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High Court: बिना आरोप के कंपनी को क्यों किया ब्लैक लिस्ट, एमयू अंक घोटाले मामले में हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

Tue, 03 Jan 2023 05:42 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 03 Jan 2023 05:42 PM IST
सार

जबलपुर हाई कोर्ट में याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि जांच रिपोर्ट में कंपनी पर लगाए गए आरोप सही नहीं पाए गए हैं, जिसके बाद युगलपीठ ने निर्देश जारी किए।

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Jabalpur Company Black List High court asked for answer in MU marks scam case
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी में हुए अंक घोटाले के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। मेडिकल यूनिवर्सिटी की ओर से ब्लैक लिस्ट किए जाने को खिलाफ ठेका कंपनी ने याचिका दायर कर चुनौती दी थी। याचिका की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ को बताया गया कि जांच के लिए गठित कमेटी ने कंपनी पर लगे आरोपों को सही नहीं पाया है। युगलपीठ ने मेडिकल यूनिवर्सिटी के अधिवक्ता को आदेशित किया है कि वह निर्देश लेकर बताए कि ठेका कंपनी को ब्लैक लिस्ट किन कारणों से किया गया है।

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मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी में हुई अंक घोटाले, आर्थिक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को चुनौती देते हुए तीन जनहित याचिकाएं दायर की गई थी। मेडिकल विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से हटाए जाने के खिलाफ तीन अधिकारियों तथा ब्लैक लिस्ट किए जाने के खिलाफ माइंड लॉजिक कंपनी ने याचिका दायर की थी। इसके अलावा तत्कालीन प्रभावी कुलसचिव के खिलाफ राज्य सरकार की तरफ से याचिका दायर की गई थी।
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याचिका में कहा गया था, सरकार के आदेश में प्रभारी कुलसचित डॉ. जेके गुप्ता ने जांच की थी। जांच में पाया गया था कि परीक्षा के आयोजन तथा मार्कशीट तैयार करने वाली ठेका कंपनी माइंट लॉजिट इंफ्रो ने परिक्षार्थियों के नंबर में फेरबदल किया है। इसके अलावा छात्रों का डेटा एमयू की ऑफिशियल साइट नहीं, बल्कि निजी साइट में तैयार किया गया था। जांच के बाद कंपनी को निलंबित कर दिया गया है, जिस कंपनी को निलंबित किया गया था, उनके पूर्व में आगरा मेडिकल यूनिवर्सिटी में काम किया गया। फर्जी मार्कशीट सहित अन्य अनियमिकताओं के खिलाफ आगरा मेडिकल यूनिवर्सिटी ने उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर भी दर्ज करवाई थी। जांच में दोषी पाए जाने के बावजूद भी ठेका कंपनी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
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हाई कोर्ट के आदेश पर सरकार की ओर से याचिकाओं में लगाए गए आरोपों की जांच के लिए रिटॉयर्ड जस्टिस केके त्रिवेदी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी गठित की गई थी। कमेटी में डीईजी साइबर क्राइम भोपाल योगेश देशमुख, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति सुनील कुमार गुप्ता, एमपीएसआईडीसी केबी त्रिपाठी तथा इंजीनियर प्रियांश सोनी को सदस्य बनाया गया था। कमेटी को एक महीने की निर्धारित समय अवधि में अपनी जांच पूर्ण रिपोर्ट पेश करनी थी।

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