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Jabalpur: एक अपराध की दो एफआईआर की दर्ज, हाईकोर्ट ने एक ट्रायल का निर्देश दिया
Sun, 03 Jul 2022 01:59 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Sun, 03 Jul 2022 01:59 PM IST
सार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक अपराधिक प्रकरण में दो एफआईआर दर्ज कर ट्रायल कोर्ट के समक्ष पृथक- पृथक अभियोजन पत्र दायर करने के खिलाफ याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू की एकलपीठ ने एक ही ट्रायल करने के निर्देश जारी किए हैं।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक अपराधिक प्रकरण में दो एफआईआर दर्ज कर ट्रायल कोर्ट के समक्ष पृथक- पृथक अभियोजन पत्र दायर करने के खिलाफ याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू की एकलपीठ ने एक ही ट्रायल करने के निर्देश जारी किए हैं। एकलपीठ ने दूसरी एफआईआर को प्रकरण में पूर्वक अभियोजक मानने के निर्देश दिए हैं।
होशंगाबाद निवासी कृष्ण कुमार रूसिया की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि वह एक आरटीआई कार्यकर्ता है। नगर निगम होशंगाबाद से गृह आवंटन के सम्बन्ध में उसने आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी, जिसके संबंध में समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित हुए थे। समाचार से आक्रोशित होकर स्थानीय दबंग नेता ने उन पर हमला कर दिया था। शिकायत पर पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ अजमानतीय मामला दर्ज किया था। याचिकाकर्ता के विरुद्ध भी राजनैतिक दबाववश एफआईआर दर्ज की गयी थी।
विचारण न्यायालय ने याचिकाकर्ता की एफआईआर के आरोपियों की जमानत निरस्त करते हुए तल्ख टिप्पणी की थी, कि पुलिस प्रशासन स्वयं न्यायालय बन गए हैं। न्यायालय की टिप्पणी के 4 दिन बाद पुरानी घटना पर 5 महीने बाद पुनः दूसरी एफआईआर दर्ज कर ली। इसके पूर्व उसी व्यक्ति ने सीएम ऑनलाइन में दूसरी एफआईआर दर्ज नहीं किये जाने के संबंध में एफआईआर दर्ज की थी,जो निरस्त कर दी गयी थी। एस पी और आईजी ने भी जांच में पाया था कि एक ही मामले में पुनः प्राथमिकी दर्ज की गयी है। जिस कारण से उन्होने जांच अधिकारी को दण्डित किया था। लोक अभियोजक ने भी मामले को खारिज करने की अनुशंसा की थी, लेकिन राजनैतिक दबाव के चलते याचिकाकर्ता के विरुद्ध दूसरी प्राथमिकी में अभियोग पत्र प्रस्तुत कर दिया गया, जो कि अनुच्छेद 21 का हनन है। याचिका का निराकरण करते हुए एकलपीठ ने एक ही ट्रायल का आदेश जारी किया।
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होशंगाबाद निवासी कृष्ण कुमार रूसिया की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि वह एक आरटीआई कार्यकर्ता है। नगर निगम होशंगाबाद से गृह आवंटन के सम्बन्ध में उसने आरटीआई के तहत सूचना मांगी थी, जिसके संबंध में समाचार पत्रों में समाचार प्रकाशित हुए थे। समाचार से आक्रोशित होकर स्थानीय दबंग नेता ने उन पर हमला कर दिया था। शिकायत पर पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ अजमानतीय मामला दर्ज किया था। याचिकाकर्ता के विरुद्ध भी राजनैतिक दबाववश एफआईआर दर्ज की गयी थी।
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विचारण न्यायालय ने याचिकाकर्ता की एफआईआर के आरोपियों की जमानत निरस्त करते हुए तल्ख टिप्पणी की थी, कि पुलिस प्रशासन स्वयं न्यायालय बन गए हैं। न्यायालय की टिप्पणी के 4 दिन बाद पुरानी घटना पर 5 महीने बाद पुनः दूसरी एफआईआर दर्ज कर ली। इसके पूर्व उसी व्यक्ति ने सीएम ऑनलाइन में दूसरी एफआईआर दर्ज नहीं किये जाने के संबंध में एफआईआर दर्ज की थी,जो निरस्त कर दी गयी थी। एस पी और आईजी ने भी जांच में पाया था कि एक ही मामले में पुनः प्राथमिकी दर्ज की गयी है। जिस कारण से उन्होने जांच अधिकारी को दण्डित किया था। लोक अभियोजक ने भी मामले को खारिज करने की अनुशंसा की थी, लेकिन राजनैतिक दबाव के चलते याचिकाकर्ता के विरुद्ध दूसरी प्राथमिकी में अभियोग पत्र प्रस्तुत कर दिया गया, जो कि अनुच्छेद 21 का हनन है। याचिका का निराकरण करते हुए एकलपीठ ने एक ही ट्रायल का आदेश जारी किया।
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