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Jabalpur News: 'भ्रष्टाचार में फंसे सरपंच के पास नहीं होगा पैसे खर्च करने का हक', हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
Tue, 27 May 2025 08:56 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Tue, 27 May 2025 08:56 PM IST
सार
जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने कहा है कि भ्रष्टाचार के आरोपी सरपंच से पैसे खर्च करने का अधिकार वापस लेना सही फैसला है। कोर्ट ने सरपंच की वह याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने अपने अधिकार छीने जाने को गलत बताया था। यह याचिका मंघु बैगा ने दायर की थी, जो श्री धन्नू बैगा का बेटा है।
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जबलपुर हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
जबलपुर हाईकोर्ट के जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ ने फैसला सुनाया है कि भ्रष्टाचार के आरोपी सरपंच से वित्तीय अधिकार वापस लेना सही कदम है। कोर्ट ने सरपंच की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उसने अपने अधिकार वापस लेने के फैसले को गलत बताया था। यह याचिका मंघु बैगा (पिता श्री धन्नू बैगा) ने दायर की थी। वह जिला शहडोल के तहसील सोहागपुर की ग्राम पंचायत मायकी का निर्वाचित सरपंच है। उसके खिलाफ लोकायुक्त ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेने का केस दर्ज किया है, जो अभी लंबित है। इस मामले के बाद जिला पंचायत शहडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने उसके वित्तीय अधिकार छीन लिए और ये अधिकार पंचायत समन्वयक राजबहोर साकेत को दे दिए।
सरपंच ने कोर्ट में यह दलील दी थी कि उसके खिलाफ सिर्फ केस दर्ज हुआ है, फैसला नहीं आया है, इसलिए उसके अधिकार छीनना गलत है। लेकिन सरकार की ओर से बताया गया कि आरोप भ्रष्टाचार और अधिकारों के गलत इस्तेमाल से जुड़े हैं, इसलिए यह कदम उठाया गया।
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कोर्ट ने "मध्य प्रदेश पंचायत (मुख्य कार्यपालन अधिकारी की शक्तियाँ एवं कार्य) नियम, 1995" का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी को यह अधिकार है कि वह पंचायत के कार्यों की निगरानी करे और पंचायत की संपत्ति और धन की सुरक्षा सुनिश्चित करे। इसलिए यदि कोई सरपंच भ्रष्टाचार में शामिल पाया जाए, तो उसके वित्तीय अधिकार छीने जा सकते हैं। इस आधार पर कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
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सरपंच ने कोर्ट में यह दलील दी थी कि उसके खिलाफ सिर्फ केस दर्ज हुआ है, फैसला नहीं आया है, इसलिए उसके अधिकार छीनना गलत है। लेकिन सरकार की ओर से बताया गया कि आरोप भ्रष्टाचार और अधिकारों के गलत इस्तेमाल से जुड़े हैं, इसलिए यह कदम उठाया गया।
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कोर्ट ने "मध्य प्रदेश पंचायत (मुख्य कार्यपालन अधिकारी की शक्तियाँ एवं कार्य) नियम, 1995" का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी को यह अधिकार है कि वह पंचायत के कार्यों की निगरानी करे और पंचायत की संपत्ति और धन की सुरक्षा सुनिश्चित करे। इसलिए यदि कोई सरपंच भ्रष्टाचार में शामिल पाया जाए, तो उसके वित्तीय अधिकार छीने जा सकते हैं। इस आधार पर कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया।
