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Jabalpur: पुलवामा के शहीद को भूल गया प्रशासन व जनप्रतिनिधि, बरसी के आयोजन में कोई नहीं पहुंचा
Wed, 14 Feb 2024 08:51 PM IST
दिनेश शर्मा
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 14 Feb 2024 08:51 PM IST
सार
14 फरवरी 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के चालीस जवान शहीद हुए थे। इसमें जबलपुर की सिहोरा तहसील के अंतर्गत ग्राम खुडावल निवासी अश्विन काछी (30) भी था। बुधवार को बरसी का कार्यक्रम किया गया था, इसमें प्रशासन का कोई अधिकारी नहीं पहुंचा, न ही कोई जनप्रतिनिधि आया।
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जबलपुर में शहीद की स्मृति में कन्या भोजा का आयोजन हुआ।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
पुलवामा हमले में शहीद हुए सीआरपीएफ जवान अश्विनी काछी को प्रशासन व जनप्रतिनिधियों ने भुला दिया। पुलवामा आतंकी हमले की बुधवार 14 फरवरी को पांचवीं बरसी थी। शहीद जवान अश्विनी काछी की प्रतिमा में माल्यार्पण करने परिजनों के साथ सेना के अधिकारी तथा गांव के लोग ही पहुंचे। परिजनों ने शहीदों के याद में कन्या भोज का आयोजन किया। जिला प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों में कोई नहीं पहुंचा था।
गौरतलब है कि 14 फरवरी 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के चालीस जवान शहीद हुए थे। इसमें जबलपुर की सिहोरा तहसील के अंतर्गत ग्राम खुडावल निवासी अश्विन काछी (30) भी था। परिजन उसकी शादी की तैयारी में लगे हुए थे, परंतु उसका शव तिरंगे में लिपटा हुआ आया था। पुलवामा आतंकी हमले से कुछ दिन पूर्व ही वह घर आया था। उस समय उसने अपने परिजनों व दोस्तों से कहा था कि एक दिन में तिरंगे में लिपटकर लौटूंगा।
शहीद में भाई सुमंत काछी तथा भतीजी प्रियंका काछी ने बताया कि शहादत दिवस पर परिजनों ने अश्विन की याद में उसकी प्रतिमा के समक्ष कन्या भोज का आयोजन किया। गांव के मैदान में शहीद अश्विन की प्रतिमा की स्थापना उनके परिवार ने अपने व्यय से करवाई थी। प्रतिमा के निर्माण में साढे 6 लाख रुपये व्यय हुए थे। अंतिम संस्कार व प्रतिमा अनावरण में समय प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने शहीद के नाम पर स्कूल तथा प्रतिमा स्थल में पार्क बनाने की घोषणा की थी, जो अभी तक पूरी नहीं हुई। शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कोई प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि शिरकत करने नहीं आए। सेना के अधिकारी तथा सेवानिवृत्त सैनिक व ग्रामीणजनों ने कार्यक्रम में शिरकत कर शहीद की प्रतिमा में श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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भतीजी प्रियंका ने बताया कि जब भी जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से पार्क निर्माण या स्कूल के नामांकरण की बात करते हैं तो वे कहते हैं कि एक करोड़ रुपये तो मिल गए हैं। किसी जवान की शहादत का मूल्यांकन रुपये से नहीं करना चाहिए। जवानों की शहादत को चुनाव में मुद्दा बनाया जाता है परंतु शहादत दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने भी कोई नहीं आता है। सरकार द्वारा जो परिजनों को आवास दिया गया है, उसकी दशा भी दयनीय है। सरकार तथा प्रशासन की तरफ से जो वादा किया गया था, उसे पूरा नहीं किया गया।
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गौरतलब है कि 14 फरवरी 2019 में पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के चालीस जवान शहीद हुए थे। इसमें जबलपुर की सिहोरा तहसील के अंतर्गत ग्राम खुडावल निवासी अश्विन काछी (30) भी था। परिजन उसकी शादी की तैयारी में लगे हुए थे, परंतु उसका शव तिरंगे में लिपटा हुआ आया था। पुलवामा आतंकी हमले से कुछ दिन पूर्व ही वह घर आया था। उस समय उसने अपने परिजनों व दोस्तों से कहा था कि एक दिन में तिरंगे में लिपटकर लौटूंगा।
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शहीद में भाई सुमंत काछी तथा भतीजी प्रियंका काछी ने बताया कि शहादत दिवस पर परिजनों ने अश्विन की याद में उसकी प्रतिमा के समक्ष कन्या भोज का आयोजन किया। गांव के मैदान में शहीद अश्विन की प्रतिमा की स्थापना उनके परिवार ने अपने व्यय से करवाई थी। प्रतिमा के निर्माण में साढे 6 लाख रुपये व्यय हुए थे। अंतिम संस्कार व प्रतिमा अनावरण में समय प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों ने शहीद के नाम पर स्कूल तथा प्रतिमा स्थल में पार्क बनाने की घोषणा की थी, जो अभी तक पूरी नहीं हुई। शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कोई प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि शिरकत करने नहीं आए। सेना के अधिकारी तथा सेवानिवृत्त सैनिक व ग्रामीणजनों ने कार्यक्रम में शिरकत कर शहीद की प्रतिमा में श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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भतीजी प्रियंका ने बताया कि जब भी जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से पार्क निर्माण या स्कूल के नामांकरण की बात करते हैं तो वे कहते हैं कि एक करोड़ रुपये तो मिल गए हैं। किसी जवान की शहादत का मूल्यांकन रुपये से नहीं करना चाहिए। जवानों की शहादत को चुनाव में मुद्दा बनाया जाता है परंतु शहादत दिवस पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने भी कोई नहीं आता है। सरकार द्वारा जो परिजनों को आवास दिया गया है, उसकी दशा भी दयनीय है। सरकार तथा प्रशासन की तरफ से जो वादा किया गया था, उसे पूरा नहीं किया गया।
