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Jabalpur News: हत्या मामले में हाईकोर्ट की अहम टिप्पणी, शक सबूत की जगह नहीं ले सकता, दो आरोपियों को किया बरी

Wed, 24 Jun 2026 07:26 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 24 Jun 2026 07:26 PM IST
सार

हत्या के एक मामले में जिला अदालत के फैसले को पलटते हुए हाईकोर्ट ने दो आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं थे और केवल संभावना के आधार पर दोष तय नहीं किया जा सकता।

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Jabalpur News: High Court Says Suspicion Cannot Replace Evidence, Acquits Two Accused in Murder Case
मप्र हाईकोर्ट

विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की युगलपीठ ने हत्या के एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि कानून का स्थापित सिद्धांत है कि सजा जितनी कठोर होगी, उसके समर्थन में सबूत भी उतने ही पुख्ता होने चाहिए। दोषसिद्धि केवल अनुमान, अटकल या शक के आधार पर नहीं की जा सकती। अदालत ने स्पष्ट किया कि शक चाहे कितना भी गहरा क्यों न हो, वह सबूत का स्थान नहीं ले सकता। मप्र हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति ए.के. सिंह की युगलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए जिला न्यायालय द्वारा सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को निरस्त कर दोनों अपीलकर्ताओं को दोषमुक्त कर दिया।

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मामला पन्ना जिले के प्रेम नारायण उर्फ अंगद और परमानंद उर्फ सिक्की से जुड़ा था। दोनों ने हत्या के मामले में जिला न्यायालय द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील में कहा गया था कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ सबूतों की पूरी शृंखला स्थापित करने में असफल रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि मृतक जमुना प्रसाद पटेल और दोनों अपीलकर्ताओं के खेत आपस में सटे हुए थे तथा वे अक्सर साथ खेतों पर जाते थे। घटना वाले दिन भी तीनों एक साथ खेत गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शराब के नशे में होने की पुष्टि हुई थी। साथ ही पुलिस द्वारा कथित हथियार के रूप में जब्त किए गए पत्थर पर खून के कोई निशान नहीं मिले, बल्कि उस पर केवल मिट्टी पाई गई।
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युगलपीठ ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मृत्यु चोट लगने से हुई थी लेकिन उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि चोट आरोपियों ने ही पहुंचाई थी। अदालत ने कहा कि केवल संभावना के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। दोष सिद्ध करने के लिए ऐसी साक्ष्य शृंखला आवश्यक है, जो किसी अन्य संभावना को पूरी तरह समाप्त कर दे।

अदालत ने यह भी माना कि इस मामले में आखिरी बार साथ देखे जाने का सिद्धांत लागू नहीं होता, क्योंकि मृतक और अपीलकर्ता नियमित रूप से एक साथ खेतों पर जाते थे। ऐसे में केवल इस आधार पर उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कसौटी पर मामला खरा नहीं उतरने और पर्याप्त प्रमाणों के अभाव में हाईकोर्ट ने जिला न्यायालय का दोषसिद्धि आदेश निरस्त करते हुए दोनों अपीलकर्ताओं को बरी कर दिया।

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