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MP High Court: संपत्ति न मिलने पर बच्चों का कर्तव्य है कि माता-पिता का भरण-पोषण करें, याचिका खारिज
Wed, 11 Sep 2024 08:08 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Sep 2024 08:08 PM IST
सार
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने कहा, संपत्ति न मिलने पर बच्चों का कर्तव्य है कि अपने माता-पिता का भरण करें। कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक के भारण-पोषण अधिकार के तहत मां के लिए निर्धारित की गई राशि के आदेश को चुनौती देते हुए बेटे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता के बेटे की तरफ से तर्क दिया गया था कि मां ने अपनी संपत्ति तीनों बेटे के नाम पर कर दी है और संपत्ति में उसे कोई हिस्सा नहीं दिया गया है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने याचिका को निरस्त करते हुए अपने आदेश में कहा है कि संपत्ति नहीं मिलने पर बच्चों का कर्तव्य है कि माता-पिता का भरण-पोषण करें।
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नरसिंहपुर निवासी गोविंद लोधी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि उसकी मां हल्की बाई ने माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक के भरण-पोषण अधिकार 2007 के तहत एसडीएम के समक्ष आवेदन दायर किया गया। एसडीएम ने चारों बेटों को तीन-तीन हजार रुपये देने के आदेश जारी किए थे, जिसके खिलाफ उसने अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई करते हुए अपर कलेक्टर ने भरण-पोषण की राशि घटाकर दो-दो हजार रुपये कर दी थी।
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याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि मां ने एसडीएम के समक्ष दायर आवेदन में कहा था कि बेटे ने भरण-पोषण का आश्वासन दिया था, जिसके कारण उसने अपनी संपत्ति अलग-अलग विक्रय-पत्र निष्पादित कर दी थी। बेटों द्वारा भरण-पोषण नहीं किए जाने के कारण उक्त आवेदन दायर किया है। मां ने अपने आठ एकड़ जमीन में से उसे एक टुकड़ा भी नहीं दिया था। इसलिए उसे भरण-पोषण के दायित्व से मुक्त किया जाए। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने का भी उल्लेख किया था।
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एकलपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा है कि माता-पिता को भरण-पोषण के भुगतान की बात इस बात पर निर्भर नहीं है कि बच्चों को कितनी संपत्ति दी गई है। बच्चों का यह कर्तव्य है कि वह अपने माता-पिता का भरण-पोषण करें। याचिकाकर्ता भूमि के असामान्य वितरण से व्यथित है तो सिविल मुकदमा दायर कर सकता है। वह अपनी मां को भरण-पोषण राशि के भुगतान दायित्व से भाग नहीं सकता है।
