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MP High Court: बिना अधिकार एसडीएम ने मस्जिद निर्माण में लगा दी रोक, हाईकोर्ट ने कहा- सुनवाई का अवसर तो दें
Sun, 26 Jun 2022 06:11 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 26 Jun 2022 06:11 PM IST
सार
याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सार्वजनिक धार्मिक भवन तथा स्थान विनियमन अधिनियम 1984 के तहत सिर्फ जिला कलेक्टर को रोक लगाने का अधिकार है।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
निजी जमीन पर मस्जिद निर्माण पर एसडीएम द्वारा लगाई गई रोक के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सार्वजनिक धार्मिक भवन तथा स्थान विनियमन अधिनियम 1984 के तहत सिर्फ जिला कलेक्टर को रोक लगाने का अधिकार है। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए एसडीएम को निर्देशित किया है कि लंबित प्रकरणों में याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर प्रदान करें। प्रकरण के संबंध में जिला कलेक्टर के समक्ष रिपोर्ट पेश करें।
बता दें कि औलिया अहल-ए-सुन्नत समिति के अध्यक्ष फिरोज खान की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि सिवनी जिले के केवलारी में निजी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया जा रहा है। उक्त भूमि का भू अधिकार पत्र कलेक्टर द्वारा उनके पक्ष में विधिवत जारी किया गया था। मस्जिद निर्माण में आपत्ति करते हुए अलग-अलग आपत्तियां एसडीएम के समक्ष पेश की गई थीं। एसडीएम केवलारी ने आपत्तियों पर विचार करते हुए मस्जिद निर्माण पर रोक लगा दी है।
याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सार्वजनिक धार्मिक भवन तथा स्थान विनियमन अधिनियम 1984 के तहत कलेक्टर के पास निर्माण कार्य को रोकने का अधिकार है। याचिका का निराकरण करते हुए एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अमानउल्ला उस्मानी ने पैरवी की।
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बता दें कि औलिया अहल-ए-सुन्नत समिति के अध्यक्ष फिरोज खान की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि सिवनी जिले के केवलारी में निजी जमीन पर मस्जिद का निर्माण किया जा रहा है। उक्त भूमि का भू अधिकार पत्र कलेक्टर द्वारा उनके पक्ष में विधिवत जारी किया गया था। मस्जिद निर्माण में आपत्ति करते हुए अलग-अलग आपत्तियां एसडीएम के समक्ष पेश की गई थीं। एसडीएम केवलारी ने आपत्तियों पर विचार करते हुए मस्जिद निर्माण पर रोक लगा दी है।
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याचिका में कहा गया था कि प्रदेश सार्वजनिक धार्मिक भवन तथा स्थान विनियमन अधिनियम 1984 के तहत कलेक्टर के पास निर्माण कार्य को रोकने का अधिकार है। याचिका का निराकरण करते हुए एकलपीठ ने उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अमानउल्ला उस्मानी ने पैरवी की।
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