फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   MP High Court: The same person is the principal of 10 nursing colleges located hundreds of kilometers away, 38 thousand pages missing in the data presented in the High Court

MP High Court: एक ही व्यक्ति सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित 10 नर्सिंग कॉलेजों का प्राचार्य, हाईकोर्ट में पेश डेटा में 38 हजार पेज गायब

Thu, 07 Jul 2022 08:41 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 07 Jul 2022 08:41 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज की मान्यता संबंधित सुनवाई जारी है। कोर्ट में जमा किए दस्तावेजों की जांच में पता चला है कि एक ही व्यक्ति सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित कई नर्सिंग कॉलेज को प्राचार्य है। वहीं कोर्ट में पेश किए गए डेटा में लगभग 38 हजार पेश गायब हैं।

विज्ञापन
MP High Court: The same person is the principal of 10 nursing colleges located hundreds of kilometers away, 38 thousand pages missing in the data presented in the High Court
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्य प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज की मान्यता संबंधित डेटा का परीक्षण करने के बाद याचिकाकर्ता की तरफ से हाईकोर्ट को बताया गया कि एक ही व्यक्ति सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित कई नर्सिंग कॉलेज को प्राचार्य है। इसके अलावा एक ही समय में शिक्षक भी सैकड़ों किलोमीटर दूर स्थित कई कॉलेज में पढ़ा रहे हैं। इधर हाईकोर्ट में पेश किए गए 453 नर्सिंग कॉलेज के डेटा में लगभग 38 हजार पेश गायब हैं।
विज्ञापन


हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त करते हुए फर्जी तरीके से संचालित नर्सिंग कॉलेज पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। युगलपीठ ने कहा है कि कार्रवाई नहीं करने की स्थिति में हाईकोर्ट सख्त एक्शन लेगा।
विज्ञापन


लॉ स्टूडेंट्स एसोशिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि शैक्षणिक सत्र 2000-21 में प्रदेश के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में 55 नर्सिंग कॉलेज को मान्यता दी गई थी। मप्र नर्सिंग रजिस्ट्रेशन कौंसिल ने निरीक्षण के बाद इन कॉलजों की मान्यता दी थी। वास्तविकता में ये कॉलेज सिर्फ कागज में संचालित हो रहे हैं। ऐसा कोई कॉलेज नहीं है जो निर्धारिण मापदंड पूरा करता है। अधिकांश कॉलेज की निर्धारित स्थल में बिल्डिंग तक नहीं है। कुछ कॉलेज सिर्फ चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे कॉलेज में प्रयोगशाला सहित अन्य आवश्यक संरचना नहीं है। बिना छात्रावास ही कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


नर्सिंग कॉलेज को फर्जी तरीके से मान्यता दिए जाने के आरोप में मप्र नर्सिंग रजिस्टेशन कौंसिल के रजिस्टार को पद से हटा दिया गया था। फर्जी नर्सिंग कॉलेज संचालित होने के संबंध में उन्होंने शिकायत की थी। शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गयी है। याचिका में साथ ऐसे कॉलेज की सूची पर फोटो प्रस्तुत किए गए थे। याचिका में कहा गया था कि जब कॉलेज ही नहीं है तो छात्रों को कैसे पढ़ाया जाता होगा। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने प्रदेशके सभी नर्सिंग कॉलेजों की निरीक्षण रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट के निर्देष पर प्रदेश के 453 नर्सिंग कॉलेज के मान्यता संबंधित ओरिजनल दस्तावेज पेश किए गए थे। युगलपीठ ने याचिकाकर्ता को दस्तावेज के निरीक्षण की अनुमति प्रदान की थी।


याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के युगलपीठ को बताया गया कि किस कॉलेज के कितने पेज के दस्तावेज हैं, साथ ही उनमें क्या उल्लेख किया जाता है। हाईकोर्ट में पेश किए गए 453 नर्सिंग कॉलेज के दस्तावेजों में 37759 पेज गायब हैं। 80 कॉलेज ऐसे हैं, जिसमें एक व्यक्ति उसकी समय में कई स्थानों में काम कर रखा है। दस कॉलेज में एक ही व्यक्ति एक समय में प्राचार्य था और उन कॉलेजों के बीच की दूरी सैकड़ों किलोमीटर थी। टीचिंग स्टाफ भी एक समय में पांच-पांच कॉलेज में एक ही समय में सेवा दे रहा था। सरकार की तरफ से जांच का आश्वासन देने पर युगलपीठ ने नाराजगी व्यक्त की। युगलपीठ ने सरकार को निर्देश किया है कि दस्तावेज के आधार पर कार्रवाई करे, अन्यथा हाईकोर्ट को सख्त एक्शन लेना होगा। याचिका पर अगली सुनवाई 11 जुलाई को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आलोक बागरेजा ने पैरवी की।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed