Jabalpur News: आदिवासियों को कमेटी से हटाने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, नोटिस जारी कर मांगा जवाब
Jabalpur: बुरहानपुर में गठित कमेटी में नियमों को ताक पर रखते हुए आदिवासी वर्ग के प्रतिनिधियों की जगह अन्य वर्ग के लोगों को शामिल कर लिया गया। इसके चलते वन भूमि के पट्टे अन्य वर्गों को दिए जा रहे हैं, जिससे आदिवासी समुदाय के हितों की अनदेखी हो रही है।
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आदिवासियों को जिला स्तरीय कमेटी से बाहर किए जाने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह याचिका बुरहानपुर निवासी जितेन्द्र राव तोले की ओर से दायर की गई थी।
याचिका में कहा गया है कि वन भूमि के पट्टे आवंटन के लिए जिला स्तर पर गठित कमेटी में नियमों के अनुसार जिला कलेक्टर, वन विभाग के अधिकारी और पंचायत स्तर के तीन आदिवासी जनप्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल किए जाने चाहिए। इनमें से कम से कम एक महिला होना भी अनिवार्य है। इस बाबत सरकार द्वारा गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है।
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लेकिन बुरहानपुर में गठित कमेटी में नियमों को ताक पर रखते हुए आदिवासी वर्ग के प्रतिनिधियों की जगह अन्य वर्ग के लोगों को शामिल कर लिया गया। इसके चलते वन भूमि के पट्टे अन्य वर्गों को दिए जा रहे हैं, जिससे आदिवासी समुदाय के हितों की अनदेखी हो रही है।
याचिका में जनजातीय कार्य विभाग के सचिव, निदेशक, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सहायक निदेशक, जिला कलेक्टर बुरहानपुर, और सहायक आयुक्त जनजातीय कल्याण सहित अन्य अधिकारियों को अनावेदक बनाया गया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगल पीठ ने सुनवाई के बाद सभी अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सूर्य प्रकाश पाठक ने पैरवी की।
