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Jabalpur News: सीआरएस का आदेश था अवैधानिक तो बैंक अधिकारी को प्रदान करें सभी लाभ, हाईकोर्ट का अहम आदेश
Sun, 02 Feb 2025 09:39 PM IST
जबलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: जबलपुर ब्यूरो
Updated Sun, 02 Feb 2025 09:39 PM IST
सार
हाईकोर्ट की युगलपीठ ने बैंक अधिकारी नर्मदा प्रसाद चौधरी की अनिवार्य सेवानिवृत्ति को गलत ठहराते हुए बैंक ऑफ इंडिया की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने आठ साल के वेतन, प्रमोशन और अन्य लाभों का भुगतान आठ प्रतिशत ब्याज सहित करने का आदेश दिया, जिससे अधिकारी को न्याय मिला।
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high court
विस्तार
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन ने अपने अहम आदेश में कहा है कि बैंक अधिकारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति गलत तरीके से प्रदान की गई थी। कर्मचारियों के सेवाकाल की गणना में कर्मचारी को सीआरएस देने तथा उसे सेवा में वापस लेने का अवधि को भी शामिल किया जाए। युगलपीठ ने बैंक ऑफ इंडिया की अपील को खारिज करते हुए बैंक अधिकारी को सभी लाभ प्रदान करने के आदेश जारी किए हैं।
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बैंक ऑफ इंडिया की तरफ से दायर अपील में एकलपीठ के उक्त आदेश को चुनौती दी गई थी। इसमें सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी के पक्ष में आदेश जारी किया गया था। इसके अलावा सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने भी अपील दायर की थी। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि नर्मदा प्रसाद चौधरी जून 2013 में वरिष्ठ जुलाई 1974 में प्रारंभ हुई थी। उन्हें जनवरी 2002 में अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान कर दी थी। हाईकोर्ट व सर्वोच्च न्यायालय ने अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को अवैधानिक करार दिया था। इसके बाद नर्मदा प्रसाद चौधरी को सितम्बर 2009 को सेवा में वापस लिया गया।
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सेवानिवृत्ति के बाद बैंक द्वारा कुल सेवा में सीआरएस दिये जाने से लेकर वापस सेवा में लिए जाने की गणना नहीं की गई थी। जिसे चुनौती देते हुए सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी के पक्ष में आदेश जारी किए थे। इसके खिलाफ बैंक ऑफ इंडिया तथा सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने अपील दायर की थी। युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने बैंक ऑफ इंडिया की अपील खारिज करते हुए सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को लगभग आठ साल का वेतन, फिटमेंट प्रमोशन सहित अन्य लाभ का भुगतान आठ प्रतिशत ब्याज सहित करने के आदेश जारी किए हैं। सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी ने सुनवाई के दौरान अपना पक्ष स्वयं रखा।
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