने के बीच इनमें से एक व्यक्ति की मौत भी हुई है। इधर, जिला प्रशासन को घटना की जानकारी मिलते ही जिले और ब्लॉक की आरआर टीमें गांव में पहुंची थीं। जहां करीब 27 मरिज डायरिया से प्रभावित मिले हैं। साथ ही 23 मरीज बुखार और 59 मरीज अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त पाए गए हैं।
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इधर, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव में पहुंचकर सर्वे किया है, जिसके बाद एक कुएं से प्रदूषित पानी पीने के बाद ग्रामीणों के बीमार होने की बात सामने आई है। हालांकि, प्रभावित क्षेत्र में पीएचई विभाग से भी पानी की सप्लाई की जा रही है। लेकिन पर्याप्त सप्लाई के लिए ग्रामीण कुंए के पानी का इस्तेमाल कर रहे थे, जिसमें आसपास के क्षेत्र की गंदगी आकर मिल रही थी और वही प्रदूषित पानी पीने के बाद ग्रामीणों को उल्टी दस्त की शिकायत हुई थी। इसके बाद दूषित पानी वाले कुएं की मोटर बंद कराई गयी।

गांव के 27 मरीजों में मिले डायरिया के लक्षण
वहीं, जिला महामारी विशेषज्ञ डॉक्टर योगेश शर्मा ने बताया कि ग्राम बाराकुंड में हरदा जिले के निवासी अशोक पिता शंकर को उल्टी दस्त की शिकायत के चलते रोशनी स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। वे पहले से ही कुछ इलाज भी करवा रहे थे। हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई थी, जिसे अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ने भी कन्फर्म किया था। वहीं, बाराकुंड गांव की जनसंख्या 1496 है और जांच में 27 मरीजों में डायरिया के लक्षण मिले हैं। इसमें 18 पुरुष और नौ महिलाएं हैं, जिनमें पांच वर्ष से छोटे बच्चों की संख्या छह है। वहीं, छह मरीजों के रेक्टल स्वाब और पानी का एक नमूना भी लिया गया है। सभी सैंपल जांच के लिए डीपीएचएल इंदौर लैब भेजे गए हैं।

सात दिनों के लिए तैनात की गई डॉक्टरों की टीम
वहीं, डॉक्टर शर्मा ने इसके संभावित कारणों पर बात करते हुए बताया कि गांव के एक कुएं में दूषित पानी मिला है। जबकि वहां नल जल योजना भी संचालित है। लेकिन कुछ लोगों द्वारा व्यक्तिगत पानी की लाइन डालकर उस दूषित पानी का उपयोग किया जा रहा था, जिससे कि यह उल्टी दस्त की शिकायतें हुई है। मुख्यतः ऊपरी धाना और बड़ा मोहल्ला क्षेत्र में कुएं के पानी का सेवन किया गया था और उसी क्षेत्र में उल्टी दस्त की शिकायत सामने आई थी। इसके बाद अभी 10 लोगों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है तो वहीं सात दिनों के लिए डॉक्टरों की एक टीम गांव में ही तैनात कर दी गई है।


जिला प्रशासन ने बंद कराया कुएं के पानी का उपयोग
इधर, इस मामले की जानकारी देते हुए जिला कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने बताया कि ग्राम बाराकुंड में उल्टी दस्त की शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन की टीम बाराकुण्ड गई थी। जहां जांच में गांव के एक लो लाइन में बने निजी कुंए के पानी का एक पर्व के दौरान गांव के पांच से छह परिवारों द्वारा उपयोग किया जाना सामने आया। इसके बाद 27 लोगों को उल्टी दस्त की शिकायतें होना सामने आया। तब से ही गांव में दो डॉक्टरों की मेडिकल टीम तैनात की गयी है, जो लगातार मरीजों को देख रही है। वर्तमान में कोई नए मरीज नहीं आ रहे हैं और रोशनी जल समूह योजना से जो पानी की सप्लाई गांव में की जा रही थी, उसमें किसी प्रकार का संक्रमण नहीं पाया गया है और फिलहाल कुएं के पानी का उपयोग बंद कर दिया गया है।

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