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Jabalpur: हिन्दू धर्म और योगी आदित्यनाथ के खिलाफ की थी आपत्तिजनक टिप्पणी, हाईकोर्ट ने कहा-नहीं होगी FIR निरस्त
Fri, 04 Oct 2024 06:44 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
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Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2024 06:44 PM IST
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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
भगवान राम, हिन्दू धर्म तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ इंस्टाग्राम में आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए धार्मिक भावना भड़काने के अपराध में दर्ज एफआईआर को निरस्त किए जाने के मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि एफआईआर के अनुसार विवादित पोस्ट पर जब शिकायतकर्ता ने आपत्ति की तो याचिकाकर्ता ने उसके साथ अपशब्दों को प्रयोग किया और जातिगत रूप से अपमानित किया था। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद दर्ज एफआईआर निरस्ति की मांग को इंकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
याचिकाकर्ता मोहम्मद बिलाल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि सतना जिले के कोतवाली थाने में सुजल वाल्मीकि की शिकायत पर पुलिस ने जांच के बाद उसके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने, अशांति उत्पन्न करने सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। याचिका में कहा गया था कि उसके मोबाइल को हैक कर 15 अगस्त 2023 को इंस्टाग्राम में दूसरे धर्म की भावनाओं को भड़काने वाली पोस्ट की गई थी। याचिका में राहत चाही गई थी कि पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए।
एकलपीठ ने दर्ज एफआईआर का अवलोकन करने पर पाया कि पोस्ट में भगवान राम, हिन्दू धर्म तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। शिकायतकर्ता जब आपत्तिजनक पोस्ट के संबंध में मो. बिलाल के बात करते पहुंचा तो उसने अपशब्दों को प्रयोग करते हुए जातिगत रूप से अपमानित किया। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता ने अपने बचाव में तर्क दिया था कि उसका मोबाइल हैक किया गया था। शिकायतकर्ता का एफआईआर में कहना है कि आपत्तिजनक पोस्ट पर बात करने पहुंचने पर याचिकाकर्ता ने उसके साथ अपशब्दों का प्रयोग करते हुए जातिगत रूप से अपमानित किया। न्यायालय एफआईआर की जांच नहीं कर रहा है, परंतु उसके तथ्यों के आधार पर उसे निरस्त नहीं किया जा सकता है।
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याचिकाकर्ता मोहम्मद बिलाल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि सतना जिले के कोतवाली थाने में सुजल वाल्मीकि की शिकायत पर पुलिस ने जांच के बाद उसके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को भड़काने, अशांति उत्पन्न करने सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। याचिका में कहा गया था कि उसके मोबाइल को हैक कर 15 अगस्त 2023 को इंस्टाग्राम में दूसरे धर्म की भावनाओं को भड़काने वाली पोस्ट की गई थी। याचिका में राहत चाही गई थी कि पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए।
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एकलपीठ ने दर्ज एफआईआर का अवलोकन करने पर पाया कि पोस्ट में भगवान राम, हिन्दू धर्म तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई है। शिकायतकर्ता जब आपत्तिजनक पोस्ट के संबंध में मो. बिलाल के बात करते पहुंचा तो उसने अपशब्दों को प्रयोग करते हुए जातिगत रूप से अपमानित किया। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता ने अपने बचाव में तर्क दिया था कि उसका मोबाइल हैक किया गया था। शिकायतकर्ता का एफआईआर में कहना है कि आपत्तिजनक पोस्ट पर बात करने पहुंचने पर याचिकाकर्ता ने उसके साथ अपशब्दों का प्रयोग करते हुए जातिगत रूप से अपमानित किया। न्यायालय एफआईआर की जांच नहीं कर रहा है, परंतु उसके तथ्यों के आधार पर उसे निरस्त नहीं किया जा सकता है।
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