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नर्सिंग कॉलेज फर्जीवाड़ा: अपात्र कॉलेजों के संबंध में कोर्ट का आदेश, छात्रों का शिफ्टिंग माड्यूल पारदर्शी हो

Sat, 24 Oct 2026 05:22 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sat, 24 Oct 2026 05:22 PM IST
सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच में अपात्र पाए गए नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों की शिफ्टिंग प्रक्रिया में संशोधन के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता और नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल आपसी समन्वय से नया मॉड्यूल तैयार करेंगे। कोर्ट ने पढ़ाई, क्लिनिकल प्रशिक्षण और शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया। अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी। 

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The shifting module for the transfer of students from ineligible nursing colleges must be transparent.
मप्र हाईकोर्ट

विस्तार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच में अपात्र पाए गए कॉलेजों के छात्रों की शिफ्टिंग प्रक्रिया के संबंध में अहम आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने याचिकाकर्ता और मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल को एक-दूसरे के प्रस्ताव व आपत्तियां साझा कर समन्वय के साथ नया व संशोधित शिफ्टिंग मॉड्यूल तैयार निर्देश जारी किए हैं। याचिका पर अगली सुनवाई 3 नवंबर को निर्धारित की गई है।

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गौरतलब है कि लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल की तरफ से दायर जनहित याचिका में प्रदेश में खुले सैकड़ों फर्जी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। याचिका में कहा गया था कि नर्सिंग कॉलेजों के मान्यता देने में निर्धारित शर्तों का पालन नहीं किया गया है। कागजों में संचालित नर्सिंग कॉलेजों को मान्यता प्रदान की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए प्रदेश में संचालित नर्सिंग कॉलेज की जांच के निर्देश सीबीआई को दिए थे। सीबीआई जांच में प्रदेश में संचालित 695 नर्सिंग कॉलेजों में 156 कॉलेज सूटेबल पाए गए थे। सीबीआई जांच में पाई गई कमियों को दूर कर 89 कॉलेजों भी सूटेबल की श्रेणी में आ गए थे। हाईकोर्ट ने जांच में अनसूटेबल पाए गए कॉलेजों के छात्रों को सूटेबल कॉलेज में स्थानांतरित करने के आदेश जारी किए थे।
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याचिकाओं पर शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल की तरफ ने अपात्र कॉलेजों के विद्यार्थियों के स्थानांतरण और डबल शिफ्ट में प्रशिक्षण को लेकर स्टेटस रिपोर्ट तथा शिफ्टिंग माड्यूल प्रस्तुत किया। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता आलोक बागरेचा ने माड्यूल में प्रशिक्षण की पारदर्शिता, विद्यार्थियों की पसंद, बुनियादी सुविधाओं और प्रशिक्षण की लागत के मुद्दे उठाते हुए आपत्ति पेश की गई। उनकी तरफ से मांग की गई कि विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई का खर्च अपात्र कालेजों की बैंक गारंटी राजसात कर वसूला जाए तथा स्थानांतरण प्रक्रिया में विद्यार्थियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए।

युगलपीठ ने दोनों पक्षों को प्रस्तावों और आपत्तियों पर समन्वय कर संशोधित माड्यूल तैयार करने के निर्देश दिए, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई, शैक्षणिक गुणवत्ता और क्लिनिकल प्रशिक्षण प्रभावित न हों। साथ ही दोषी संस्थानों की जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। नर्सिंग काउंसिल की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा।

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