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जबलपुर: पांच साल में कैडर रिव्यू अनिवार्य, हाईकोर्ट ने केंद्र की याचिका खारिज की; कैट के आदेश को बताया उचित

Thu, 08 Oct 2026 05:30 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Thu, 08 Oct 2026 05:30 PM IST
सार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने आईपीएस कैडर रिव्यू को 120 दिनों में पूरा करने के केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी। युगलपीठ ने कैट के आदेश को उचित माना और केंद्र के तर्क से असहमति जताई।

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Path cleared for State Police Service officers to become IPS officers.
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) द्वारा 120 दिनों में आईपीएस कैडर रिव्यू करने के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार की याचिका को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद कैट के आदेश को उचित ठहराया।

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केंद्र सरकार की ओर से दायर याचिका में कैट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया था कि कैडर रिव्यू की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से की जाती रही है और इसमें किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं हुई है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने केंद्र सरकार के तर्क से असहमति जताते हुए याचिका खारिज कर दी।

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गौरतलब है कि भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियम, 1954 के तहत कैडर रिव्यू की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से किए जाने की मांग को लेकर मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में आवेदन दायर किया गया था। आवेदन में कहा गया था कि प्रत्येक पांच साल में कैडर रिव्यू किया जाना अनिवार्य है, लेकिन पिछले दो दशकों से इस प्रक्रिया में लगातार विलंब हो रहा है।

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आवेदन में यह भी कहा गया था कि कैडर रिव्यू में लंबे समय तक होने वाली देरी के कारण राज्य पुलिस सेवा के कई पात्र अधिकारी पदोन्नति और आईपीएस इंडक्शन के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं। यदि देरी जारी रही तो कई अधिकारी 56 वर्ष की आयु सीमा पार कर जाएंगे और उन्हें आईपीएस इंडक्शन का अवसर हमेशा के लिए खोना पड़ेगा।

केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने 9 जनवरी 2026 को पारित अपने आदेश में कहा था कि पांच वर्ष में कैडर रिव्यू करना सरकारों का स्पष्ट दायित्व है। ट्रिब्यूनल ने माना था कि इस तरह की देरी से संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत प्राप्त समानता और पदोन्नति के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं। इसे अधिकारियों के भविष्य से खिलवाड़ बताते हुए कैट ने 120 दिनों में आईपीएस कैडर रिव्यू करने के आदेश दिए थे।

केंद्र सरकार ने कैट के इसी आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद याचिका खारिज कर दी। केंद्र सरकार की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे और आदित्य खंडेलवाल ने पैरवी की।

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