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MP LS Chunav: महाकौशल किसके साथ? कल जबलपुर में पीएम मोदी की रैली के लिए तैयार है मेगा प्लान, ये है चुनावी गणित

Sat, 06 Apr 2024 07:26 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल/जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल/जबलपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Sat, 06 Apr 2024 07:26 PM IST
सार

MP Lok Sabha Chunav: कल यानी सात अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जबलपुर में एक बड़ा रोड शो करने आ रहे हैं। दरअसल, कांग्रेस को एक बड़ा झटका तभी लगा था, जब कांग्रेस के कद्दावर नेता और जबलपुर महापौर जगत बहादुर अनु कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आ गए थे।

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MP Lok Sabha Chunav Mega plan ready for PM Modi rally in Jabalpur know election mathematics
पीएम नरेंद्र मोदी और पूर्व सीएम कमलनाथ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रविवार (सात अप्रैल) शाम पीएम नरेंद्र मोदी जबलपुर जिले में आ रहे हैं। पहले तंग गलियों वाली सड़कों पर पीएम मोदी का रोड शो होने वाला था। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने आपत्ति दर्ज की और रोड शो का रूट बदल दिया गया। बीजेपी का मजबूत गढ़ होने के बाद भी पीएम मोदी आखिर जबलपुर या महाकौशल से ही क्यों चुनाव अभियान की शुरुआत करना चाहते हैं, आइए समझते हैं...

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बता दें कि महाकौशल क्षेत्र में आने वाली 38 विधानसभा सीटों में से 21 बीजेपी और 17 कांग्रेस के खाते में हैं। महाकौशल क्षेत्र में चार लोकसभा सीटें हैं, सात विधानसभा सीटें दूसरे लोकसभा क्षेत्र में आती हैं। लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों में 17 पर कांग्रेस और 14 पर बीजेपी का कब्जा है।
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वहीं, जबलपुर लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें से सात पर बीजेपी और एक पर कांग्रेस का कब्जा है। इस सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। साल 1996 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने अंतिम बार इस सीट पर जीत हासिल की थी। इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस ने नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा है। बीजेपी से आशीष दुबे और कांग्रेस से दिनेश यादव उम्मीदवार बनाए गए हैं।
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मंडला आदिवासी बाहुलय क्षेत्र
आदिवासी बाहुल्य मंडला लोकसभा सीट में आठ विधानसभा आती हैं। यह लोकसभा सीट चार जिलों में फैली हुई हैं। डिंडोरी जिले के अंतर्गत आने वाली दो विधानसभा सीटों में से एक-एक पर भाजपा और कांग्रेस का कब्जा है। मंडला जिले के अंतर्गत आने वाली तीन विधानसभा सीटों में से दो कांग्रेस और एक भाजपा के पास है।



सिवनी जिले की चार विधानसभा सीटों में से दो सीटें मंडला लोकसभा में आती हैं, जिन पर कांग्रेस का कब्जा है। नरसिंहपुर की गोटेगांव विधानसभा सीट भी इस लोकसभा क्षेत्र में आती है, जिस पर भाजपा का कब्जा है। भाजपा ने यहां एक बार फिर केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते पर दांव लगा है। कुलस्ते को पिछले विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस ने यह सीट 2009 में जीती थी।

छिंदवाड़ा कमलनाथ का गढ़
छिंदवाड़ा लोकसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ का गढ़ मानी जाती है। लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस सिर्फ छिंदवाड़ा सीट ही जीत पाई थी। पिछले विधानसभा चुनाव में इस सीट के अंतर्गत आने वालीं सात सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी। हालांकि, अमरवाड़ा विधानसभा सीट से जीत हासिल करने वाले कांग्रेस विधायक कमलेश शाह ने बीजेपी का दामन थाम लिया है। छिंदवाड़ा सीट पर कांग्रेस ने वर्तमान सांसद नकुलनाथ को चुनाव में उतारा है, जो भाजपा के बंटी साहू को टक्कर देंगे।

बालाघाट में ऐसा है समीकरण
बालाघाट लोकसभा सीट में जिले की छह और सिवनी की दो विधानसभा सीटें आती हैं। सिवनी जिले की दोनों विधानसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है। बालाघाट जिले की छह विधानसभा सीटों में से चार कांग्रेस और दो बीजेपी के पास हैं। इस सीट पर कांग्रेस ने सम्राट सारस्वत और बीजेपी ने भारती पारधी को चुनावी मैदान में उतारा है। एक दूसरे को टक्कर देने वाले दोनों ही नए उम्मीदवार हैं।

महाकौशल क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नरसिंहपुर जिले की चार विधानसभा सीटों में से तीन सीटें होशंगाबाद लोकसभा सीट का हिस्सा है। कटनी जिले की तीन विधानसभा खजुराहो और शहडोल लोकसभा सीट का हिस्सा है। इस सातों सीटों पर भाजपा का कब्जा है।

कांग्रेस को लगा यहां 'सूखा रोग'
जबलपुर लोकसभा सीट को कांग्रेस बीते 28 साल से नहीं जीत सकी है। उससे पहले भी कांग्रेस को बीजेपी और अन्य दल कड़ी चुनौती देते आए हैं। लेकिन बीते 28 साल से तो कांग्रेस यहां दोहरा वनवास झेल रही है। वहीं, बीजेपी ने मजबूत स्थिति में होने के बावजूद ग्राउंड पर आक्रामक प्रचार की रणनीति पर फोकस किया है, जिसके तहत आगामी सात अप्रैल को खुद पीएम नरेंद्र मोदी जबलपुर में एक बड़ा रोड शो करने आ रहे हैं।


रोड शो से बढ़ सकती है कांग्रेस की चिंता
पीएम मोदी के इस रोड शो से पहले से ही कमजोर नजर आ रही कांग्रेस की चिंता बढ़ सकती है। कांग्रेस को बड़ा झटका तभी लग गया था, जब कांग्रेस के कद्दावर नेता और जबलपुर महापौर जगत बहादुर अनु कांग्रेस को छोड़कर बीजेपी में चले गए थे। जबकि कांग्रेस पार्टी में उनको लोकसभा चुनाव लड़ाने की पूरी तैयारी कर ली गई थी। लेकिन ऐन मौके पर उन्होंने कांग्रेस को ही छोड़ दिया, जिसके बाद कांग्रेस को उम्मीदवार को तलाश करने में खासा माथा-पच्ची करना पड़ी है। 

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