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Vijaya Dashami: 'मैं लंकेश...करता हूं रावण की भक्ति', बेटों के नाम मेघनाथ-अक्षय, MP के अनोखे भक्त की कहानी

Sat, 12 Oct 2024 06:10 PM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: उदित दीक्षित Updated Sat, 12 Oct 2024 06:10 PM IST
सार

Vijaya Dashami: संतोष नामदेव उर्फ लंकेश पिछले 49 साल से रावण की भक्ति कर रहे हैं। वे नवरात्रि की पंचमी तिथि पर रावण की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इस दौरान सुबह-शाम रावण की उपासना करते हैं। दशहरे पर रावण की प्रतिका का विसर्जन किया जाता है। इसके लिए धूमधाम से शोभायात्रा निकाली जाती है।

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Jabalpur Santosh Namdev Worships Ravana also known as Lankesh Full Story in Hindi
लंकेश के नाम से जाने जाते हैं संतोष नामदेव। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

Jabalpur Lankesh:  'मैं लंकेश हूं'... रामलीला में रावण का किरदार निभा रहे पात्र को यह कहते हुए आपने अक्सर सुना होगा। लेकिन, मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक सचमुच का लंकेश है। पेशे के टेलर संतोष नामदेव को लोग 'लंकेश' नाम से ही जानते हैं। लंकेश के दो बेटें हैं, जिनका नाम उन्होंने मेघनाथ और अक्षय रखा है। लंकेश साल 1975 यानी पिछले 49 साल से रावण की आराधना कर रहे हैं। नवरात्र में जब लोग माता की प्रतिमा लेकर आते हैं, तब लंकेश रावण की प्रतिमा स्थापित करते हैं। दशहरे पर जब लोग रावण के पुतले का दहन करते हैं तब वे उसकी प्रतिमा को विसर्जित करते हैं। संतोष की इस अनोखी भक्ति ने ही उन्हें लंकेश बना दिया है। 

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दरअसल, जलबपुर के पाटन गांव में रहने वाले संतोष नामदेव उर्फ लंकेश पेशे से टेलर का काम करते हैं। अपने बचपन में वे रामलीला देखने जाया करते थे। कुछ समझदार होने पर उन्हें भगवान राम और रावण की सेना में सैनिक बनने का मौका मिला। इसके कुछ साल बाद जब संतोष जवान हुए थे तो उन्होंने रामलीला में रावण का किरदार निभाया। इस दौरान संतोष ने रावण के बारे में जाना तो उससे प्रभावित हो गए और फिर उसकी भक्ति करने लगे। भक्ति भी ऐसी की अपने दोनों बेटों के नाम मेघनाथ और अक्षय रख दिए। यही नाम रावण के बेटों के भी थे। 
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रावण की पूजा करते लंकेश। - फोटो : अमर उजाला

49 साल से कर रहे रावण की भक्ति
संतोष नामदेव उर्फ लंकेश पिछले 49 साल से रावण की भक्ति कर रहे हैं। वे नवरात्रि की पंचमी तिथि पर रावण की प्रतिमा स्थापित करते हैं। इस दौरान सुबह-शाम रावण की उपासना करते हैं। दशहरे पर रावण की प्रतिका का विसर्जन किया जाता है। इसके लिए धूमधाम से शोभायात्रा निकाली जाती है, जिसमें गांव के सैकड़ों लोग शामिल होते हैं। लंकेश रावण को अपना गुरु और इष्ट देव मानते हैं।

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राक्षस कुल को तारने के लिए रावण ने सब किया 
रावण की अराधना करने को लेकर लंकेश का कहना है कि लंका के राजा रावण में भले की बुराई थी, लेकिन मैं उनकी अच्छाइयों को आगे बढ़ा रहा हूं। रावण बहुत ज्ञान था और वह विद्वान थे, उनमें कोई अवगुण नहीं थे। मैंन 49 साल से रावण की आराधना कर रहा हूं, मुझे जो भी मिला है उनकी भक्ति से ही मिला है, मेरी हर मनोकामना पूरी हुई है। लंकाधिपति रावण ने जो किया वह अपने राक्षस कुल को तारने के लिए किया था। उन्होंने माता सीता का अपहरण किया, लेकिन उन्हें उस अशोक वाटिका में रखा, जहां नर और राक्षस ही नही पशु-पक्षी को भी जाने की अनुमति नहीं थी।  

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