फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   mp high court: Instead of three months, 6 years have passed, not given appointment,

Jabalpur: तीन महीने की बजाय गुजर गए 6 साल; नहीं दी नियुक्ति, दस्तावेज नहीं लौटाने पर डॉक्टर की याचिका पर नोटिस

Mon, 08 May 2023 08:10 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: दिनेश शर्मा Updated Mon, 08 May 2023 08:10 PM IST
सार

याचिका में कहा गया था कि कोर्स उत्तीर्ण करने के तीन माह की समय अवधि में उसे नियुक्ति प्रदान करनी थी। तीन माह की बजाय 6 साल से अधिक का समय गुजर गया है, परंतु अभी तक उसे नियुक्ति प्रदान नहीं की गई है। कॉलेज में उसकी मार्कशीट सहित अन्य दस्तावेज हैं, जो वापस नहीं लौटाए जा रहे हैं।

विज्ञापन
mp high court: Instead of three months, 6 years have passed, not given appointment,
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेडिकल पीजी कोर्स करने के बाद तीन माह में नियुक्ति देना थी। तीन माह की बजाय 6 साल का समय गुजर गया है, परंतु नियुक्ति नहीं दी गई। बांड भरने के कारण उसके शिक्षा संबंधित दस्तावेज भी नहीं लौटाए जा रहे है। डॉक्टर की याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
विज्ञापन


डॉ. भीमराव रूप सिंह पवार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसने इन सर्विस कैटेगरी में पीजी मेडिकल कोर्स में दाखिला लिया था। पीजी मेडिकल कोर्स में दाखिले के दौरान दस लाख रुपये का एक बांड भरवाया गया था। बांड की शर्त अनुसार कोर्स पूरा करने के बाद उसे एक साल तक ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएं देने थीं। उसने पीसीजी कोर्स अप्रैल 2017 में उत्तीर्ण कर लिया था।
विज्ञापन


याचिका में कहा गया था कि कोर्स उत्तीर्ण करने के तीन माह की समय अवधि में उसे नियुक्ति प्रदान करनी थी। तीन माह की बजाय 6 साल से अधिक का समय गुजर गया है, परंतु अभी तक उसे नियुक्ति प्रदान नहीं की गई है। कॉलेज में उसकी मार्कशीट सहित अन्य दस्तावेज हैं, जो वापस नहीं लौटाए जा रहे हैं। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता आदित्य संघी ने युगलपीठ को बताया कि शिक्षा संबंधित दस्तावेज छात्र की पूंजी होती है। निर्धारित समय अवधि में नियुक्ति नहीं देना शासन की गलती है। अभ्यावेदन देने के बावजूद भी याचिकाकर्ता के दस्तावेज नहीं लौटाए जा रहे हैं। याचिका में प्रमुख सचिव, संचालक व आयुक्त चिकित्सा शिक्षा विभाग को अनावेदक बनाया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed