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Jabalpur: अस्पताल अग्निकांड मामले पर हाईकोर्ट सख्त, दो डॉक्टरों को किया निलंबित, एक को नोटिस जारी

Tue, 23 Aug 2022 08:55 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Tue, 23 Aug 2022 08:55 AM IST
सार

अस्पताल संचालन के लायसेंस के लिए निरिक्षण करने वाली तीन सदस्यीय डॉक्टरों की कमेटी के सदस्यों के खिलाफ निलंबित की गयी है। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि अस्पताल का निरिक्षण डॉ एल एन पटैल, डॉ निषेश पटेल तथा डॉ कमलेश वर्मा द्वारा किया गया था।

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High court strict on Jabalpur hospital fire case, two doctors suspended, notice issued to one
MP High Court - फोटो : Social Media

विस्तार

जबलपुर शहर के न्यू लाईफ मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल का निरीक्षण करने वाले दो डॉक्टरों को हाईकोर्ट ने निलंबित कर दिया है, जबकि एक डॉक्टर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सरकार की तरफ से हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ के समक्ष सोमवार को ये जानकारी पेश की गयी। याचिकाकर्ता की तरफ से हादसे के बाद जांच के लिए गठित बिंदुओ में बिल्डिंग कम्पलीशन सर्टिफिकेट को हटाये जाने पर आपत्ति पेश की गयी। युगलपीठ ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए जांच को सीबीआई या एसआईटी को सौंपने की चेतावनी देते हुए अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की है।
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लॉ स्टूडेंट एसोसियेशन के प्रेसीडेंट विशाल बघेल की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर में नियम विरूध्द तरीके से प्राइवेट अस्पताल को संचालन की अनुमति प्रदान की गयी है। कोरोनाकाल में विगत तीन साल में 65 निजी अस्पलातों को संचालन की अनुमति दी गयी है। जिन अस्पतालों को अनुमति दी गयी है, उनमें नेशनल बिल्डिंग कोड, फायर सिक्योरिटी के नियमों का पालन नहीं किया गया है। जमीन के उपयोग का उद्देश्य दूसरा होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति दी गयी है। बिल्डिंग का कार्य पूर्ण होने का प्रमाण-पत्र नहीं होने के बावजूद भी अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गयी है।
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याचिका में कहा गया था कि भौतिक सत्यापन किये बिना अस्पताल संचालन की अनुमति प्रदान की गयी है। अस्पतलों के मेडिकल व पैरामेडिकल सहित अन्य स्टाफ की जांच तक नहीं की गयी है। याचिका पर पिछली सुनवाई के दौरान न्यू लाईफ मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के मामले में सरकार की तरफ से कार्रवाई रिपोर्ट पेश की गयी। रिपोर्ट में कहा गया था कि अस्पताल संचालन के लायसेंस के लिए निरिक्षण करने वाली तीन सदस्यीय डॉक्टरों की कमेटी के सदस्यों के खिलाफ निलंबित की गयी है। याचिकाकर्ता की तरफ से बताया गया कि अस्पताल का निरिक्षण डॉ एल एन पटैल, डॉ निषेश पटेल तथा डॉ कमलेश वर्मा द्वारा किया गया था। उनकी निरिक्षण रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल संचालन का लायसेंस जारी किया गया था। कार्रवाई रिपोर्ट में बताया गया कि शहर के सभी निजी अस्पतालों की जांच के लिए 41 सदस्यीय डॉक्टरों की टीम का गठन किया गया था। जिन्हें निजी अस्पतालों का निरिक्षण कर रिपोर्ट देना था। उस टीम में वे तीन डॉक्टर को शामिल किया गया है, जिन्हें निलंबित किये जाने का जिक्र रिपोर्ट में है। युगलपीठ ने अगली सुनवाई के दौरान निलंबन आदेश पेश करने के निर्देश जारी किये थे।
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याचिका पर सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता भरत सिंह ने शपथ पत्र पेश करते हुए बताया कि न्यू लाइफ मल्टी सिटी हॉस्पिटल को पंजीयन के पूर्व किये गये निरीक्षण में क्लीन चिट देने के मामले में दो चिकित्सक एल.एन. पटेल , निषेश चौधरी को निलंबित कर दिया गया है। नर्सिंग होम शाखा की जम्मेदारी संभाल रहे डॉ. कमलेश वर्मा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।


याचिकाकर्ता की तरफ से आवेदन और दस्तावेज पेश करते हुए बताया गया कि हादसे के बाद निजी अस्पतालों के निरिक्षण आदेश में जांच के दौरान भवन का बिल्डिंग कम्पलीशन सर्टिफिकेट जांचा जाना अनिवार्य किया था। आदेश में संशोधन करते हुए दूसरे दिन 3 अगस्त को बिल्डिंग परमिशन शब्द प्रयोग किया गया है। जिससे अस्पतालों को जांच टीम के समक्ष अपनी बिल्डिंग के कम्पलीशन सर्टिफिकेट पेश करने की आवश्यकता ही समाप्त हो गयी। इस संबंध में संतोषजनक जवाब पेश नहीं कर पाने पर युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा ऐसा ढुलमुल रवैया चलता रहेगा तो जांच सीबीआई या एसआईटी को सौंपी जाएगी। युगलपीठ ने सम्पूर्ण घटनाक्रम का क्रमवार ब्यौरा शपथ पत्र में पेश करने के निर्देश जारी करते हुए अगली सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की है।
 
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