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MP Election: विधायक प्रत्याशी के जिला बदर के आदेश पर रोक, हाईकोर्ट ने 20 नवंबर तक अपील पेश करने की दी छूट
Fri, 10 Nov 2023 11:59 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Fri, 10 Nov 2023 11:59 AM IST
सार
MP Election 2023: रीवा के त्यौंथर विधानसभा सीट से विंध्य पार्टी के प्रत्याशी अरुण कुमार गौतम के खिलाफ जारी जिला बदर के आदेश पर 20 नवंबर तक रोक लगा दी।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मप्र हाईकोर्ट ने रीवा के त्यौंथर विधानसभा सीट से विंध्य पार्टी के प्रत्याशी अरुण कुमार गौतम के खिलाफ जारी जिला बदर के आदेश पर 20 नवंबर तक रोक लगा दी। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने याचिकाकर्ता को 20 नवंबर के बाद जिला दंडाधिकारी के आदेश के खिलाफ अपील पेश करने की स्वतंत्रता दी है।
एकलपीठ ने संभागायुक्त को अपील पर सुनवाई के बाद निराकरण करने के निर्देश दिये हैं। रीवा निवासी अरुण गौतम की ओर से यह मामला दायर किया गया है। जिसमें आरोप है जिला दंडाधिकारी सत्ताधारी दल के पक्ष में काम कर रहे हैं और प्रत्याशी को चुनाव लडऩे से रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
आवेदक की ओर से बताया गया कि कई साल पुराने मामले में पुलिस अधीक्षक ने 19 अक्टूबर को कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपी। जिला दंडाधिकारी ने 26 अक्टूबर को याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता 3 नवंबर को जिला दंडाधिकारी की कोर्ट में हाजिर हुए और आपत्ति प्रस्तुत की। इससे पहले उन्होंने पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट मांगी, जो उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं, शासन की ओर से बताया गया कि 7 नवंबर को जिला बदर का आदेश जारी किया गया। जिस पर न्यायालय ने रिकॉर्ड मांगा तो कहा गया कि रिकार्ड बुलवाना पड़ेगा। जिस पर न्यायालय ने जिला बदर के आदेश पर रोक लगा दी।
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एकलपीठ ने संभागायुक्त को अपील पर सुनवाई के बाद निराकरण करने के निर्देश दिये हैं। रीवा निवासी अरुण गौतम की ओर से यह मामला दायर किया गया है। जिसमें आरोप है जिला दंडाधिकारी सत्ताधारी दल के पक्ष में काम कर रहे हैं और प्रत्याशी को चुनाव लडऩे से रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
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आवेदक की ओर से बताया गया कि कई साल पुराने मामले में पुलिस अधीक्षक ने 19 अक्टूबर को कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपी। जिला दंडाधिकारी ने 26 अक्टूबर को याचिकाकर्ता को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता 3 नवंबर को जिला दंडाधिकारी की कोर्ट में हाजिर हुए और आपत्ति प्रस्तुत की। इससे पहले उन्होंने पुलिस अधीक्षक की रिपोर्ट मांगी, जो उन्हें उपलब्ध नहीं कराई गई। वहीं, शासन की ओर से बताया गया कि 7 नवंबर को जिला बदर का आदेश जारी किया गया। जिस पर न्यायालय ने रिकॉर्ड मांगा तो कहा गया कि रिकार्ड बुलवाना पड़ेगा। जिस पर न्यायालय ने जिला बदर के आदेश पर रोक लगा दी।
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