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Jabalpur: 24 घंटे में जवाब दो वरना हाजिर हो, एसडीओ को हाईकोर्ट के सख्त निर्देश
Mon, 16 Oct 2023 09:13 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 16 Oct 2023 09:13 PM IST
सार
शासकीय कर्मी की विधवा को मुआवजा न दिए जाने का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। अब कोर्ट ने एसडीओ को 24 घंटे में जवाब शपथपत्र पर देने का आदेश दिया है। जवाब नहीं देने की स्थिति में एसडीओ को कोर्ट में आना होगा। अगली सुनवाई 18 अक्टूबर तय की गई है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मप्र हाईकोर्ट ने एक शासकीय कर्मी की विधवा को मुआवजा न दिए जाने संबंधी मामले को सख्ती से लिया। जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने मामले में छिंदवाड़ा के अमरवाड़ा एसडीओ को निर्देशित किया है वे 24 घंटे के अंदर शपथपत्र पर अपना जवाब पेश करें। ऐसा न होने की स्थिति में उन्हें व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना होगा। मामले की अगली सुनवाई 18 अक्टूबर को निर्धारित की है।
यह मामला छिंदवाड़ा के अमरवाड़ा निवासी सविता डेहरिया की ओर से दायर किया गया है। इसमें कहा गया कि उनके पति केशवराम डेहरिया शासकीय कर्मी थे। 20 फरवरी 2023 को तालाब में डूबने से उनकी मृत्यु हो गई थी। मध्य प्रदेश राजस्व पुस्तक परिपत्र में विहित संशोधित प्रावधान के तहत डूबने या जानवर के काटने से शासकीय कर्मी की मृत्यु के एवज में उसके परिजनों को चार लाख रुपये तक की मुआवजा राशि दी जाती है।
मामले में कहा गया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले को जांच में ले लिया था। चिकित्सक ने मृत्यु का कारण सिर पर लगी चोट बताया था। तहसीलदार अमरवाड़ा ने मृत्यु को कारण डूबने से दर्शाया था। इसके बावजूद मामला पुनरीक्षण के लिए एसडीओ अमरवाड़ा के समक्ष भेजा गया। एसडीओ ने यह कहते हुए मुआवजा आवेदन निरस्त कर दिया कि मृतक केशवराम डेहरिया शराब पीने का आदी था। नशे की हालत में उसकी मृत्यु हुई थी। एसडीओ के उक्त जवाब पर न्यायालय ने उन्हें 24 घंटे के अंदर शपथपत्र पर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा ने पक्ष रखा।
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यह मामला छिंदवाड़ा के अमरवाड़ा निवासी सविता डेहरिया की ओर से दायर किया गया है। इसमें कहा गया कि उनके पति केशवराम डेहरिया शासकीय कर्मी थे। 20 फरवरी 2023 को तालाब में डूबने से उनकी मृत्यु हो गई थी। मध्य प्रदेश राजस्व पुस्तक परिपत्र में विहित संशोधित प्रावधान के तहत डूबने या जानवर के काटने से शासकीय कर्मी की मृत्यु के एवज में उसके परिजनों को चार लाख रुपये तक की मुआवजा राशि दी जाती है।
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मामले में कहा गया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले को जांच में ले लिया था। चिकित्सक ने मृत्यु का कारण सिर पर लगी चोट बताया था। तहसीलदार अमरवाड़ा ने मृत्यु को कारण डूबने से दर्शाया था। इसके बावजूद मामला पुनरीक्षण के लिए एसडीओ अमरवाड़ा के समक्ष भेजा गया। एसडीओ ने यह कहते हुए मुआवजा आवेदन निरस्त कर दिया कि मृतक केशवराम डेहरिया शराब पीने का आदी था। नशे की हालत में उसकी मृत्यु हुई थी। एसडीओ के उक्त जवाब पर न्यायालय ने उन्हें 24 घंटे के अंदर शपथपत्र पर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा ने पक्ष रखा।
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