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MP High Court: लालटेन घोटाले में सेवानिवृत्त असिस्टेंट इंजीनियर को नहीं मिली राहत, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Wed, 27 Dec 2023 09:00 PM IST
दिनेश शर्मा अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Wed, 27 Dec 2023 09:00 PM IST
सार

सेवानिवृत्त असिस्टेंट इंजीनियर यूएस अरोरा की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि साल 1996 में वह ऊर्जा विभाग में सहायक यंत्री थे। इस दौरान लालटेन खरीदी का टेंडर हुआ था। निविदा आमंत्रित करने, जांच करने या भुगतान करने का उसके पास कोई अधिकार नहीं था। 

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MP High Court: Retired assistant engineer did not get relief in lantern scam, High Court rejected the petition
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लालटेन घोटाले में लोकायुक्त द्वारा दर्ज एफआईआर तथा न्यायालय द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम एक्ट के तहत तय आरोप को निरस्त करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस हृद्येश ने पाया कि जांच एजेंसी को मिली नोटशीट में याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर थे, जिसमें लालटेन की संख्या के संबंध में गलत जानकारी थी।
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सेवानिवृत्त असिस्टेंट इंजीनियर यूएस अरोरा की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि साल 1996 में वह ऊर्जा विभाग में सहायक यंत्री थे। इस दौरान लालटेन खरीदी का टेंडर हुआ था। निविदा आमंत्रित करने, जांच करने या भुगतान करने का उसके पास कोई अधिकार नहीं था। खरीदी में हुई अनियमितताओं की जांच करने के बाद लोकायुक्त ने साल 2005 में दर्ज प्रकरण में उन्हें आरोपी बना लिया। न्यायालय ने मामले को संज्ञान लेते हुए साल 2010 में पीसी एक्ट की धारा 13 तथा आईपीसी की धारा 120 चार्ज फ्रेम कर दिया।
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याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि पीसी एक्ट में संशोधन कर धारा 13 को समाप्त कर दिया गया है। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि विभाग को एक हजार लालटेन प्राप्त होने की नोटशीट में याचिकाकर्ता के हस्ताक्षर है। विभाग को वास्तविकता में एक हजार लालटेन प्राप्त हुई हुई थी। पीसी एक्ट में संशोधन 2018 में हुआ है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को खारिज कर दिया।
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