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MP News: आवेदन में मानवीय त्रुटि के कारण आवेदक को नहीं मान सकते अयोग्य, हाईकोर्ट ने दिए पुनः विचार के निर्देश
Sun, 27 Aug 2023 07:14 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 27 Aug 2023 07:14 PM IST
सार
याचिकाकर्ता का कहना है कि आवेदन फॉर्म में उसने गलती से एक कॉलम में गृह जिला रीवा लिख दिया था। वह सीधी जिले का निवासी था और दूसरे कॉलम में उसने अपना गृह जिला सही लिखा था। कटऑफ से अधिक अंक मिलने के बावजूद भी इस त्रृटि के कारण उसे अयोग्य मान लिया गया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फॉर्म में मानवीय त्रुटि के कारण अयोग्य माने जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जस्टिस जीएस अहलुवालिया की एकलपीठ ने पाया कि त्रुटि से उम्मीदवार को कोई फायदा नहीं हो रहा था, मानवीय त्रुटि क्षम्य योग्य है। एकलपीठ ने पुनः विचार करने के निर्देश केन्द्र गृह विभाग को दिए हैं।
याचिकाकर्ता सुधीर कुमार पांडे की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उसने केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल के लिए आवेदन किया था। आवेदन फॉर्म में उसने गलती से एक कॉलम में गृह जिला रीवा लिख दिया था। वह सीधी जिले का निवासी था और दूसरे कॉलम में उसने अपना गृह जिला सही लिखा था। कटऑफ से अधिक अंक मिलने के बावजूद भी इस त्रृटि के कारण उसे अयोग्य मान लिया गया।
एकलपीठ ने माना कि इस त्रुटि से याचिकाकर्ता को कोई फायदा नहीं था और यह एक मानवीय भूल थी। याचिककर्ता को कटऑफ से भी अधिक अंक मिले थे। एकलपीठ ने उपरोक्त भूल को क्षम्य बताते हुए अनावेदकों को पुनः आदेश पारित करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता एनएस रूपराह ने पैरवी की।
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याचिकाकर्ता सुधीर कुमार पांडे की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उसने केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल के लिए आवेदन किया था। आवेदन फॉर्म में उसने गलती से एक कॉलम में गृह जिला रीवा लिख दिया था। वह सीधी जिले का निवासी था और दूसरे कॉलम में उसने अपना गृह जिला सही लिखा था। कटऑफ से अधिक अंक मिलने के बावजूद भी इस त्रृटि के कारण उसे अयोग्य मान लिया गया।
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एकलपीठ ने माना कि इस त्रुटि से याचिकाकर्ता को कोई फायदा नहीं था और यह एक मानवीय भूल थी। याचिककर्ता को कटऑफ से भी अधिक अंक मिले थे। एकलपीठ ने उपरोक्त भूल को क्षम्य बताते हुए अनावेदकों को पुनः आदेश पारित करने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता एनएस रूपराह ने पैरवी की।
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