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MP News: पश्चिम-मध्य रेलवे के महाप्रबंधक और डीआरएम भोपाल को किया तलब, अवमानना का मामला
Mon, 20 Mar 2023 07:54 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 20 Mar 2023 07:54 PM IST
सार
आदेश के बावजूद भी याचिकाकर्ता को नियुक्ति नहीं दिए जाने के मामले को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण जबलपुर की पीठ ने गंभीरता से लिया है। अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए पश्चिम-मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तथा डीआरएम भोपाल को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण जबलपुर की पीठ ने आदेश के बावजूद भी याचिकाकर्ता को नियुक्ति नहीं दिए जाने को गंभीरता से लिया है। जस्टिस एके श्रीवास्तव तथा जस्टिस राजेश चंद्रा की युगलपीठ ने दायर अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए पश्चिम-मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तथा डीआरएम भोपाल सौरभ कुमार बंधोपाध्याय के साथ वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी अजय कुमार दीक्षित को व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। याचिका पर अगली सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
बता दें कि होशंगाबाद जिले में रहने वाले शिवांश पांडे की तरफ से याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि रेलवे विभाग ने उनके पिता के नाम पर दर्ज जमीन का अधिग्रहण किया था। जमीन के अधिग्रहण में परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का प्रावधान है। उसे ट्रेकमैन पद पर नौकरी प्रदान करने की पेशकश की गई थी। विकलांग होने के कारण उसने किसी अन्य विभाग में पदस्थ किए जाने का आवेदन किया था, जो अस्वीकार कर दिया गया था। इसके बाद वह ट्रेकमैन पद पर नौकरी करने तैयार हो गया था।
रेलवे द्वारा नौकरी नहीं दिए जाने को चुनौती देते हुए उसने कैट में याचिका दायर की थी। इसकी सुनवाई करते हुए उसे सात दिनों में नियुक्ति-पत्र जारी करने के आदेश जारी किए गए थे। आदेश का पालन नहीं होने पर उक्त याचिका दायर की गई। अवमानना याचिका में कहा गया था कि वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी अजय कुमार दीक्षित ने आदेश जारी किए हैं कि नौकरी के एवज में पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। जिसे गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने अधिकारियों को तलब किया है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एन एस रूपराह ने पैरवी की।
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बता दें कि होशंगाबाद जिले में रहने वाले शिवांश पांडे की तरफ से याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया था कि रेलवे विभाग ने उनके पिता के नाम पर दर्ज जमीन का अधिग्रहण किया था। जमीन के अधिग्रहण में परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का प्रावधान है। उसे ट्रेकमैन पद पर नौकरी प्रदान करने की पेशकश की गई थी। विकलांग होने के कारण उसने किसी अन्य विभाग में पदस्थ किए जाने का आवेदन किया था, जो अस्वीकार कर दिया गया था। इसके बाद वह ट्रेकमैन पद पर नौकरी करने तैयार हो गया था।
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रेलवे द्वारा नौकरी नहीं दिए जाने को चुनौती देते हुए उसने कैट में याचिका दायर की थी। इसकी सुनवाई करते हुए उसे सात दिनों में नियुक्ति-पत्र जारी करने के आदेश जारी किए गए थे। आदेश का पालन नहीं होने पर उक्त याचिका दायर की गई। अवमानना याचिका में कहा गया था कि वरिष्ठ कार्मिक अधिकारी अजय कुमार दीक्षित ने आदेश जारी किए हैं कि नौकरी के एवज में पांच लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा। जिसे गंभीरता से लेते हुए युगलपीठ ने अधिकारियों को तलब किया है। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता एन एस रूपराह ने पैरवी की।
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