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MP High Court: 'TI सहित कई पुलिस पर प्रकरण दर्जकर पदस्थ स्टॉफ का नौ सौ किमी स्थानांतरण करें,' जानें पूरा मामला

Sat, 19 Oct 2024 09:51 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Sat, 19 Oct 2024 09:51 PM IST
सार

घटना दिनांक के दौरान थाने में पदस्थ समस्त स्टॉफ का स्थानांतरण नौ सौ किलोमीटर दूर किया जाए, जिससे वह आपस में तालमेल कर कोई साजिश नहीं रच सके।

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MP High Court Register a case against many police including TI and transfer posted staff 900 kms
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रिश्वत की मांग पूरी नहीं होने पर मोजर बेयर कंपनी के सुपरवाइजर को थाने लाकर बेहरमी से पीटने तथा उसके खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज किए जाने को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने अपने आदेश में पुलिस महानिदेशक को निर्देशित किया है कि थाना प्रभारी सहित आधा दर्जन दोषी पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। इसके अलावा घटना दिनांक के दौरान थाने में पदस्थ समस्त स्टॉफ का स्थानांतरण नौ सौ किलोमीटर दूर किया जाए, जिससे वह आपस में तालमेल कर कोई साजिश नहीं रच सके। एकलपीठ ने यह भी आदेश जारी किए हैं कि प्रदेश के सभी थानों के कमरों में 18 फरवरी तक सीसीटीवी कैमरा लग जाना चाहिए। सीसीटीवी कैमरा कमरे को पूरी तरह कवर करें।

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अनूपपुर निवासी याचिकाकर्ता अखिलेश पांडे की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि वह मोजर बेयर कंपनी में सुपरवाइजर के पद पदस्थ था। थाना भालूमाड़ा में पदस्थ हवलदार मकसुदन ने रोके गए ट्रकों को छोड़ने की एवज में पांच हजार रुपये मांगे थे। इस बात पर दोनों में विवाद हो गया। विवाद के बाद पुलिसकर्मी उसे थाने में ले गए और बेरहमी के साथ मारपीट की। पुलिस कर्मियों ने उसके साथ इतनी मारपीट की थी कि वह चलने लायक स्थिति तक में नहीं था। इतना ही नहीं पुलिस कर्मियों ने खुद के कपड़े फाड़कर उसके खिलाफ झूठी प्रकरण भी कर लिया। उसके सूचना के अधिकार के तहत घटना दिनांक की थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज मांगी थी।
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याचिका में कहा गया था कि फुटेज से स्पष्ट है कि पुलिसकर्मियों ने खुद के कपड़े फाड़े थे और उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। इतना ही नहीं पुलिस कर्मी कह रहे थे कि सोने की चेन लूटने का आरोप लगाते हुए लूट का प्रकरण दर्ज किया जाए। डॉक्टर से भी चोट आने का लिखवाने के लिए बोल रहे थे। शिकायत पर एसडीओपी ने प्रकरण की जांच की तो उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निराधार पाया था।
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एकलपीठ ने याचिका में लगाए गए आरोप तथा सीसीटीवी फुटेज को गंभीरता से लेते हुए अपने आदेश में कहा है कि जिस कमरे में याचिकाकर्ता को रखा गया था पुलिसकर्मी कमरे में डंडा लेकर गए थे। इस संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर पाए हैं। थाना प्रभारी आरके डेहरिया एएसआई प्रभाकर पटैल, हर्ष पटेल, स्वेदश सिंह, एके तिवारी तथा मुखसुदन सिंह ने सरकारी दस्तावेजों के साथ हेर-फेर की। इसके अलावा याचिकाकर्ता के साथ अत्याचार किया। एकलपीठ ने पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया है कि उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाए। इसके अलावा घटना दिनांक के दिन थाने में पदस्थ स्टॉफ का दस दिनों में 900 किलोमीटर दूर स्थानांतरण किया जाए, जिस डॉक्टर ने पुलिसकर्मियों को चोट आने की रिपोर्ट तैयार की थी। उसके खिलाफ विभागीय जांच की जाए। इसके लिए डीजीपी संबंधित अधिकारियों को संपर्क करें।


एकलपीठ ने डीजीपी को निर्देशित किया है कि 18 फरवरी तक प्रदेश के सभी थाने में कमरे में सीसीटीवी कैमरा होना चाहिए। सीसीटीवी कैमरे कमरे को पूरी तरह से कवर करें। एकलपीठ ने थाना प्रभारी सहित अन्य दोषियों पर एक लाख 20 हजार रुपये की कॉस्ट भी लगाई है। पोस्ट की राशि याचिकाकर्ता को प्रदान करने के निर्देश जारी किए गए हैं। एकलपीठ ने आदेश की प्रति डीजीपी को भेजने के भी निर्देश दिए हैं। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि आदेश का परिपालन नहीं होने पर न्यायालय के अवमानना की कार्यवाही की जाएगी। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अभिषेक पांडेय ने पैरवी की।   

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