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MP High Court: अनाधिकृत अनुपस्थिति के लिए होना चाहिए संतोषजनक स्पष्टीकरण, HC ने खारिज की कांस्टेबल की अपील
Fri, 20 Sep 2024 09:56 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 20 Sep 2024 09:56 PM IST
सार
मंडला निवासी करन सिंह मरावी की तरफ से दायर की गयी अपील में कहा गया था कि साल 2003 को वह मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष सशस्त्र बल में जीडी कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति हुआ था।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डेढ़ साल तक अनाधिकृत तौर पर अनुपस्थिति रहने के कारण सेवा से बर्खास्त किये जाने को विशेष सुरक्षा बल से बर्खास्त किये जाने के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की गयी थी। अपील की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने पाया कि अपीलकर्ता 455 दिन अनाधिकृत अनुपस्थित रहा। अनाधिकृत अनुपस्थिति के संबंध में उसके द्वारा संतोषजनक स्पष्टीकरण भी प्रस्तुत नहीं किया। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
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मंडला निवासी करन सिंह मरावी की तरफ से दायर की गयी अपील में कहा गया था कि साल 2003 को वह मध्यप्रदेश पुलिस के विशेष सशस्त्र बल में जीडी कांस्टेबल के पद पर नियुक्ति हुआ था। उसे 3 मई 2014 से 1 अगस्त 2015 तक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के कारण विभाग की तरफ से नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद विभागीय जांच कर उसे सेवा से पृथक किये जाने की सजा से दंडित किया गया, जिसके खिलाफ उसने अपील दायर की थी जिसे प्राधिकारियों द्वारा खारिज कर दी गयी।
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याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया था कि इस दौरान वह छिंदवाड़ा में पदस्थ था। उसकी पत्नी को लगातार गर्भपात की समस्या था। उसके कारण उसे पत्नी के साथ रहना आवश्यक था। प्राधिकारियों के द्वारा अपील खारिज किये जाने को चुनौती देते हुए उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। एकलपीठ द्वारा याचिका को खारिज किये जाने के कारण उक्त याचिका दायर की गयी है।
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अपील की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने पाया कि एकलपीठ ने अपने आदेश में इस बात का उल्लेख किया है कि याचिकाकर्ता की पत्नी के बांझपन का इलाज पहले से चल रहा था। उसकी पत्नी को उपचार के लिए जबलपुर स्थित एक निजी अस्पताल में 23 जून 2013 को भर्ती करवाया गया था। उसका डिस्चार्ज कार्ड याचिकाकर्ता ने प्रस्तुत नहीं किया है, जिस दौरान याचिकाकर्ता अनाधिकृत अनुपस्थित था। उस दौरान के कोई मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये हैं। युगलपीठ ने अपने अपील को खारिज करते हुए एकलपीठ के आदेश की पुष्टि करते हुए कहा है कि अनधिकृत अनुपस्थिति के लिए संतोषजनक स्पष्टीकरण होना चाहिये।
