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नेहा पच्चीसिया: निलंबित सीएसपी नेहा के मामले में हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित, अग्रिम जमानत की लगाई है गुहार

Wed, 28 Oct 2026 09:30 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 28 Oct 2026 09:30 PM IST
सार

कटनी की फरार सीएसपी नेहा पच्चीसिया की एफआईआर निरस्त करने और अग्रिम जमानत देने की याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। उनके खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोपों में मामला दर्ज है। सरकार और शिकायतकर्ता आकाश लोधी ने याचिका का विरोध किया है।

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Verdict reserved on petition filed by absconding CSP Neha Pachisia, who is accused of fraud and corruption.
नेहा पच्चीसिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कटनी की फरार सीएसपी नेहा पच्चीसिया की एफआईआर निरस्त करने और अग्रिम जमानत देने की मांग वाली याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। जस्टिस आनंद कुमार पाठक और जस्टिस राम कुमार चौबे की युगलपीठ में याचिका पर दो दिन सुनवाई हुई।

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नेहा पच्चीसिया सहित तीन आरोपियों के खिलाफ कटनी के कुठला थाने में धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज है। पुलिस ने तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। मामले में लुक आउट नोटिस भी जारी किया गया है।
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ये भी पढ़ें- नेहा पच्चीसिया: फरार निलंबित सीएसपी ने हाईकोर्ट में दी एफआईआर को चुनौती, कहा- जमीन के सौदे में नहीं थी भूमिका

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आरोप है कि कुठला थाना क्षेत्र में हत्या के एक मामले में निर्धारित समय पर चालान पेश नहीं होने से आरोपी को डिफॉल्ट जमानत मिल गई थी। इसके बदले सीएसपी ने आरोपियों की जमीन कथित तौर पर कम कीमत पर अपने एजेंट के नाम से खरीदी। विभागीय जांच के बाद उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया।



याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि विवादित जमीन की खरीद-फरोख्त में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। जमीन मारूफ अहमद हनफी के नाम पर खरीदी गई थी और क्षितिज राज पात्रे ने उनके बैंक खाते में राशि ट्रांसफर की थी। याचिकाकर्ता के खाते से इस सौदे में कोई भुगतान नहीं हुआ। उनके खिलाफ आरोपों को साबित करने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने का दावा करते हुए एफआईआर निरस्त करने की मांग की गई।

बुधवार को सुनवाई के दौरान सरकार और शिकायतकर्ता आकाश लोधी की ओर से याचिका का विरोध किया गया। उनकी ओर से कहा गया कि आईपीएस अधिकारी की विभागीय जांच में दर्ज बयानों और एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया।

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