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जनजातीय गौरव दिवस: मुख्यमंत्री ने भूरी बाई के साथ पीपल और गुलमोहर का पौधा लगाया
Mon, 15 Nov 2021 01:13 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Mon, 15 Nov 2021 01:13 PM IST
सार
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर भील कलाकार और 2021 के लिए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित भूरी बाई के साथ स्मार्ट उद्यान में गुलमोहर और पीपल का पौधा लगाया।
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शिवराज सिंह चौहान और भूरी बाई पौधरोपण करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर पद्मश्री भूरी बाई के साथ स्मार्ट उद्यान में गुलमोहर और पीपल का पौधा लगाया। मुख्यमंत्री अपने संकल्प के तहत रोज पौधरोपण कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर भील कलाकार भूरी बाई के साथ पौधारोपण किया। भारत सरकार की ओर से वर्ष 2021 में पद्मश्री से सम्मानित भूरी बाई मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पिटोल गांव में जन्मी भारत के सबसे बड़े आदिवासी समूह भीलों के समुदाय से हैं। पद्मश्री भूरी बाई ने अपनी चित्रकारी का सफर एक समकालीन भील कलाकार के रूप में प्रारंभ किया था। भूरी बाई कागज एवं कैनवास का इस्तेमाल करने वाली पहली भील कलाकार है। भारत भवन के तत्कालीन निदेशक जे. स्वामीनाथन ने उन्हें कागज पर चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया था।
भूरी बाई ने जंगल में जानवर, वृक्षों की शांति तथा गाटला (स्मारक स्तंभ) भील देवी-देवता, पौशाक, गहने, टेटू, झोपड़ियां, अन्नागार, हाट उत्सव आदि के साथ नृत्य और मौखिक कथाओं सहित भील जीवन के प्रत्येक पहलू को अपनी कला में समाहित किया है। पद्मश्री कलाकार की चित्रकारी देश-विदेश में भी सराही जाती है। पद्मश्री भूरी बाई भोपाल आदिवासी लोक कला अकादमी में एक कलाकार के तौर पर कार्य करती हैं। इन्हें मप्र सरकार ने 1986-87 में शिखर सम्मान से नवाजा है। साथ ही 1998 में प्रदेश सरकार ने इन्हें अहेलिया सम्मान से भी विभूषित किया है।
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गुलमोहर और पीपल के बारे में
गुलमोहर को दुनिया के सबसे सुंदर वृक्षों में से एक माना गया है। गुलमोहर की सुव्यवस्थित पत्तियों के बीच बड़े-बड़े गुच्छों में खिले फूल इस वृक्ष को अलग ही आकर्षण प्रदान करते हैं। गर्मी में गुलमोहर के पेड़ पत्तियों की जगह फूलों से लदे रहते हैं। यह औषधीय गुणों से भी समृद्ध है। पीपल एक छायादार वृक्ष है। पर्यावरण शुद्ध करता है। इसका धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व भी है। इसके अलावा पीपल के पेड़ को अक्षय वृक्ष भी कहा जाता है क्योंकि ये पेड़ कभी भी पत्ते विहीन नहीं होता। पत्ते झड़ते रहते हैं और नए आते रहते हैं।
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मुख्यमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर भील कलाकार भूरी बाई के साथ पौधारोपण किया। भारत सरकार की ओर से वर्ष 2021 में पद्मश्री से सम्मानित भूरी बाई मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के पिटोल गांव में जन्मी भारत के सबसे बड़े आदिवासी समूह भीलों के समुदाय से हैं। पद्मश्री भूरी बाई ने अपनी चित्रकारी का सफर एक समकालीन भील कलाकार के रूप में प्रारंभ किया था। भूरी बाई कागज एवं कैनवास का इस्तेमाल करने वाली पहली भील कलाकार है। भारत भवन के तत्कालीन निदेशक जे. स्वामीनाथन ने उन्हें कागज पर चित्र बनाने के लिए प्रेरित किया था।
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भूरी बाई ने जंगल में जानवर, वृक्षों की शांति तथा गाटला (स्मारक स्तंभ) भील देवी-देवता, पौशाक, गहने, टेटू, झोपड़ियां, अन्नागार, हाट उत्सव आदि के साथ नृत्य और मौखिक कथाओं सहित भील जीवन के प्रत्येक पहलू को अपनी कला में समाहित किया है। पद्मश्री कलाकार की चित्रकारी देश-विदेश में भी सराही जाती है। पद्मश्री भूरी बाई भोपाल आदिवासी लोक कला अकादमी में एक कलाकार के तौर पर कार्य करती हैं। इन्हें मप्र सरकार ने 1986-87 में शिखर सम्मान से नवाजा है। साथ ही 1998 में प्रदेश सरकार ने इन्हें अहेलिया सम्मान से भी विभूषित किया है।
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गुलमोहर और पीपल के बारे में
गुलमोहर को दुनिया के सबसे सुंदर वृक्षों में से एक माना गया है। गुलमोहर की सुव्यवस्थित पत्तियों के बीच बड़े-बड़े गुच्छों में खिले फूल इस वृक्ष को अलग ही आकर्षण प्रदान करते हैं। गर्मी में गुलमोहर के पेड़ पत्तियों की जगह फूलों से लदे रहते हैं। यह औषधीय गुणों से भी समृद्ध है। पीपल एक छायादार वृक्ष है। पर्यावरण शुद्ध करता है। इसका धार्मिक और आयुर्वेदिक महत्व भी है। इसके अलावा पीपल के पेड़ को अक्षय वृक्ष भी कहा जाता है क्योंकि ये पेड़ कभी भी पत्ते विहीन नहीं होता। पत्ते झड़ते रहते हैं और नए आते रहते हैं।
