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Jabalpur: महिला मौत मामले में आरोपियों को राहत, हाईकोर्ट ने कहा- आत्महत्या की संभावना से इनकार नहीं

Tue, 30 Jun 2026 08:13 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 30 Jun 2026 08:13 PM IST
सार

जबलपुर हाईकोर्ट ने महिला की हत्या के मामले में ससुर, पति और देवर को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डॉक्टर और गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाया। मृतका के शरीर पर चोट के निशान नहीं थे, जिससे आत्महत्या की संभावना भी जताई गई।

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The doctor who conducted the post-mortem indicated that the incident could be a case of suicide
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महिला की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए ससुर, पति और देवर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डॉक्टर के बयान और अन्य गवाहों के बयानों में विरोधाभास पाते हुए तीनों आरोपियों की दोषसिद्धि और सजा निरस्त कर उन्हें दोषमुक्त कर दिया। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस ए. के. सिंह की युगलपीठ ने सजा के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया।

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मामला सागर जिले के बांदा क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार प्रताप सिंह, उनके बेटे छतर सिंह लोधी और लक्खू उर्फ लखन सिंह पर छतर सिंह की पत्नी भारती सिंह पर केरोसिन डालकर आग लगाने का आरोप था। निचली अदालत ने तीनों को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की।

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सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डॉक्टर के बयान और अन्य गवाहों की गवाही में गंभीर विरोधाभास हैं। युगलपीठ ने पाया कि मृतका के पिता ने एक बयान में कहा था कि उनकी बेटी ने स्वयं आग लगाई, जबकि दूसरे बयान में आरोपियों पर आग लगाने का आरोप लगाया। वहीं पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने भी स्वीकार किया कि मृतका के शरीर पर चोट के निशान नहीं थे और ऐसी स्थिति में आत्महत्या की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

इन तथ्यों और साक्ष्यों में विरोधाभास को देखते हुए हाईकोर्ट ने अभियोजन का मामला संदेह से परे सिद्ध नहीं माना और तीनों आरोपियों की दोषसिद्धि व आजीवन कारावास की सजा निरस्त करते हुए उन्हें दोषमुक्त कर दिया।

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