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Jabalpur News: 16 माह पूर्व के आदेश को हाईकोर्ट ने किया रि-कॉल, बेंच हंटिंग पर नियंत्रण रखने लिया गया निर्णय

Thu, 19 Oct 2023 08:52 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Thu, 19 Oct 2023 08:52 AM IST
सार

Jabalpur News: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बेंच हंटिंग पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से 16 माह पूर्व पारित आदेश को रिकॉल कर लिया है। 

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Jabalpur News: High Court recalls the order of 16 months ago, decision taken to control bench hunting
MP हाईकोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बेंच हंटिंग पर नियंत्रण रखने के उद्देश्य से 16 माह पूर्व पारित आदेश को रिकॉल कर लिया है। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ ने 10 मई 2022 को रजिस्ट्री को आदेश दिए थे कि अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह के प्रकरणों को उनकी कोर्ट में लिस्ट न किया जाये। उक्त आदेश पर पुनर्विचार के लिए एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एण्ड सोशल जस्टिस की तरफ से याचिका दायर की गयी थी।
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याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि चीफ जस्टिस के उक्त आदेश का फायदा उठाते हुए कई अधिवक्ता बेंच हंटिंग का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि जो अधिवक्ता अपना प्रकरण चीफ जस्टिस की कोर्ट में नहीं लगवाना चाहते, वे मामले में अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह का वकालतनामा पेश कर देते हैं। इस तरह उक्त आदेश को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग का हथियार बना लिया गया है। ऐसा करना न्यायिक प्रशासन के लिए उचित नहीं हैं।
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मामले पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में बेंच हंटिंग के संबंध में दी गई दलीलें उचित हैं। युगलपीठ ने कहा कि इस याचिका में भी जिन अधिवक्ताओं ने वकालतनामा पेश किये हैं, वे स्वयं बेंच हंटिंग में शामिल हैं, इसलिए पूर्व में लगाए गए प्रतिबंधात्मक आदेश को वापस लिया जाना उचित है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक शाह ने पक्ष रखा।  
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भूमि स्वामी अधिकार मामले में अवमानना नोटिस जारी

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि मलिमठ व जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने भूमि स्वामी अधिकार मामले में पूर्व आदेश का पालन होने के मामले को गंभीरता से लिया। युगलपीठ ने उक्त आरोप पर छिंदवाड़ा कलेक्टर को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये हैं।

अवमानना का मामला छिंदवाड़ा अमरवाड़ा निवासी विनिया बाई डेहरिया की ओर से दायर किया गया है, जिसमें कहा गया कि 2017 में भूमि स्वामी अधिकार को लेकर याचिका दायर की गई थी। न्यायालय ने 2021 में मामले का पटाक्षेप कर दिया। आगे चलकर इसी मामले में रिट अपील दायर की गई। जिस पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने पूर्व आदेश को निलंबित करते हुए कलेक्टर के समक्ष अपील के लिए स्वतंत्र कर दिया। साथ ही व्यवस्था दी कि अपील लंबित रहने के दौरान संबंधित भूमि पर यथास्थिति बनाये रखी जाये। कलेक्टर समय-सीमा के भीतर अपील का निराकरण करें। किंतु डेढ़ वर्ष बीतने के बावजूद कलेक्टर ने अपील निराकृत नहीं की, जो कि अवमानना की श्रेणी में आता है।
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