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Jabalpur News: बच्चों के साथ स्वेच्छा से गई महिला, नहीं कर सकते बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के रूप में सुनवाई

Sun, 02 Feb 2025 10:56 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sun, 02 Feb 2025 10:56 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए कहा कि महिला अपने बच्चों के साथ स्वेच्छा से गई है, इसलिए मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण के तहत नहीं आता। याचिकाकर्ता ने बेटी व नाबालिग बच्चों के लापता होने की शिकायत की थी, लेकिन जांच में महिला के स्वेच्छा से जाने की पुष्टि हुई। 

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Woman who voluntarily went with children, cannot hear as habeas corpus petition
high court news

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि यदि कोई महिला अपने बच्चों के साथ स्वेच्छा से जाती है, तो इसे बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के रूप में नहीं सुना जा सकता। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने इस आधार पर याचिका का निराकरण कर दिया।

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शहपुरा थाना अंतर्गत रायखेड़ा निवासी सिम्मी बाई द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में आरोप लगाया गया था कि उसकी बेटी शीला, जिसका विवाह दिलीप चौधरी से हुआ था, दो नाबालिग बेटियों के साथ लापता हो गई है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उसके दामाद ने अपनी मौसी के साथ मिलकर उसकी बेटी और दोनों नाबालिग बच्चों को बेच दिया है। उसने अप्रैल 2023 में शहपुरा थाने में इस संबंध में शिकायत दर्ज करवाई थी, लेकिन पुलिस अब तक कोई सुराग नहीं जुटा पाई थी।

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याचिका पर पूर्व सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि लगभग दो वर्ष बीत जाने के बावजूद पुलिस लापता महिला और बच्चों का पता नहीं लगा पाई है। इस पर युगलपीठ ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। पुलिस अधीक्षक ने महिला के मायके पक्ष, जिसमें उसके भाई, भाभी और भतीजी शामिल थे, के बयान प्रस्तुत किए। इन बयानों में बताया गया कि महिला अपने मायके आई थी और फिर स्वेच्छा से किसी व्यक्ति के साथ चली गई।

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युगलपीठ ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए याचिका का निराकरण कर दिया और स्पष्ट किया कि महिला के स्वेच्छा से जाने के कारण यह मामला बंदी प्रत्यक्षीकरण के दायरे में नहीं आता।

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