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MP High Court: वृक्ष काटने की अनुमति का अधिकार ग्राम पंचायत को, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर मांगा जवाब
Mon, 01 Apr 2024 08:05 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Mon, 01 Apr 2024 08:05 PM IST
सार
MP High Court: वृक्ष काटने की अनुमति का अधिकार ग्राम पंचायत को है। इस मामले पर जबलपुर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
निजी जमीन में लगे पेड़ को काटने की अनुमति देने का अधिकार ग्राम पंचायत को दिए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि निजी जमीन में लगे पेड़ काटने की अनुमति देने का अधिकार तहसीलदार से वापस लेकर ग्राम पंचायत को दिया जाना अवैधानिक है। हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
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याचिकाकर्ता डाॅ. पीजी नाजपांडे की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता नियम 2020 में संशोधन किया गया है। संशोधित नियम में निजी भूमि में लगे पेड़ों के काटने की अनुमति देने का अधिकार तहसीलदार से वापस लेकर ग्राम पंचायत को दिये गये हैं, जो अवैधानिक व अवैध है। कार्यपालक दंडाधिकारी के अधिकार जनता के चुने हुए पदाधिकारियों को दिया जाना भू-राजस्व संहिता तथा संविधान की मंशा के विपरीत है। जनता के चुने हुए व्यक्ति से निष्पक्ष व्यवहार की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। उसका प्रत्यक्ष रूप से ग्राम के प्रत्येक व्यक्तियों से हित रहता है।
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याचिका में सूचना का अधिकार के तहत प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए बताया गया कि चार ग्राम पंचायत ने एक सप्ताह में 1700 वृक्ष काटने की अनुमति प्रदान की है। जो पर्यावरण के लिए उचित नहीं है। याचिका में राजस्व विभाग को अनावेदक बनाया गया है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद अनावेदक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।
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